By: Vikash, Mala Mandal
देवघर: देवघर नगर निगम क्षेत्र में वाहन प्रवेश शुल्क (टोल टैक्स) को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। नगर निगम के महापौर रवि कुमार राउत ने स्वयं निरीक्षण कर इंट्री प्वाइंट्स पर हो रही अवैध वसूली का पर्दाफाश किया है। इस दौरान यह पाया गया कि संवेदक (ठेकेदार) और उनके कर्मी निर्धारित दर से करीब 30 प्रतिशत अधिक राशि वसूल रहे थे, जिससे स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में काफी नाराजगी थी।

दरअसल, महापौर को पिछले कुछ दिनों से लगातार स्थानीय युवाओं, वाहन मालिकों और चालकों द्वारा दूरभाष, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि नगर निगम के विभिन्न इंट्री प्वाइंट्स पर निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं और इस पर कोई निगरानी नहीं हो रही है।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने बिना किसी पूर्व सूचना के नगर निगम क्षेत्र के प्रमुख इंट्री प्वाइंट्स का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने टोलकर्मियों और वाहन चालकों से सीधे बातचीत की और मौके पर जारी की जा रही शुल्क रसीदों की जांच की। जांच में स्पष्ट रूप से सामने आया कि निर्धारित दर से अधिक राशि ली जा रही है, जो पूरी तरह से अवैध है।
इस गड़बड़ी को देखकर महापौर रवि कुमार राउत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली न केवल गलत है बल्कि पूरी नगर निगम व्यवस्था को बदनाम करने वाली है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यह भ्रष्टाचार और अत्यधिक लालच की प्रवृत्ति है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

निरीक्षण के दौरान महापौर ने स्थानीय निवासियों से भी बातचीत की। लोगों ने बताया कि यह अवैध वसूली का सिलसिला कोई नया नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से लगातार चल रहा है। इससे आम जनता, खासकर छोटे वाहन चालकों और व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर ने संबंधित संवेदकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की है। उन्होंने निगम प्रशासन को निर्देश दिया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यह पता लगाया जाए कि इस अवैध वसूली में कौन-कौन लोग शामिल हैं, ताकि पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके।

महापौर ने निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द सभी इंट्री प्वाइंट्स पर वाहन शुल्क की अधिकृत दर सूची (रेट चार्ट) सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा, नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी करने का निर्देश दिया गया है, जिससे लोग सीधे शिकायत दर्ज करा सकें।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि हर इंट्री प्वाइंट पर स्पष्ट रूप से शुल्क तालिका लगी हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में नागरिक तुरंत शिकायत कर सकें। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी बल्कि लोगों का नगर निगम पर भरोसा भी बढ़ेगा।

यह घटना देवघर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करती है और यह दर्शाती है कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है। हालांकि महापौर की इस कार्रवाई को आम जनता ने सराहा है और उम्मीद जताई है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर समय-समय पर इस तरह के औचक निरीक्षण होते रहें तो भ्रष्टाचार पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

कुल मिलाकर, देवघर में टोल वसूली को लेकर सामने आया यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन महापौर की सक्रियता से यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही इस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।

