By: Mala Mandal
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से पिछले एक वर्ष के दौरान 100 से अधिक वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के इस्तीफा देने का मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने सेवा नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में से एक ISRO से लगातार हो रहे इस्तीफों ने सरकार और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसे देखते हुए सरकार ने संगठन के संवेदनशील वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए नई शर्तें लागू करने का फैसला किया है, ताकि प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों का पलायन रोका जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों की गोपनीयता बनी रहे।

जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल में 100 से अधिक वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने विभिन्न कारणों से ISRO की नौकरी छोड़ी है। इनमें कुछ वैज्ञानिक निजी अंतरिक्ष कंपनियों, स्टार्टअप्स और विदेशों के शोध संस्थानों से जुड़े, जबकि कुछ ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया। लगातार बढ़ते इस्तीफों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान से अनुभवी वैज्ञानिक क्यों बाहर जा रहे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने ISRO के सेवा नियमों में बदलाव करते हुए कुछ अहम प्रावधानों को और सख्त किया है। नए नियमों के तहत संगठन छोड़ने वाले वैज्ञानिकों के लिए नोटिस अवधि, संवेदनशील परियोजनाओं से जुड़ी गोपनीय जानकारी की सुरक्षा और निजी कंपनियों में तत्काल नियुक्ति जैसे मामलों पर अधिक निगरानी रखी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्याधुनिक तकनीक और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी किसी भी प्रकार से गलत हाथों में न पहुंचे।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। निजी कंपनियां वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बेहतर वेतन, आधुनिक सुविधाएं और शोध के अधिक अवसर उपलब्ध करा रही हैं। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों का निजी क्षेत्र की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि भारत जैसे देश में ISRO केवल एक वैज्ञानिक संस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और अंतरिक्ष अनुसंधान का प्रमुख आधार भी है। इसलिए यहां कार्यरत विशेषज्ञों का अनुभव देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

ISRO ने पिछले कुछ वर्षों में चंद्रयान-3, आदित्य-L1 और स्पैडेक्स जैसे कई महत्वपूर्ण मिशनों में सफलता हासिल की है। इसके अलावा गगनयान मिशन, नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल, उन्नत संचार उपग्रह और पृथ्वी अवलोकन मिशनों पर भी तेजी से काम चल रहा है। ऐसे समय में अनुभवी वैज्ञानिकों का संगठन छोड़ना कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की गति और विशेषज्ञता को प्रभावित कर सकता है।

सरकार का मानना है कि नए सेवा नियम वैज्ञानिकों के हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में उठाया गया कदम हैं। अधिकारियों के अनुसार, उद्देश्य किसी की स्वतंत्रता सीमित करना नहीं, बल्कि संवेदनशील तकनीक और रणनीतिक जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही वैज्ञानिकों को बेहतर कार्य वातावरण और करियर विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

अंतरिक्ष क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि केवल नियम सख्त करना ही पर्याप्त नहीं होगा। यदि सरकार ISRO के वैज्ञानिकों के वेतन, अनुसंधान सुविधाओं, पदोन्नति प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध अवसरों में सुधार करती है, तो प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को लंबे समय तक संगठन से जोड़े रखना अधिक आसान होगा। इससे निजी क्षेत्र की ओर होने वाले पलायन में भी कमी आ सकती है।

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आज वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। कम लागत में सफल मिशनों के कारण ISRO की विश्वभर में सराहना होती रही है। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों का संगठन में बने रहना भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों की सफलता के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

आने वाले वर्षों में भारत चंद्रमा, मंगल और मानव अंतरिक्ष मिशनों समेत कई बड़े कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। ऐसे में वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता, अनुभव और तकनीकी क्षमता देश की सबसे बड़ी ताकत है। सरकार द्वारा सेवा नियमों को सख्त करने के साथ-साथ वैज्ञानिकों के लिए बेहतर कार्य वातावरण और आकर्षक करियर अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान दिया जाए तो ISRO भविष्य में भी दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसियों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगा।


