By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। देवघर पुलिस की साइबर थाना टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड और तीन प्रतिबंधित सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि ये अपराधी लंबे समय से ऑनलाइन ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे और खुद को विभिन्न कंपनियों एवं डिजिटल पेमेंट सेवाओं का अधिकारी बताकर लोगों को ठगते थे।

साइबर थाना, देवघर द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस उपाधीक्षक (साइबर अपराध) राजा कुमार मित्रा के नेतृत्व में विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को अपना निशाना बनाते थे। आरोपी खुद को फ्लिपकार्ट, अमेजन कस्टमर केयर प्रतिनिधि, एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी, गूगल पे और फोनपे कस्टमर केयर अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद वे उपभोक्ताओं को कैशबैक, गिफ्ट कार्ड, बैंक सहायता या योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनसे ओटीपी और बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी किसानों को किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर भी ठगी करते थे। इसके अलावा मोबाइल नंबरों और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था। आरोपी तकनीकी तरीके से लोगों को भ्रमित कर ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारी प्राप्त करते थे और फिर उनके खाते से पैसे उड़ा लेते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अतला उर्फ अतलाल उर्फ बड़ा (32 वर्ष), राहुल रवानी (26 वर्ष), अनिल मंडल (27 वर्ष), विकास कुमार दास (21 वर्ष) और बाबूलाल महतो (33 वर्ष) के रूप में हुई है। सभी आरोपी पथरड्डा थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इन आरोपियों के आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इनका नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ है।

पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों के पास से सात मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड और तीन प्रतिबंधित सिम कार्ड बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इन उपकरणों का उपयोग कई अन्य साइबर अपराधों में भी किया गया है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और कुल कितनी रकम की धोखाधड़ी की गई।

देवघर पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। पहले जहां केवल बैंक अधिकारी बनकर कॉल किए जाते थे, वहीं अब आरोपी ई-कॉमर्स कंपनियों, डिजिटल पेमेंट ऐप और सरकारी योजनाओं का नाम लेकर लोगों को फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें और किसी के साथ ओटीपी, बैंक खाता नंबर, एटीएम पिन या पासवर्ड साझा न करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार लोगों की जल्दबाजी और जागरूकता की कमी है। कई लोग कैशबैक, इनाम या योजना का लाभ पाने के लालच में अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की शिकायत तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करने की अपील की है।

छापेमारी दल में साइबर थाना प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक नागेंद्र कुमार मंडल, एसडीपीओ हाली लुगुन, पथरड्डा ओपी पुलिस और साइबर थाना की टीम के अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जिले में साइबर अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

देवघर में साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद आम लोगों ने राहत की सांस ली है। लगातार बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों के बीच पुलिस की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी कर सकती है।

