By: Mala Mandal
देवघर। देवघर स्थित ए एस कॉलेज देवघर में चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड पाठ्यक्रम एवं विज्ञान संकाय हटाए जाने के विरोध में सोमवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विभाग, रांची द्वारा जारी नए संकल्प के विरोध में बड़ी संख्या में छात्रों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन भी किया। छात्रों ने इस फैसले को शिक्षा विरोधी बताते हुए सरकार से तत्काल निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि सरकार का यह निर्णय न केवल ए एस कॉलेज के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि इससे देवघर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित होगी। छात्रों ने कहा कि कॉलेज में वर्षों से बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, इसके बावजूद पाठ्यक्रमों को हटाने का निर्णय समझ से परे है।
छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि ए एस कॉलेज में संचालित चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड पाठ्यक्रम तथा विज्ञान संकाय को पूर्व की तरह बहाल रखा जाए। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

छात्र नेताओं ने बताया कि ए एस कॉलेज की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी और तब से यहां कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई नियमित रूप से संचालित होती रही है। कॉलेज लंबे समय से संताल परगना क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। यहां दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भी छात्र पढ़ाई करने आते हैं। ऐसे में विज्ञान संकाय को हटाना विद्यार्थियों के लिए बड़ा झटका साबित होगा।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि वर्ष 2004 में राज्य सरकार द्वारा कॉलेज में बीएड पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति दी गई थी। इसके बाद से कॉलेज में शिक्षक प्रशिक्षण की पढ़ाई भी सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज को ‘बी प्लस’ ग्रेड प्राप्त है और यहां आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय तथा अन्य शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद पाठ्यक्रम बंद करने का निर्णय पूरी तरह अनुचित है।

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक ओर नए कॉलेजों में बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड जैसे चार वर्षीय इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम शुरू कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों से इन पाठ्यक्रमों को हटाया जा रहा है। इससे छात्रों में भारी नाराजगी है। छात्रों का कहना है कि सरकार को नए संस्थानों के साथ-साथ पुराने कॉलेजों को भी मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत इंटीग्रेटेड बीएड पाठ्यक्रमों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में ए एस कॉलेज से इन पाठ्यक्रमों को समाप्त करना शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने जैसा कदम है। छात्रों ने मांग की कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखे और देवघर जैसे शैक्षणिक केंद्रों की उपेक्षा न करे।

कॉलेज परिसर में हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। “शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ” और “छात्र विरोधी फैसला वापस लो” जैसे नारों से परिसर गूंज उठा। छात्रों ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो वे सड़क से लेकर राज्य स्तर तक आंदोलन करेंगे।

वहीं कॉलेज प्रशासन ने छात्रों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को संबंधित विभाग तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। कॉलेज के कई शिक्षकों ने भी अनौपचारिक रूप से छात्रों की चिंता को जायज बताया। उनका कहना है कि किसी भी पाठ्यक्रम को बंद करने से पहले छात्रों और शिक्षकों की राय लेना जरूरी होना चाहिए।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देवघर जैसे उभरते शैक्षणिक केंद्र में विज्ञान और शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का बने रहना जरूरी है। इससे न केवल स्थानीय छात्रों को लाभ मिलता है बल्कि क्षेत्र में शिक्षा का स्तर भी बेहतर होता है। यदि ऐसे पाठ्यक्रम हटाए जाते हैं तो छात्रों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है और सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनके भविष्य से जुड़े इस फैसले को वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

