By: Vikash, Mala Mandal
देवघर | 25 अप्रैल 2026 विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर देवघर के सदर अस्पताल सभागार में एक महत्वपूर्ण अंतर्विभागीय बैठक सह उन्मुखीकरण, शपथ ग्रहण एवं प्रशस्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने की। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मलेरिया उन्मूलन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और सामूहिक प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना था।

कार्यक्रम में जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार यादव, जिला भीबीडी सलाहकार डॉ. गणेश कुमार यादव, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. संचयन, जिला आरसीएच पदाधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी एनयूएचएम डॉ. के. के. सिंह, उपाधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा, आईएमए के सचिव डॉ. गौरी शंकर सहित नगर विकास विभाग, एम्स देवघर, शिक्षा विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, जेएसएलपीएस और अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
मलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक रणनीति पर जोर
बैठक के दौरान मलेरिया नियंत्रण एवं रोकथाम को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने देवघर जिले में मलेरिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि वर्ष 2010 से 2025 के बीच जिले में मलेरिया मामलों में लगभग 87 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

इस वर्ष की थीम “Driven to End Malaria: Now We Can. Now We Must.” यानी “मलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा” के अनुरूप सभी उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मलेरिया उन्मूलन की शपथ दिलाई गई। इस शपथ के माध्यम से सामुदायिक सहभागिता और प्रशासनिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
मलेरिया के कारण और रोकथाम के उपायों पर विशेष जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके नियंत्रण के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार, जागरूकता अभियान, सोर्स रिडक्शन (जल जमाव हटाना), त्वरित जांच और समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है।
अधिकारियों ने कहा कि मच्छर केवल असुविधा का कारण नहीं हैं, बल्कि वे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों के वाहक भी हैं। इसलिए मच्छरों को दुनिया का सबसे घातक जीव माना जाता है।

एकीकृत मच्छर प्रबंधन के चार प्रमुख स्तंभ
बैठक में प्रभावी मच्छर नियंत्रण के लिए चार प्रमुख रणनीतियों पर बल दिया गया:
1. मच्छर निगरानी एवं रोग परीक्षण
2. सार्वजनिक शिक्षा एवं जागरूकता
3. मच्छरों के लार्वा नियंत्रण कार्यक्रम
4. वयस्क मच्छर नियंत्रण कार्यक्रम
इन चार स्तंभों पर समन्वित रूप से कार्य करने से मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 कर्मियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मलेरिया नियंत्रण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कुल 18 अधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके निरंतर प्रयास, समर्पण और जनहित में किए गए कार्यों की सराहना के रूप में दिया गया।
सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “मलेरिया से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है। यदि सभी विभाग मिलकर कार्य करें और आम जनता भी जागरूक बने, तो देवघर जिले को जल्द ही मलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।”

जनसंदेश: जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी तरीका
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि मलेरिया उन्मूलन के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि हर विभाग और हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। जागरूकता, रोकथाम और समय पर उपचार ही इस बीमारी से मुक्ति का एकमात्र प्रभावी उपाय है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास साफ-सफाई रखें, पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें और बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं।

सरकार का लक्ष्य और आगे की रणनीति
बैठक में बताया गया कि भारत सरकार का लक्ष्य मलेरिया के स्वदेशी मामलों को तेजी से कम करना और जल्द से जल्द पूर्ण उन्मूलन हासिल करना है। इसके लिए जिला स्तर पर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और सभी विभागों को इसमें सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

