By: Mala Mandal
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस पूरे महीने में सोमवार व्रत, मंगला गौरी व्रत, शिव पूजा और प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। इनमें प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

साल 2026 में सावन माह का पहला प्रदोष व्रत बेहद शुभ संयोग में पड़ रहा है। ऐसे में शिव भक्त इस दिन की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि जानने के लिए उत्सुक हैं। यदि आप भी सावन प्रदोष व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो यहां जानिए इससे जुड़ी पूरी जानकारी।
सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। वर्ष 2026 में सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026, सोमवार के दिन पड़ेगा। सोमवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जिसका महत्व अन्य प्रदोष व्रतों की तुलना में और भी अधिक माना जाता है।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – 10 अगस्त 2026 प्रातः (पंचांगानुसार)
त्रयोदशी तिथि समाप्त – 11 अगस्त 2026 प्रातः (पंचांगानुसार)
प्रदोष काल – सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट की अवधि
नोट: विभिन्न शहरों के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय अवश्य जांच लें।

सावन के सोम प्रदोष व्रत का महत्व
सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा शिवलिंग का अभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यह व्रत विशेष रूप से वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए शुभ माना जाता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
व्रत का संकल्प लें और दिनभर सात्विक आचरण का पालन करें।
प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर में शिवलिंग की स्थापना कर पूजा करें।
भगवान शिव का जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित करें।
‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या शिव पुराण का पाठ करें।
पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें तथा प्रसाद वितरित करें।

प्रदोष व्रत में क्या करें?
भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराएं।
जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र का दान दें।
शिव मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करें।
क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
पूजा के बाद परिवार के साथ भगवान शिव का स्मरण करें।

क्या न करें?
तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें।
किसी का अपमान या विवाद न करें।
व्रत के दिन नकारात्मक सोच से बचें।
पूजा के समय जल्दबाजी न करें।

सावन प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में भी राहत मिलने की मान्यता है। साथ ही यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का भी माध्यम माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों के पंचांग के अनुसार तिथि और मुहूर्त में अंतर हो सकता है। किसी विशेष पूजा या धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य विद्वान से परामर्श अवश्य करें।


