By: Mala Mandal
नई दिल्ली। आधार कार्ड को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जो देश के करोड़ों लोगों को प्रभावित कर सकता है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने साफ कर दिया है कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि (Date of Birth) के पुख्ता प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद कई सरकारी और गैर-सरकारी कामों में लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।

दरअसल, आधार कार्ड को अब तक एक महत्वपूर्ण पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें व्यक्ति का नाम, पता, फोटो और जन्मतिथि जैसी जानकारी दर्ज होती है। लेकिन UIDAI के मुताबिक, आधार में दर्ज जन्मतिथि हमेशा पूरी तरह प्रमाणित नहीं होती, क्योंकि कई मामलों में यह जानकारी स्वयं व्यक्ति द्वारा दी जाती है या फिर अन्य दस्तावेजों के आधार पर दर्ज की जाती है।
UIDAI का क्या कहना है?
UIDAI ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड केवल पहचान (Identity Proof) और पते (Address Proof) के रूप में ही मान्य रहेगा। इसे जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। प्राधिकरण के अनुसार, आधार में दर्ज जन्मतिथि तीन श्रेणियों में हो सकती है—
– Verified (सत्यापित)
– Declared (घोषित)
– Approximate (अनुमानित)

इनमें से ‘Declared’ और ‘Approximate’ श्रेणियों में दर्ज जन्मतिथि को पूरी तरह सटीक नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि इसे आधिकारिक उम्र प्रमाण के रूप में हटाया गया है।
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
अब यदि आपको अपनी उम्र या जन्मतिथि का प्रमाण देना है, तो आपको अन्य वैध दस्तावेजों का सहारा लेना होगा। इनमें शामिल हैं—
– जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
– 10वीं की मार्कशीट
– पासपोर्ट
– पैन कार्ड (कुछ मामलों में)
– सरकारी विभाग द्वारा जारी अन्य प्रमाण पत्र
इन दस्तावेजों को अधिक विश्वसनीय और प्रमाणित माना जाता है।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
इस नए नियम का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो केवल आधार कार्ड के आधार पर ही अपनी उम्र साबित करते थे। खासकर नौकरी के आवेदन, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन, पासपोर्ट बनवाने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के दौरान अब अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव थोड़ी परेशानी का कारण बन सकता है, क्योंकि कई लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र या अन्य वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में उन्हें पहले अपने दस्तावेज बनवाने होंगे।

सरकारी प्रक्रियाओं में बदलाव
UIDAI के इस फैसले के बाद कई सरकारी विभाग भी अपने नियमों में बदलाव कर सकते हैं। पहले जहां आधार को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता था, अब वहां अन्य दस्तावेज अनिवार्य किए जा सकते हैं। इससे दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया और अधिक सख्त हो जाएगी।
फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारी के मामलों में कमी आएगी। कई बार लोग गलत जन्मतिथि दर्ज करवा लेते थे, जिससे विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का गलत लाभ उठाया जाता था। अब इस पर रोक लगेगी और सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा।

क्या आधार कार्ड की अहमियत कम होगी?
हालांकि इस बदलाव के बाद आधार कार्ड की भूमिका कम नहीं होगी। यह अब भी एक महत्वपूर्ण पहचान पत्र रहेगा और बैंकिंग, मोबाइल सिम, सरकारी योजनाओं और अन्य सेवाओं में इसकी उपयोगिता बनी रहेगी।
UIDAI ने यह भी कहा है कि लोग अपने आधार में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट कराते रहें, ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके।

विशेषज्ञों की राय
डिजिटल पहचान और दस्तावेज सत्यापन के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला लंबे समय से जरूरी था। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत जानकारी के आधार पर मिलने वाले लाभों पर रोक लगेगी।
क्या करें आम नागरिक?
अगर आपके पास केवल आधार कार्ड ही उम्र का प्रमाण है, तो जल्द ही अन्य जरूरी दस्तावेज बनवा लें। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए स्थानीय नगर निगम या पंचायत कार्यालय में आवेदन किया जा सकता है। वहीं, 10वीं की मार्कशीट या अन्य प्रमाण पत्र भी सुरक्षित रखें।
कुल मिलाकर, UIDAI का यह फैसला देश में दस्तावेज सत्यापन प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि इससे आम लोगों को शुरुआत में थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा।

