By: Mala Mandal
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा उनसे हमेशा प्यार करे, उनका सम्मान करे और बुढ़ापे में उनका सहारा बने। लेकिन कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो धीरे-धीरे बच्चों के दिल में दूरी पैदा कर देती हैं। शुरुआत में ये बातें छोटी लगती हैं, लेकिन समय के साथ यही आदतें रिश्तों को कमजोर बना देती हैं।

आजकल कई बच्चे बड़े होकर अपने माता-पिता से भावनात्मक रूप से दूर हो जाते हैं। कुछ बच्चे खुलकर बात करना बंद कर देते हैं तो कुछ माता-पिता से मिलने तक से बचने लगते हैं। इसके पीछे अक्सर बचपन की वही बातें होती हैं, जिन्हें पेरेंट्स ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। अगर आप चाहते हैं कि आपके और आपके बच्चे के बीच हमेशा प्यार और अपनापन बना रहे, तो समय रहते इन 5 आदतों को बदलना बेहद जरूरी है।
बच्चों की बात न मानने पर ईगो दिखाना
कई माता-पिता बच्चों की हर बात को अपनी इज्जत और अधिकार से जोड़ लेते हैं। अगर बच्चा किसी बात पर अपनी राय रख दे या उनकी बात तुरंत न माने, तो उन्हें लगता है कि बच्चा बदतमीज हो गया है। इसके बाद वे गुस्से में बच्चे को डांटना या सजा देना शुरू कर देते हैं। लेकिन बार-बार अपनी बात मनवाने की कोशिश बच्चों के मन पर गहरा असर डालती है। बच्चे धीरे-धीरे डरने लगते हैं और अपने मन की बातें बताना बंद कर देते हैं। यही डर आगे चलकर रिश्तों में दूरी की वजह बन जाता है।

हर छोटी बात पर डांटना और मारना
आज के समय में जेंटल पेरेंटिंग को काफी महत्व दिया जा रहा है, जहां बच्चों को प्यार और समझदारी से सही-गलत सिखाया जाता है। इसके बावजूद कई घरों में अब भी बच्चों को छोटी-छोटी बातों पर डांटना, अपमानित करना या मारना सामान्य माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार डांट और मार बच्चों के आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। ऐसे बच्चे अपने माता-पिता से भावनात्मक रूप से दूर होने लगते हैं और उनके मन में डर बैठ जाता है। कई बार यही दूरी बड़े होने के बाद रिश्तों को पूरी तरह कमजोर कर देती है।

बच्चों की फीलिंग्स को नजरअंदाज करना
कुछ माता-पिता को लगता है कि बच्चों की परेशानियां छोटी होती हैं और उन्हें ज्यादा महत्व देने की जरूरत नहीं है। जब बच्चा उदास होता है या किसी बात से दुखी होता है, तब उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन बच्चों के लिए उनकी भावनाएं बहुत मायने रखती हैं। अगर उन्हें बार-बार महसूस हो कि कोई उनकी बात नहीं सुनता, तो वे अपने मन की बातें शेयर करना बंद कर देते हैं। इससे माता-पिता और बच्चों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ने लगती है।

बच्चों को समय न देना
आज की व्यस्त जिंदगी में कई माता-पिता काम और मोबाइल में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना मुश्किल हो जाता है। बच्चे सिर्फ थोड़ी बातचीत, प्यार और ध्यान चाहते हैं, लेकिन जब उन्हें यह नहीं मिलता तो वे खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं।
धीरे-धीरे बच्चे अपने माता-पिता से कम जुड़ाव महसूस करने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि हर दिन कुछ समय बच्चों के साथ जरूर बिताएं और उनकी बातें ध्यान से सुनें।

दूसरों से तुलना करना
“देखो शर्मा जी का बेटा कितना अच्छा पढ़ता है”, “तुम हमेशा पीछे क्यों रहते हो” जैसी बातें बच्चों के आत्मविश्वास को तोड़ देती हैं। लगातार तुलना सुनने वाले बच्चे खुद को कमजोर समझने लगते हैं।
इससे उनके मन में माता-पिता के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है। हर बच्चा अलग होता है और उसकी अपनी खूबियां होती हैं। इसलिए तुलना करने की बजाय बच्चों को प्रोत्साहित करना ज्यादा जरूरी है।

कैसे बनाएं बच्चों के साथ मजबूत रिश्ता
अगर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा जीवनभर उनसे जुड़ा रहे, तो उन्हें बच्चों को प्यार, सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा देनी होगी। बच्चों की बातों को ध्यान से सुनें, उनकी भावनाओं को समझें और गुस्से की बजाय प्यार से समझाने की कोशिश करें।
बच्चों के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाने वाले माता-पिता के साथ उनका जुड़ाव उम्र बढ़ने के बाद भी मजबूत बना रहता है। इसलिए समय रहते अपनी आदतों को सुधारना जरूरी है, ताकि भविष्य में रिश्तों में दूरी न आए।
यह लेख सामान्य जानकारी और पेरेंटिंग से जुड़े सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर आधारित है। किसी भी गंभीर मानसिक या पारिवारिक समस्या की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

