By: Mala Mandal
देवघर। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर गुरुवार को देवघर शहर पूरी तरह भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर नजर आया। शिक्षा सभा चौक स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पारंपरिक एवं भव्य रथयात्रा श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के बीच निकाली गई। रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे नगर में जयघोष, भजन-कीर्तन तथा ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी। शहर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

रथयात्रा से पूर्व गुरुवार की सुबह भगवान जगन्नाथ का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत दुग्धाभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की षोडशोपचार विधि से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। मंदिर परिसर में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना के बाद मंदिर का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया।

सुबह पांच बजे से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी। देर दोपहर तक हजारों भक्तों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगल की कामना की। श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रिय प्रसाद के रूप में कटहल का कोआं भी अर्पित किया। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और जयघोष का माहौल बना रहा।

शाम होते ही शिक्षा सभा चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गईं। साध्वी कल्याणी मानस सुधा की अगुवाई में वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को पूरे विधि-विधान के साथ रथ पर विराजमान कराया गया। वैदिक मंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान की आरती की गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया।

शाम लगभग चार बजे रथयात्रा शिक्षा सभा चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ हुई। रथ नगर भ्रमण करते हुए मंदिर के पूर्वी द्वार, बड़ा बाजार, आजाद चौक, टावर चौक, लक्ष्मीपुर चौक होते हुए बिलासी स्थित जनकपुरी पहुंचा। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े रहे। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों ने फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने आरती उतारी और प्रसाद का वितरण किया।

रथयात्रा के दौरान ढोल, नगाड़े और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच भक्त लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे। “जय जगन्नाथ”, “सियाराम-सियाराम” और “हरि बोल” के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु नाचते-गाते हुए रथ के साथ आगे बढ़ते रहे। पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

परंपरा के अनुसार नगर भ्रमण के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को बिलासी स्थित जनकपुरी ले जाया गया, जहां वे निर्धारित अवधि तक विश्राम करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर जनकपुरी में विश्राम करने आते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचकर भगवान के दर्शन करेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। निर्धारित तिथि पर भगवान की वापसी यात्रा भी पूरे विधि-विधान के साथ निकाली जाएगी।

रथयात्रा को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से भी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग में सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक प्रबंध किए गए थे, जिससे यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। स्वयंसेवक भी पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की सहायता करते नजर आए।

देवघर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक भी मानी जाती है। हर वर्ष इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस वर्ष भी रथयात्रा ने शहर के धार्मिक वातावरण को और अधिक उत्साहपूर्ण बना दिया।

शिक्षा सभा चौक से लेकर जनकपुरी तक पूरा मार्ग भक्तों की आस्था, भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। भगवान जगन्नाथ की इस पावन यात्रा ने देवघरवासियों के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं को भी आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर प्रदान किया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन और रथ की रस्सी खींचने मात्र से जीवन में सुख-समृद्धि, मंगल और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी आस्था के कारण हर वर्ष यह रथयात्रा देवघर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

