By: Mala Mandal
Nirjala Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, लेकिन सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे अधिक पुण्यदायी और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु का व्रत और पूजा करने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का पावन व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। यदि आप भी इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना चाहते हैं, तो पूजा से पहले आवश्यक सामग्री की पूरी सूची तैयार कर लें, ताकि पूजा के समय किसी भी चीज की कमी न रहे।

निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में भीमसेन सभी एकादशी व्रत रखने में असमर्थ थे। तब महर्षि व्यास ने उन्हें केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। कहा जाता है कि इस एक व्रत के प्रभाव से सभी एकादशी व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, गीता का अध्ययन, दान-पुण्य और जरूरतमंदों को जल, अन्न तथा वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

निर्जला एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट
यदि आप घर पर विधि-विधान से पूजा करना चाहते हैं, तो पहले से यह पूजा सामग्री अवश्य खरीद लें।
– भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर
– पूजा की चौकी
– पीला या लाल स्वच्छ वस्त्र
– गंगाजल
– कलश
– आम या अशोक के पत्ते
– नारियल
– मौली (कलावा)
– चंदन
– रोली और हल्दी
– अक्षत (साबुत चावल)

– पंचामृत
– तुलसी दल
– पीले फूलों की माला
– ताजे फूल
– धूप और अगरबत्ती
– घी का दीपक
– रुई की बाती
– कपूर
– सुपारी
– लौंग
– इलायची
– पान के पत्ते
– मौसमी फल

– मिठाई
– गुड़
– मिश्री
– केले
– पंचमेवा
– भोग के लिए खीर या अन्य सात्विक प्रसाद
– दक्षिणा
– दान के लिए जल से भरा घड़ा, छाता, वस्त्र, फल या अनाज

पूजा की सरल विधि
निर्जला एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाकर चंदन, अक्षत, फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में आरती करें और अपनी मनोकामना की प्रार्थना करें।

निर्जला एकादशी पर क्या करें?
इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान करें। जरूरतमंद लोगों को जल, छाता, फल, वस्त्र, पंखा, घड़ा या अन्न का दान करें। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दान-पुण्य करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
निर्जला एकादशी का व्रत काफी कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें जल का भी त्याग किया जाता है। यदि आपकी आयु अधिक है, आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्रत रखें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक की सलाह लें। श्रद्धा और क्षमता के अनुसार व्रत करना ही सर्वोत्तम माना गया है।

निर्जला एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यदि आप इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करना चाहते हैं, तो पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें और पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आराधना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया व्रत, जप, तप और दान विशेष पुण्य प्रदान करता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार पूजा-विधि एवं सामग्री में अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने परिवार के गुरु, पुरोहित या विद्वान से परामर्श अवश्य करें।

