By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Parama Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में अधिक मास की परमा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने तथा व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसे में इस वर्ष कई श्रद्धालुओं के मन में यह प्रश्न है कि परमा एकादशी का व्रत 10 जून को रखा जाएगा या 11 जून को। आइए जानते हैं परमा एकादशी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का समय।

कब है परमा एकादशी 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को परमा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से अनेक यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। एकादशी तिथि का आरंभ 10 जून 2026 को होगा और इसका समापन 11 जून 2026 को होगा। उदया तिथि के आधार पर अधिकांश श्रद्धालु 11 जून 2026, गुरुवार को परमा एकादशी व्रत रखेंगे।

परमा एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में परमा एकादशी को विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करता है, उसे पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अधिक मास में आने वाली यह एकादशी जीवन में आर्थिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने वाली मानी जाती है। कहा जाता है कि परमा एकादशी का व्रत करने से दरिद्रता, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा व्यक्ति को सुख, समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है।

परमा एकादशी पूजा विधि
परमा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें।
विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
दिनभर व्रत रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करें।
शाम के समय दीपदान और विष्णु आरती अवश्य करें।
रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का भी विशेष महत्व माना गया है।

परमा एकादशी के दिन करें ये उपाय
भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
पीले वस्त्र और पीले फलों का दान करना शुभ माना जाता है।
विष्णु मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन करें।
गाय को हरा चारा खिलाने से भी शुभ फल की प्राप्ति होती है।

परमा एकादशी व्रत पारण का समय
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सही समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
पारण के लिए द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय का पालन करना चाहिए। श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय अवश्य देख लेना चाहिए।
परमा एकादशी से जुड़ी मान्यताएं
धार्मिक मान्यता है कि अधिक मास में की गई पूजा, जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए परमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

परमा एकादशी पर क्या करें और क्या न करें?
व्रत के दिन सात्विक आहार का पालन करें।
क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
किसी का अपमान न करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए दिन बिताएं।
अधिक मास की परमा एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यदि आप भी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो परमा एकादशी के दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य अवश्य करें।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और उपलब्ध ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित है। NewsBag.in किसी भी धार्मिक दावे की पूर्ण पुष्टि नहीं करता। किसी भी पूजा-व्रत या धार्मिक अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंचांग अथवा योग्य विद्वान की सलाह अवश्य लें।

