By: Mala Mandal
PM Modi Flags Off India’s First Hydrogen Train: भारत ने हरित परिवहन की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस परियोजना को भारतीय रेलवे की पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत तक दो घंटे से अधिक समय में अपना सफर पूरा करेगी। यात्रा के दौरान ट्रेन कुल 14 स्टेशनों पर रुकेगी, जिससे स्थानीय यात्रियों को भी बेहतर और सस्ती रेल सेवा का लाभ मिलेगा। रेलवे ने इस ट्रेन का किराया आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए केवल 5 रुपये से 25 रुपये तक रखा है।

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे बिजली का उत्पादन होता है और ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य रहता है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय रेलवे को धीरे-धीरे ग्रीन एनर्जी आधारित परिवहन प्रणाली में बदलना है। इससे प्रदूषण कम होगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब केवल नई तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों का नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन ऊर्जा आने वाले समय की सबसे महत्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा है और भारतीय रेलवे इसका सफल उपयोग करके दुनिया के सामने नई मिसाल पेश कर रहा है।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम, डिजिटल सूचना प्रणाली, आरामदायक सीटें, बेहतर वेंटिलेशन और ऊर्जा दक्ष तकनीक जैसी कई सुविधाएं इसमें उपलब्ध कराई गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे डीजल की खपत में कमी आएगी और रेलवे का संचालन अधिक टिकाऊ एवं किफायती बनेगा।

हरियाणा के लोगों के लिए यह ट्रेन विशेष महत्व रखती है क्योंकि इससे जींद, गोहाना और सोनीपत सहित कई क्षेत्रों के यात्रियों को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का विकल्प मिलेगा। कम किराया होने के कारण छात्र, कर्मचारी और दैनिक यात्री भी इसका अधिक लाभ उठा सकेंगे।
भारतीय रेलवे पहले ही विद्युतीकरण, वंदे भारत ट्रेनों, अमृत भारत स्टेशन योजना और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। अब हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान में एक नया अध्याय जोड़ती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रोजन ईंधन भविष्य की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बन सकता है। दुनिया के कई विकसित देश इस तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं और भारत का इस दिशा में कदम बढ़ाना वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, यदि हाइड्रोजन ट्रेनों का नेटवर्क आगे बढ़ता है तो इससे प्रदूषण में कमी, ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन लागत में बचत और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई गति मिलेगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि हरित विकास, आधुनिक तकनीक और टिकाऊ परिवहन की दिशा में देश की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारतीय रेलवे के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकती है।

