By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर जिले के लिए यह एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। जिले में उत्पादित प्रसिद्ध आम्रपाली आम अब अपनी मिठास और गुणवत्ता के दम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहा है। पहली बार देवघर से 1 टन (1000 किलोग्राम) आम्रपाली आम की खेप संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) भेजी गई है, जहां यह प्रतिष्ठित लुलु रिटेल स्टोर के काउंटरों पर बिक्री के लिए उपलब्ध हो चुकी है। इस उपलब्धि ने न केवल देवघर बल्कि पूरे झारखंड की कृषि क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि पहली बार देवघर जिले के स्थानीय किसानों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला कृषकों द्वारा उत्पादित किसी फल को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिला है। इससे जिले के किसानों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे खुलने की उम्मीद बढ़ गई है।
महिला किसानों की मेहनत रंग लाई
इस निर्यात की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मोहनपुर आजीविका महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) से जुड़ी महिला किसानों की अहम भूमिका रही है। इन महिला किसानों ने आधुनिक तकनीकों और बेहतर कृषि पद्धतियों का उपयोग करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले आम्रपाली आम का उत्पादन किया। कृषि विशेषज्ञों की निगरानी में तैयार किए गए इन आमों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की गई। इसके बाद निर्यात के लिए विशेष पैकेजिंग की गई ताकि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान आमों की ताजगी, स्वाद और गुणवत्ता बनी रहे।

APEDA के सहयोग से मिला वैश्विक बाजार
देवघर के आम्रपाली आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में एपीडा (APEDA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एपीडा के सहयोग से निर्यात की पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए गुणवत्ता परीक्षण, पैकिंग, कोल्ड चेन और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया गया। इसके बाद आमों की पहली खेप दुबई भेजी गई, जहां प्रतिष्ठित लुलु रिटेल स्टोर में इसे बिक्री के लिए रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता बनाए रखी गई तो भविष्य में देवघर के आमों की मांग खाड़ी देशों के अलावा यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बढ़ सकती है।

देवघर के किसानों के लिए खुलेंगे नए अवसर
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ जिले के किसानों को मिलेगा। अब तक किसान अपने उत्पाद स्थानीय मंडियों या घरेलू बाजार तक ही बेच पाते थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने से उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा। निर्यात बढ़ने से जिले में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

उपायुक्त ने दी बधाई
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल आम के निर्यात की सफलता नहीं है, बल्कि देवघर के किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस पहल से स्थानीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध होंगे। प्रशासन की कोशिश है कि आने वाले समय में जिले के अन्य कृषि उत्पादों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए।

आम्रपाली आम की बढ़ रही मांग
आम्रपाली आम अपनी विशेष मिठास, आकर्षक रंग, गूदेदार बनावट और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय माना जाता है। इसकी गुणवत्ता और स्वाद के कारण खाड़ी देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि देवघर के किसान इसी गुणवत्ता के साथ उत्पादन जारी रखते हैं तो भविष्य में यहां का आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

महिला सशक्तिकरण का बना उदाहरण
यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है। महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़ी महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि उन्हें उचित प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकती हैं। इस सफलता से जिले की अन्य महिला किसान भी आधुनिक खेती और एफपीओ मॉडल से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगी।

भविष्य की संभावनाएं
देवघर प्रशासन और कृषि विभाग अब अन्य फलों एवं कृषि उत्पादों को भी निर्यात योग्य बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। यदि यह प्रयास सफल रहा तो आने वाले वर्षों में देवघर की पहचान केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कृषि निर्यात के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण जिले के रूप में स्थापित होगी। आम्रपाली आम की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप ने यह साबित कर दिया है कि बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और सही विपणन रणनीति के माध्यम से ग्रामीण किसानों के उत्पाद भी वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

देवघर से दुबई भेजी गई 1 टन आम्रपाली आम की पहली खेप केवल एक निर्यात नहीं, बल्कि जिले के किसानों, विशेषकर महिला कृषकों की मेहनत, आत्मविश्वास और बदलती कृषि व्यवस्था का प्रतीक है। यह उपलब्धि आने वाले समय में झारखंड के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। प्रशासन, एपीडा और महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी के संयुक्त प्रयासों ने यह दिखा दिया है कि यदि गुणवत्ता और बाजार का सही समन्वय हो तो स्थानीय उत्पाद भी दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंच सकते हैं।

