By: Vikash, Mala Mandal
देवघर, जिले में कानून – व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा अपराध नियंत्रण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक कार्यालय सभागार में मासिक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार ने की। बैठक में जिले के सभी थाना प्रभारी, सर्किल इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे।

गोष्ठी के दौरान जिले में घटित अपराधों, लंबित मामलों और कानून-व्यवस्था की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों से उनके-अपने क्षेत्रों में अपराध की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा – निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आम जनता की सुरक्षा और सेवा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

बैठक में लंबित मामलों के निष्पादन पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि कई मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी थाना प्रभारी लंबित मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका शीघ्र निष्पादन करें। गंभीर मामलों को पहले निपटाने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।

इसके साथ ही पुराने हिस्ट्रीशीटर अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि ऐसे अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है, ताकि वे दोबारा किसी आपराधिक घटना को अंजाम न दे सकें। इसके लिए थाना स्तर पर निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

बैठक में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को लेकर भी गंभीर चर्चा की गई। वर्तमान समय में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल और डिजिटल फ्रॉड जैसी घटनाओं में तेजी आई है, जिसे रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाने की जरूरत है। पुलिस अधीक्षक ने सभी थानों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कम से कम 10 सक्रिय साइबर अपराधियों की पहचान करें और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें।

उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर साइबर अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाए, ताकि अपराधियों में डर का माहौल बने। इसके अलावा आम लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए, जिससे लोग ठगी का शिकार होने से बच सकें।
पुराने अपराधियों की निगरानी को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए उन्हें A, B और C श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। A श्रेणी में उन अपराधियों को रखा गया है जो अत्यधिक सक्रिय और खतरनाक हैं। ऐसे अपराधियों का 7 दिनों के भीतर फिजिकल वेरिफिकेशन करना अनिवार्य किया गया है। वहीं B श्रेणी के अपराधियों का 15 दिनों के भीतर और C श्रेणी के अपराधियों का एक महीने के भीतर सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस वर्गीकरण का उद्देश्य पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि ज्यादा खतरनाक अपराधियों पर विशेष ध्यान दिया जा सके। सत्यापन के दौरान अपराधियों की वर्तमान स्थिति, गतिविधियों और संपर्कों की पूरी जानकारी जुटाने को कहा गया है।
गोष्ठी के दौरान थाना स्तर पर आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा हुई। कई थाना प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की चुनौतियों से अवगत कराया, जिस पर पुलिस अधीक्षक ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को हर परिस्थिति में तत्पर और सक्रिय रहना चाहिए।

इसके अलावा नियमित गश्ती बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि त्योहारों और विशेष अवसरों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों को जनता के साथ बेहतर व्यवहार करने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि जनता के बीच सकारात्मक होनी चाहिए और इसके लिए प्रत्येक पुलिसकर्मी को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा।

इस मासिक अपराध गोष्ठी के माध्यम से देवघर पुलिस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साइबर अपराध, लंबित मामलों और हिस्ट्रीशीटर अपराधियों पर विशेष फोकस के साथ पुलिस प्रशासन जिले में शांति और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
