By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब अगले साल से NEET-UG परीक्षा पारंपरिक पेन-पेपर मोड की बजाय कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की सहमति मिलने के बाद इस फैसले को अंतिम रूप दिया गया है।

यह निर्णय पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद लिया गया है। सरकार और NTA का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली अपनाने से पारदर्शिता बढ़ेगी, सुरक्षा मजबूत होगी और परीक्षा प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।
पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा बदलाव
NEET-UG 2026 परीक्षा के दौरान कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर देशभर में भारी विवाद हुआ था। कई राज्यों में अभ्यर्थियों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई थी, जिसके बाद परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठी। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने का निर्णय लिया। विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों और मंत्रालयों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद CBT मोड को लागू करने पर सहमति बनी।

क्या है कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT)?
कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट एक ऐसी परीक्षा प्रणाली है जिसमें अभ्यर्थी कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रश्नों को पढ़कर उत्तर देते हैं। इसमें प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका की आवश्यकता नहीं होती। परीक्षा पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित होती है। CBT मोड में प्रश्नों का वितरण, उत्तरों का रिकॉर्ड और मूल्यांकन अधिक सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। इससे प्रश्न पत्र लीक होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।

छात्रों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार कंप्यूटर आधारित परीक्षा से कई लाभ होंगे। सबसे बड़ा फायदा परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता में वृद्धि है। इसके अलावा परिणाम प्रक्रिया भी तेज हो सकती है। CBT प्रणाली में उत्तरों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, जिससे मूल्यांकन में त्रुटियों की संभावना कम होती है। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

NTA करेगी व्यापक तैयारी
NEET-UG देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है, जिसमें हर वर्ष लाखों छात्र भाग लेते हैं। ऐसे में CBT मोड लागू करना NTA के लिए बड़ी चुनौती भी होगी। एजेंसी को देशभर में पर्याप्त कंप्यूटर लैब, तकनीकी संसाधन और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था करनी होगी। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी अभ्यर्थियों को समान सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

छात्रों के लिए मॉक टेस्ट की योजना
जानकारी के अनुसार NTA छात्रों को नई परीक्षा प्रणाली से परिचित कराने के लिए मॉक टेस्ट और डेमो परीक्षा आयोजित कर सकती है। इससे अभ्यर्थियों को परीक्षा के डिजिटल प्रारूप को समझने और अभ्यास करने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन छात्रों ने पहले कभी कंप्यूटर आधारित परीक्षा नहीं दी है, उनके लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण और अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण होगा।

मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में आएगा बड़ा बदलाव
NEET-UG के माध्यम से देशभर के मेडिकल, डेंटल और अन्य स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली में यह बदलाव मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।सरकार का उद्देश्य परीक्षा की विश्वसनीयता बढ़ाना, अनियमितताओं को रोकना और योग्य छात्रों को निष्पक्ष अवसर प्रदान करना है।

अभ्यर्थियों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अभी से कंप्यूटर आधारित परीक्षा की तैयारी शुरू करें। ऑनलाइन मॉक टेस्ट, डिजिटल प्रश्नपत्र और कंप्यूटर पर अभ्यास करने से नई प्रणाली के अनुरूप तैयारी बेहतर हो सकेगी। इसके अलावा उम्मीदवारों को NTA की आधिकारिक घोषणाओं और दिशा-निर्देशों पर लगातार नजर रखनी चाहिए ताकि परीक्षा से जुड़ी किसी भी नई जानकारी से वे अपडेट रह सकें।

NEET-UG को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में आयोजित करने का फैसला भारतीय परीक्षा प्रणाली में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। पेपर लीक विवाद के बाद पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए उठाया गया यह कदम भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं को अधिक विश्वसनीय और तकनीक-संचालित बना सकता है। अब सभी की नजर NTA की तैयारियों और नई परीक्षा व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन पर टिकी हुई है।

