By: Mala Mandal
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए जांच प्रक्रिया की निगरानी करने का फैसला किया है। कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ इस तरह खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों को राहत की उम्मीद जगी है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के लाखों छात्र मेहनत और उम्मीद के साथ परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके सपनों को तोड़ देती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
NTA की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि NEET-UG 2026 परीक्षा से पहले कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर परीक्षा से पहले कथित प्रश्नपत्र वायरल होने के आरोप लगाए गए। कई छात्रों और कोचिंग संस्थानों ने भी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।

इन आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने NTA से जवाब मांगा और पूछा कि आखिर इतनी बड़ी परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में लगातार गड़बड़ियां सामने आती हैं तो छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि केवल जांच शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल
NEET-UG परीक्षा देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए आयोजित की जाती है। हर साल करीब 25 लाख से ज्यादा छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं सीधे तौर पर छात्रों के करियर और मानसिक स्थिति को प्रभावित करती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “युवाओं को इस तरह निराश नहीं किया जा सकता।” अदालत की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है।

जांच एजेंसियों को दिए जा सकते हैं बड़े निर्देश
सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट आने वाली सुनवाई में जांच एजेंसियों को और सख्त निर्देश दे सकता है। अदालत यह भी जानना चाहती है कि पेपर लीक का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें कौन लोग शामिल हैं।
जांच एजेंसियां अब डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया चैट की जांच कर रही हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है। माना जा रहा है कि पेपर लीक रैकेट में संगठित गिरोह शामिल हो सकते हैं जो छात्रों से मोटी रकम लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराते हैं।

छात्रों और अभिभावकों में बढ़ा गुस्सा
देश के कई हिस्सों में छात्रों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन भी किए। छात्रों का कहना है कि वे महीनों और वर्षों तक कठिन तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं।
अभिभावकों ने मांग की है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाया जाए। साथ ही दोषियों को कड़ी सजा देने की भी मांग उठ रही है ताकि भविष्य में किसी छात्र का भविष्य खतरे में न पड़े।

शिक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं देश की परीक्षा प्रणाली पर बड़ा सवाल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर समय रहते सख्त सुधार नहीं किए गए तो छात्रों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाई जाए, साइबर सुरक्षा मजबूत की जाए और प्रश्नपत्र वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह एन्क्रिप्टेड बनाया जाए। इसके अलावा परीक्षा से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
केंद्र सरकार पर भी बढ़ा दबाव
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर भी दबाव बढ़ गया है। सरकार पहले ही परीक्षा प्रणाली में सुधार के संकेत दे चुकी है। अब उम्मीद की जा रही है कि NEET समेत अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए नई सुरक्षा नीति लागू की जा सकती है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। विपक्ष ने कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब पूरे देश की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। छात्रों को उम्मीद है कि अदालत की निगरानी में जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
अगर जांच में बड़े खुलासे होते हैं तो परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सुप्रीम Court के इस कदम को छात्रों के हित में बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

