By: Mala Mandal
देवघर: जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत देवघर पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर थाना एवं स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन और सात सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सभी की संलिप्तता विभिन्न प्रकार की साइबर ठगी में पाई गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि जिले और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय कुछ साइबर अपराधी खुद को विभिन्न कंपनियों और डिजिटल भुगतान सेवाओं के ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित कर छापेमारी अभियान चलाया, जिसके दौरान तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को ई-कॉमर्स कंपनियों, डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म और बैंकिंग सेवाओं के कस्टमर केयर अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करते थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, आसान ऋण उपलब्ध कराने और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर भी लोगों को झांसे में लेकर आर्थिक ठगी की जा रही थी। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया है।

कैसे करते थे ठगी
पुलिस की जांच के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया, इंटरनेट सर्च और मोबाइल नंबरों के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाते थे। इसके बाद वे स्वयं को Google Pay, PhonePe, Paytm या अन्य डिजिटल भुगतान सेवाओं का अधिकारी बताकर उपभोक्ताओं को कॉल करते थे। बातचीत के दौरान वे कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट, खाते की समस्या समाधान या तकनीकी सहायता देने का लालच देते थे। ठगी की एक प्रमुख विधि में उपभोक्ताओं को PhonePe Gift Card बनाने के लिए कहा जाता था। इसके बाद उन्हें कार्ड को रिडीम करने की प्रक्रिया बताकर राशि अपने नियंत्रण वाले खातों में ट्रांसफर करवा ली जाती थी। कई मामलों में उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके खाते में कैशबैक या बोनस राशि भेजी जा रही है, जबकि वास्तव में उनके खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।

इसके अलावा आरोपी खुद को Airtel Payment Bank का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। वे उपभोक्ताओं को यह कहते थे कि उनका बैंक कार्ड या सेवा बंद होने वाली है। फिर समस्या के समाधान और सेवा को दोबारा चालू करने के नाम पर मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से गोपनीय जानकारी प्राप्त कर आर्थिक ठगी को अंजाम देते थे।
सरकारी योजनाओं के नाम पर भी जाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर भी लोगों को झांसे में लेते थे। इसके लिए वे फर्जी मोबाइल नंबरों और नकली पहचान का उपयोग करते थे। लाभार्थियों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उन्हें योजना का लाभ या विशेष ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बदले उनसे बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या अन्य आवश्यक विवरण मांगे जाते थे, जिनका दुरुपयोग कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता था।

छापेमारी में मिले अहम सबूत
पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन और सात सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों का नेटवर्क कितना बड़ा था और उन्होंने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। जांच एजेंसियां मोबाइल फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, बैंकिंग लेन-देन और डिजिटल भुगतान से जुड़े अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस की अपील
देवघर पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि कोई भी बैंक, डिजिटल भुगतान कंपनी या सरकारी संस्था फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी नंबर अथवा बैंक खाते की गोपनीय जानकारी नहीं मांगती है। यदि कोई व्यक्ति खुद को कस्टमर केयर अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें।

पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, मोबाइल स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड न करें और लालच या डर के आधार पर किसी भी वित्तीय लेन-देन से बचें। साइबर अपराध से संबंधित शिकायतें राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराई जा सकती हैं।
देवघर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रखा जा सके।

