By: Vikash kumar (Vicky)
रांची/देवघर, 17 जुलाई। झारखंड में किन्नर (ट्रांसजेंडर) समाज के अधिकारों और सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए किन्नर अखाड़ा झारखंड की प्रदेश अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी (रोज मौसी) ने महामहिम राज्यपाल को एक विस्तृत आवेदन सौंपा है। आवेदन में किन्नर समाज को सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने, उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने, अलग जेंडर पहचान सुनिश्चित करने तथा राजनीतिक नेतृत्व में भागीदारी का अधिकार देने की मांग की गई है।

महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने अपने आवेदन में कहा कि वे पिछले कई वर्षों से किन्नर समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। उनका उद्देश्य समाज के उन लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है, जो लंबे समय से मुख्यधारा से दूर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ने के बावजूद आज भी बड़ी संख्या में किन्नर सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।

उन्होंने राज्यपाल को अवगत कराया कि किन्नर समाज के अनेक सदस्यों के पास आवश्यक दस्तावेज, पहचान पत्र या योजनाओं की जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इससे उनका जीवन स्तर प्रभावित होता है और वे आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े रह जाते हैं।

आवेदन में विशेष रूप से मांग की गई है कि राज्य सरकार संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि किन्नर समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि आवास योजना, आयुष्मान भारत, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वरोजगार योजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किन्नर समाज तक प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए।

महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने यह भी कहा कि यदि राज्य स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान और सहायता शिविर आयोजित किए जाएं तो बड़ी संख्या में किन्नर समाज के लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे और सरकारी योजनाओं से जुड़ सकेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि जिला स्तर पर विशेष शिविर लगाकर दस्तावेज निर्माण, पहचान पत्र, स्वास्थ्य कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाओं की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।

आवेदन में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा किन्नर समाज की जेंडर पहचान को लेकर उठाया गया है। उन्होंने कहा कि आज भी कई सरकारी प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं में किन्नर समाज को स्पष्ट और सम्मानजनक जेंडर पहचान नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें विभिन्न स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि किन्नर समाज को उनकी पहचान के अनुरूप सम्मानजनक जेंडर मान्यता दिलाने की दिशा में आवश्यक पहल की जाए।

इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में भी किन्नर समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई। आवेदन में कहा गया है कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को नेतृत्व करने और जनप्रतिनिधि बनने का समान अधिकार मिलना चाहिए। इसलिए किन्नर समाज को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे समाज और राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने अपने आवेदन में विश्वास व्यक्त किया कि झारखंड के राज्यपाल के नेतृत्व में किन्नर समाज के कल्याण, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए सकारात्मक एवं प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस पहल करती है तो हजारों किन्नर सम्मानजनक जीवन जीने के साथ आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे।

उन्होंने कहा कि समाज के विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब प्रत्येक वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिले। किन्नर समाज भी देश और राज्य का अभिन्न हिस्सा है तथा उन्हें भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का वही अधिकार मिलना चाहिए जो अन्य नागरिकों को प्राप्त है।
किन्नर अखाड़ा की ओर से उम्मीद जताई गई है कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस आवेदन पर गंभीरता से विचार करेंगे तथा किन्नर समाज के हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल करेंगे।

महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने अंत में कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो यह केवल किन्नर समाज के लिए ही नहीं बल्कि सामाजिक समानता, समावेशिता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि पूरा किन्नर समाज राज्यपाल के निर्णय की आशा और विश्वास के साथ प्रतीक्षा कर रहा है।

