By:Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने NEET दोबारा परीक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले को परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह मामला उस समय सामने आया जब केंद्र सरकार ने NEET दोबारा परीक्षा के दौरान पेपर लीक, अफवाहों और परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के अवैध प्रसार को रोकने के उद्देश्य से टेलीग्राम पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया था। सरकार का कहना था कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जी प्रश्नपत्रों के प्रसार में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से टेलीग्राम चैनलों का व्यापक इस्तेमाल देखा गया है।

सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत यह अस्थायी कार्रवाई की थी। इस प्रावधान के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या अन्य महत्वपूर्ण कारणों से किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या डिजिटल सामग्री तक पहुंच को सीमित किया जा सकता है।

सरकार के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि टेलीग्राम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल संचार के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उनका कहना था कि लाखों छात्र, शिक्षक, कोचिंग संस्थान और पेशेवर लोग टेलीग्राम का उपयोग पढ़ाई, नोट्स साझा करने और शैक्षणिक संवाद के लिए करते हैं। ऐसे में पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने के बजाय केवल संदिग्ध चैनलों और समूहों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार को व्यापक प्रतिबंध लगाने के बजाय तकनीकी और लक्षित उपाय अपनाने चाहिए थे ताकि आम उपयोगकर्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि पूरी तरह अस्थायी और परिस्थितियों को देखते हुए लगाया गया है। सरकार ने कहा कि दोबारा परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की डिजिटल गतिविधि, जिससे परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है, उसे रोकना आवश्यक था।

सरकार ने यह भी दलील दी कि हाल के समय में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में टेलीग्राम के माध्यम से फर्जी प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी और भ्रामक सूचनाएं तेजी से प्रसारित की गई थीं। ऐसे में परीक्षा के दौरान सीमित अवधि के लिए एहतियाती कदम उठाना सार्वजनिक हित में है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम अस्थायी प्रकृति का है और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखना है। अदालत ने यह भी माना कि परीक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में सरकार को आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है, बशर्ते वे कानून के अनुरूप हों।

हालांकि अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की डिजिटल पाबंदी हमेशा परिस्थितियों के अनुरूप, सीमित अवधि की और उचित कारणों पर आधारित होनी चाहिए। न्यायालय ने संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि सार्वजनिक हित और नागरिकों के अधिकारों के बीच उचित सामंजस्य बना रहे।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, लेकिन साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले लाखों वैध उपयोगकर्ताओं के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तकनीकी निगरानी, संदिग्ध चैनलों की पहचान और लक्षित कार्रवाई जैसे उपाय अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।
वहीं कुछ साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक की समस्या केवल किसी एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा, परीक्षा प्रणाली में सुधार, एन्क्रिप्टेड डेटा प्रबंधन और जिम्मेदार डिजिटल निगरानी की आवश्यकता है।

NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और संबंधित एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, डिजिटल अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही कारण है कि इस मामले में अदालत के फैसले को दोनों पक्षों के बीच संतुलन स्थापित करने वाले निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध प्रभावी रहेगा। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि दोबारा परीक्षा शांतिपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होती है या नहीं। साथ ही भविष्य में सरकार परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करती है, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।
