By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर अपराधियों के विरुद्ध लगातार की जा रही कार्रवाई के क्रम में सारवां थाना क्षेत्र से चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी में उनकी संलिप्तता सामने आई है।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सारवां थाना क्षेत्र में कुछ लोग फर्जी तरीके से विभिन्न कंपनियों और डिजिटल भुगतान सेवाओं के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर आम लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया और त्वरित कार्रवाई करते हुए चार संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को Google Pay, PhonePe, Paytm, Flipkart, Amazon Pay तथा Airtel Payment Bank के कस्टमर केयर प्रतिनिधि या अधिकारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। आरोपी ग्राहकों को कैशबैक, तकनीकी सहायता या खाते से जुड़ी समस्याओं के समाधान का झांसा देकर उनकी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल करने का प्रयास करते थे।
पुलिस के अनुसार ठगी का एक प्रमुख तरीका यह था कि आरोपी उपभोक्ताओं को कैशबैक मिलने का लालच देते थे। इसके बाद वे उन्हें कुछ निर्देशों का पालन करने के लिए कहते थे, जिससे पीड़ितों के बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट से पैसे निकाल लिए जाते थे। इसके अलावा आरोपी फर्जी एप्लीकेशन फाइल भेजकर भी लोगों को निशाना बनाते थे।

जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, बिजली बिल भुगतान और आरटीओ चालान जैसे नामों से APK फाइल भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल करता था, अपराधियों को उसके मोबाइल डिवाइस तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद वे बैंकिंग ऐप्स और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का दुरुपयोग कर आर्थिक ठगी को अंजाम देते थे।

साइबर अपराधियों द्वारा अपनाया जा रहा एक अन्य तरीका Airtel Payment Bank से जुड़ा हुआ था। आरोपी खुद को बैंक अधिकारी बताकर उपभोक्ताओं को फोन करते थे और दावा करते थे कि उनका बैंकिंग कार्ड या खाता बंद हो गया है। इसके बाद वे कार्ड को पुनः चालू कराने या तकनीकी सहायता देने के नाम पर लोगों से गोपनीय जानकारी प्राप्त कर लेते थे। इसी जानकारी का उपयोग कर वे बैंक खातों से अवैध लेन-देन करते थे।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई मोबाइल नंबर और आईएमईआई नंबरों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि गिरफ्तार आरोपी किसी बड़े साइबर ठगी नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक आरोपी पूर्व में भी साइबर अपराध से जुड़े मामले में जेल जा चुका है। इस तथ्य के सामने आने के बाद पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनके नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इनके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा किन-किन राज्यों में इन्होंने अपनी गतिविधियों को अंजाम दिया।

देवघर पुलिस ने आम नागरिकों से साइबर अपराधियों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड न करें। किसी भी बैंक, डिजिटल भुगतान सेवा या कस्टमर केयर अधिकारी को ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन अथवा बैंकिंग जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति कैशबैक, लॉटरी, इनाम या खाता बंद होने जैसी बात कहकर जानकारी मांगता है तो तुरंत उसकी सत्यता की जांच करें।

पुलिस ने लोगों से यह भी कहा है कि साइबर ठगी की किसी भी घटना की जानकारी तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें या नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करें। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ठगी गई राशि को वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।
देवघर पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से जागरूक रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है।
(नोट: कानूनी और पत्रकारिता मानकों के तहत आरोप सिद्ध होने तक गिरफ्तार व्यक्तियों को आरोपी माना जाता है। इसलिए समाचार में आरोपियों के नाम प्रकाशित नहीं किए गए हैं।)

