By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों को नोटिस जारी करते हुए बुधवार तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट की इस पहल के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी सेहत लगातार गिरने की खबरें सामने आ रही हैं। चिकित्सकों की ओर से भी स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई है। इसी बीच उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से भूख हड़ताल पर है और उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है तो संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि उसकी सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करे। इसी आधार पर अदालत ने दोनों सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया।

याचिका में यह भी कहा गया कि सोनम वांगचुक की चिकित्सा निगरानी लगातार होनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। अदालत ने इस पहलू पर भी सरकारों से स्पष्ट जानकारी मांगी है कि अब तक उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।
सोनम वांगचुक देश के जाने-माने इंजीनियर, नवाचार विशेषज्ञ और शिक्षा सुधारक माने जाते हैं। उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी क्षेत्रों के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई है। उनकी गतिविधियों को देशभर में बड़ी संख्या में लोग समर्थन देते हैं। ऐसे में उनकी भूख हड़ताल और बिगड़ती सेहत को लेकर लोगों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। कई संगठनों ने सरकार से अपील की है कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए और सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी ली जाए। वहीं कुछ नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कई दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने से शरीर में गंभीर कमजोरी, रक्तचाप में गिरावट, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, किडनी और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए ऐसी स्थिति में नियमित मेडिकल जांच और डॉक्टरों की निगरानी बेहद आवश्यक होती है।
दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से जारी नोटिस के बाद अब केंद्र और दिल्ली सरकार का जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और आगे स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्या योजना है। बुधवार को होने वाली अगली सुनवाई में दोनों सरकारों की ओर से विस्तृत जवाब पेश किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं। सोशल मीडिया पर भी सोनम वांगचुक के समर्थन में कई अभियान चल रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं और सरकार से सकारात्मक पहल की मांग कर रहे हैं।
हालांकि अभी तक इस मामले में अदालत ने कोई अंतिम टिप्पणी या आदेश जारी नहीं किया है। फिलहाल केवल नोटिस जारी कर दोनों सरकारों से जवाब मांगा गया है। अदालत में पेश किए जाने वाले जवाब और अगली सुनवाई के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया सबसे प्रभावी रास्ता होती है। यदि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच सकारात्मक बातचीत होती है तो समाधान निकलने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं अदालत भी नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व देती है।

अब सभी की नजर बुधवार को होने वाली सुनवाई पर है, जहां केंद्र और दिल्ली सरकार अपना पक्ष रखेंगी। इसके बाद हाई कोर्ट मामले की परिस्थितियों और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।

इस बीच सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। समर्थकों की मांग है कि उनकी स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से कराई जाए और किसी भी प्रकार की चिकित्सा सुविधा में कोई कमी न रहने दी जाए। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

