By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव उस समय दर्ज हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लगातार प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस उपलब्धि को भारतीय लोकतंत्र और समकालीन राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2019 में भारतीय जनता पार्टी को दोबारा स्पष्ट बहुमत मिला और मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने के साथ उन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला। लगातार तीन कार्यकाल तक देश का नेतृत्व करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी की लोकप्रियता और चुनावी सफलता ने उन्हें भारतीय राजनीति का सबसे प्रभावशाली नेता बना दिया है। पिछले एक दशक से अधिक समय में भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है और कई राज्यों में भी अपनी राजनीतिक उपस्थिति का विस्तार किया है। इसका बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक रणनीति को दिया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के दौरान कई बड़े फैसले लिए गए। इनमें जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, तीन तलाक कानून, जीएसटी लागू करना, डिजिटल इंडिया अभियान, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत अभियान और विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं प्रमुख हैं। सरकार का दावा है कि इन कदमों ने देश के विकास को नई दिशा दी है और भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाया है।
मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया। देशभर में एक्सप्रेसवे, रेलवे नेटवर्क, मेट्रो परियोजनाओं, एयरपोर्ट विस्तार और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े निवेश किए गए। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से आर्थिक विकास को गति मिली है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

विदेश नीति के मोर्चे पर भी प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल चर्चा में रहा है। उन्होंने अमेरिका, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई प्रमुख देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया। जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी मोदी सरकार की उपलब्धियों में गिना जाता है।
हालांकि विपक्ष मोदी सरकार की नीतियों को लेकर लगातार सवाल भी उठाता रहा है। बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और सामाजिक मुद्दों को लेकर विपक्ष ने कई बार केंद्र सरकार को घेरा है। विपक्षी दलों का कहना है कि विकास के दावों के साथ-साथ सरकार को इन चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान करना चाहिए। इसके बावजूद चुनावी नतीजों में भाजपा और मोदी की लोकप्रियता लगातार बनी रही है।

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने 1947 से 1964 तक प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। नेहरू का कार्यकाल भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण, औद्योगिक विकास और विदेश नीति की बुनियाद तैयार करने के लिए याद किया जाता है। ऐसे में मोदी का उनके रिकॉर्ड से आगे निकलना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय राजनीति में बदलते दौर का प्रतीक भी माना जा रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय मतदाताओं ने लगातार तीन चुनावों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी नेता का लंबे समय तक जनता का समर्थन बनाए रखना आसान नहीं होता। ऐसे में मोदी का 12 वर्ष का कार्यकाल भारतीय राजनीति के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
भाजपा इस अवसर को अपनी राजनीतिक सफलता और सुशासन मॉडल की स्वीकार्यता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र में सत्ता के केंद्रीकरण और वैचारिक राजनीति के विस्तार के रूप में देखता है।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार 12 वर्ष तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहना भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी राजनीतिक घटना है। यह उपलब्धि जहां उनके नेतृत्व की लोकप्रियता को दर्शाती है, वहीं यह भी बताती है कि देश की राजनीति में पिछले एक दशक में बड़े बदलाव आए हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी सरकार अपने चौथे कार्यकाल की दिशा में किस प्रकार आगे बढ़ती है और देश के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान किस तरह करती है।

