By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से देवघर पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई के क्रम में सारठ थाना क्षेत्र के डकाय जंगल में छापेमारी कर चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 34 साइबर अपराध मामलों से इनके संबंध होने की जानकारी सामने आई है।

देवघर पुलिस अधीक्षक ने प्रेस वार्ता के दौरान इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जिले में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर सारठ थाना क्षेत्र स्थित डकाय जंगल में छापेमारी की गई, जहां कुछ लोग बैठकर साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान कमरुद्दीन अंसारी, अब्दुल करीम अंसारी, समीर अंसारी एवं वसीम अंसारी के रूप में हुई है। इनमें तीन आरोपी सारठ थाना क्षेत्र के कपसा गांव के निवासी हैं, जबकि एक आरोपी पालोजोरी थाना क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस ने उनके पास से सात मोबाइल फोन, छह सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।
तकनीकी जांच में सामने आए 34 मामलों के लिंक
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जब्त किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच कराई गई। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि इन उपकरणों का उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज कुल 34 साइबर अपराध मामलों में किया गया है। इन मामलों का रिकॉर्ड राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल एवं विभिन्न राज्यों की पुलिस के पास दर्ज है। पुलिस अब इन सभी मामलों की विस्तृत जांच कर रही है। इसके साथ ही संबंधित राज्यों की पुलिस से भी संपर्क स्थापित किया जा रहा है ताकि आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा सके और साइबर अपराध के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई अन्य साइबर अपराधियों और गिरोहों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

फर्जी PhonePe और Google Pay प्रतिनिधि बनकर करते थे ठगी
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार साइबर अपराधी लोगों को झांसे में लेने के लिए खुद को PhonePe और Google Pay जैसी डिजिटल भुगतान सेवाओं का प्रतिनिधि बताते थे। वे आम लोगों को फोन कर विभिन्न तकनीकी समस्याओं या केवाईसी अपडेट का बहाना बनाकर उनकी निजी जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद वे लोगों को एक विशेष लिंक या फाइल भेजते थे और उसे डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते थे। कई मामलों में लोग उनकी बातों में आकर अपनी बैंकिंग और मोबाइल संबंधी जानकारी साझा कर देते थे, जिसके बाद साइबर अपराधी उनके खातों से पैसे निकाल लेते थे।

APK फाइल के जरिए मोबाइल का पूरा एक्सेस लेते थे
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरफ्तार आरोपी लोगों के मोबाइल फोन पर APK फाइल भेजते थे। यह फाइल इंस्टॉल होने के बाद पीड़ित के मोबाइल का रिमोट एक्सेस अपराधियों के पास पहुंच जाता था। इसके माध्यम से वे मोबाइल में मौजूद बैंकिंग एप्लिकेशन, ओटीपी, मैसेज और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। साइबर अपराधी इस तकनीक का उपयोग कर लोगों के बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे। कई बार पीड़ितों को तब तक ठगी की जानकारी नहीं मिलती थी, जब तक उनके खाते से राशि नहीं निकल जाती थी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल या लिंक को डाउनलोड न करें।

ऑनलाइन ऐप के अधिकारी बनकर भी करते थे ठगी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अपराधी विभिन्न ऑनलाइन ऐप और वित्तीय संस्थानों के अधिकारी बनकर भी लोगों से संपर्क करते थे। वे लोन, कैशबैक, इनाम, निवेश योजना या अन्य आकर्षक ऑफर का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद वे बैंकिंग विवरण, ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल कर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। यही कारण है कि लोगों को अधिक सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है।

देवघर पुलिस का साइबर अपराध के खिलाफ अभियान जारी
देवघर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ जिले में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जंगलों, सुनसान इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपकर साइबर ठगी करने वाले अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का लक्ष्य जिले को साइबर अपराध मुक्त बनाना है।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक, ऐप या बैंकिंग संबंधी जानकारी मांगने वाले व्यक्ति पर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर दें।

देवघर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद कई अन्य मामलों का भी खुलासा होगा और साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क तक पहुंच बनाई जा सकेगी। जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।

