By: Mala Mandal
कराकास/वेनेजुएला। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला बुधवार को उस समय दहल उठा जब कुछ ही सेकंड के अंतराल पर आए 7.1 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। राजधानी कराकास समेत कई शहरों में इमारतें ढह गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और हजारों लोग मलबे में फंस गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इस आपदा को अत्यंत गंभीर बताते हुए चेतावनी दी है कि मृतकों की संख्या 10 हजार से अधिक हो सकती है और नुकसान का दायरा बेहद व्यापक हो सकता है।

भूकंप का पहला झटका 7.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र कराकास से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित मोरोन क्षेत्र के पास दर्ज किया गया। इसके लगभग एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया। लगातार आए इन दो झटकों ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया और कई बहुमंजिला इमारतें क्षण भर में धराशायी हो गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भूकंप इतना शक्तिशाली था कि लोगों को लगा मानो पूरी धरती फट रही हो। कराकास के कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। कई स्थानों पर बिजली और इंटरनेट सेवाएं भी बाधित हो गईं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

राजधानी कराकास के चाकाओ और अल्तामीरा जैसे इलाकों में कई इमारतों के गिरने की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बड़ी-बड़ी इमारतों को झुकते और ढहते देखा जा सकता है। सड़कों पर मलबे के ढेर लग गए हैं और कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। आपदा के बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

USGS ने प्रारंभिक आकलन में कहा है कि इस आपदा में 10 हजार से लेकर 1 लाख तक लोगों की जान जाने की आशंका है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या जारी नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों का कहना है कि नुकसान बहुत बड़ा है और वास्तविक आंकड़े आने में समय लग सकता है।

भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिए गए हैं। पुलिस, सेना, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हुई हैं। कई अस्पतालों में आपातकाल जैसी स्थिति घोषित कर अतिरिक्त डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाया गया है। घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी भारी दबाव पड़ रहा है।

भूकंप के कारण देश के प्रमुख हवाई अड्डों और परिवहन नेटवर्क को भी नुकसान पहुंचा है। कई सड़कों में दरारें आ गई हैं और कुछ पुलों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला कैरेबियाई और दक्षिण अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर स्थित है, जिसके कारण यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसी वजह से यहां समय-समय पर बड़े भूकंप आते रहे हैं। हालांकि हाल के वर्षों में इतनी तीव्रता के लगातार दो झटके बेहद दुर्लभ माने जा रहे हैं।

भूकंप के बाद सुनामी की आशंका को देखते हुए कैरेबियाई क्षेत्र के कुछ हिस्सों के लिए अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन बाद में खतरा कम होने पर इसे वापस ले लिया गया। इसके बावजूद तटीय इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है और लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस त्रासदी पर चिंता व्यक्त की है। विभिन्न देशों और मानवीय सहायता संगठनों ने वेनेजुएला को हर संभव मदद देने की पेशकश की है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संस्थाएं हालात पर नजर बनाए हुए हैं और राहत सामग्री भेजने की तैयारी कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित क्षेत्रों को सामान्य स्थिति में लौटने में कई महीने लग सकते हैं।

फिलहाल पूरे वेनेजुएला की नजरें राहत और बचाव कार्यों पर टिकी हैं। हजारों परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों, राहत शिविरों और दुर्घटनास्थलों के चक्कर लगा रहे हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, वैसे-वैसे नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आ रही है। आशंका है कि आने वाले दिनों में मृतकों और घायलों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है।

