By: Mala Mandal
झारखंड के देवघर जिले में इन दिनों APAAR कार्ड को लेकर अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत छात्रों के लिए बनाए जा रहे APAAR कार्ड की प्रक्रिया अब कई परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनती दिख रही है। स्थिति ऐसी हो गई है कि कई बच्चों का स्कूल में नामांकन और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। अभिभावक स्कूलों और साइबर कैफे के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जबकि दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन भी तकनीकी समस्याओं और दस्तावेजों की कमी का हवाला दे रहा है।

दरअसल, केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक छात्र के लिए एक विशेष डिजिटल पहचान यानी APAAR कार्ड बनाया जा रहा है। इस कार्ड के माध्यम से छात्र की शैक्षणिक जानकारी, रिजल्ट, प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखे जाएंगे। इसे “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” की तरह विकसित किया जा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रक्रिया फिलहाल आसान नहीं दिख रही।

देवघर के कई सरकारी और निजी स्कूलों में अभिभावकों को यह बताया जा रहा है कि बच्चों का नामांकन, छात्रवृत्ति, परीक्षा फॉर्म या अन्य प्रक्रियाओं के लिए APAAR कार्ड जरूरी है। ऐसे में जिन बच्चों का कार्ड नहीं बन पा रहा है, वे विभिन्न शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर की त्रुटि के कारण APAAR कार्ड बनने में दिक्कत आ रही है।

अभिभावकों के अनुसार, स्कूलों की ओर से बार-बार दस्तावेज अपडेट कराने को कहा जा रहा है। कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बार-बार साइबर कैफे तथा आधार केंद्र के चक्कर लगाने में उन्हें परेशानी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी सुविधाओं की कमी भी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि APAAR कार्ड छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है। इससे विद्यार्थियों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा और भविष्य में स्कूल बदलने, स्कॉलरशिप लेने या उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने में सुविधा मिलेगी। हालांकि विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि शुरुआती चरण में तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन्हें जल्द दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

स्कूल प्रबंधन की मानें तो कई बार पोर्टल ठीक से काम नहीं करता, जिससे डेटा अपलोड करने में परेशानी होती है। कुछ मामलों में आधार सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है। इसके कारण बच्चों का डेटा लंबित रह जाता है। वहीं कई स्कूलों में शिक्षकों को भी नई प्रणाली को समझने और संचालित करने में समय लग रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए APAAR कार्ड एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके लिए पहले जमीनी स्तर पर तकनीकी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। यदि ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट, तकनीकी सहायता और जागरूकता की कमी बनी रही, तो गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है।

अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूलों में विशेष सहायता केंद्र बनाए जाएं, जहां छात्रों और उनके परिवारों को APAAR कार्ड बनाने में मदद मिल सके। साथ ही तकनीकी त्रुटियों को जल्द ठीक कर प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो।
देवघर समेत पूरे झारखंड में अब यह मुद्दा धीरे-धीरे गंभीर होता जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में यह पहल भविष्य के लिए उपयोगी जरूर मानी जा रही है, लेकिन फिलहाल इसकी जमीनी चुनौतियां अभिभावकों और छात्रों दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार और शिक्षा विभाग समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं, तो आने वाले दिनों में हजारों बच्चों के एडमिशन और शैक्षणिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि तकनीक के साथ-साथ व्यवस्था को भी सरल और सुलभ बनाया जाए, ताकि हर बच्चे को शिक्षा का समान अवसर मिल सके।

