By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली:प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील कर आर्थिक अनुशासन और ऊर्जा बचत पर जोर दिया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच पीएम मोदी का यह बयान देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा सोना आयात करते हैं। हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार सोना खरीदने में खर्च हो जाता है। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना हुआ है, तब अनावश्यक आयात को कम करना बेहद जरूरी हो गया है।
पश्चिम एशिया संकट का भारत पर असर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन, महंगाई और आम आदमी की जेब पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन देशवासियों का सहयोग भी उतना ही जरूरी है। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वे ऊर्जा की बचत करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें और गैरजरूरी खर्चों में कटौती करें।

सोना खरीदने से क्यों बचने को कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय परिवारों में सोना खरीदना परंपरा और निवेश दोनों का हिस्सा रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा सकता है। भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि अगर नागरिक अगले एक साल तक सोने की खरीदारी कम कर दें, तो इससे देश को आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे आयात बिल कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का फोकस फिलहाल जरूरी आयातों को प्राथमिकता देने पर है।
वर्क फ्रॉम होम और ईंधन बचत पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कंपनियों और संस्थानों से वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की भी अपील की। उनका कहना था कि इससे ईंधन की खपत कम होगी और ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान देश ने वर्क फ्रॉम होम मॉडल को सफलतापूर्वक अपनाया था और जरूरत पड़ने पर इसे फिर से बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने लोगों से कार पूलिंग अपनाने, गैरजरूरी यात्रा से बचने और ऊर्जा संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की भी अपील की।

अर्थशास्त्रियों ने क्या कहा?
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी की अपील का मकसद लोगों को आर्थिक चुनौतियों के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल काफी बढ़ सकता है। ऐसे में सोने जैसे गैरजरूरी आयातों में कमी देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत रखने में मददगार साबित हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सोने की कीमतों में तेजी के कारण लोग निवेश के तौर पर इसकी खरीदारी बढ़ाते हैं, लेकिन इससे देश का व्यापार घाटा बढ़ता है। इसलिए सरकार चाहती है कि लोग फिलहाल सावधानी बरतें।

जनता में चर्चा का विषय बनी अपील
प्रधानमंत्री की यह अपील सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। कई लोगों ने इसे देशहित में उठाया गया कदम बताया, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि भारतीय संस्कृति में सोने का विशेष महत्व है और इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

हालांकि, सरकार का संदेश साफ है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक अनुशासन और संसाधनों की बचत बेहद जरूरी है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय हालात किस दिशा में जाते हैं, इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया संकट, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को देश की आर्थिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सोना खरीदने से बचने, ईंधन बचत और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने जैसे सुझावों के जरिए सरकार आर्थिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब देखने वाली बात होगी कि जनता इस अपील को किस तरह से अपनाती है।

