By: Vikash Kumar

Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा और निर्जल व्रत रखने से वर्षभर की सभी एकादशी का पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 की निर्जला एकादशी कई विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण और भी खास मानी जा रही है। इस बार एक ओर जहां भद्रा काल का प्रभाव रहेगा, वहीं दूसरी ओर शिव योग, सिद्ध योग, रवि योग सहित चार शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जो इस दिन के धार्मिक महत्व को और बढ़ा देते हैं। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी 2026 की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, भद्रा काल, पारण का समय और इस व्रत का धार्मिक महत्व।

निर्जला एकादशी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 की रात्रि से प्रारंभ होकर 25 जून 2026 की रात्रि तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
भद्रा का रहेगा प्रभाव, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं
इस बार निर्जला एकादशी पर भद्रा का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि भगवान विष्णु की पूजा, जप, तप, व्रत और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य भक्ति और श्रद्धा के साथ किए जा सकते हैं। पूजा करते समय स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का पालन करना अधिक उचित माना जाता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे 4 शुभ योग
इस वर्ष निर्जला एकादशी पर कई दुर्लभ शुभ योगों का संयोग बन रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शिव योग, सिद्ध योग, रवि योग और अन्य शुभ ग्रह संयोग शामिल हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन योगों में भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप, व्रत और दान करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त हो सकता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
निर्जला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। अभिजीत मुहूर्त भी पूजा और विशेष अनुष्ठान के लिए शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत, फल और प्रसाद अर्पित करें तथा विष्णु सहस्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।

निर्जला एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि जो लोग वर्षभर सभी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते, वे यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करें तो उन्हें सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यह व्रत आत्मसंयम, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन क्या करें?
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।
तुलसी दल अर्पित करें और विष्णु मंत्रों का जाप करें।
जरूरतमंद लोगों को जल, घड़ा, छाता, वस्त्र, फल और अन्न का दान करें।
दिनभर सात्विक विचार रखें और भगवान का स्मरण करें।

व्रत पारण कब करें?
निर्जला एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में पारण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार निर्धारित समय के भीतर ही पारण करना शुभ माना जाता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग पंचांगों और स्थानों के अनुसार तिथि, मुहूर्त तथा भद्रा काल के समय में अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत से संबंधित अंतिम निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करें।

