By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। देवघर में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (भाजयुमो) की जिला इकाई ने JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजयुमो जिलाध्यक्ष आशीष दुबे और परीक्षा अभ्यर्थी रितेश कुमार ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

भाजयुमो नेताओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ी होती हैं। ऐसे में परीक्षा आयोजन से लेकर परिणाम जारी होने तक किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या पारदर्शिता की कमी सामने आती है, तो इसका सीधा असर मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं अपने भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद में प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवाल उनकी मेहनत और विश्वास दोनों को प्रभावित करते हैं।

परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
भाजयुमो जिलाध्यक्ष आशीष दुबे ने कहा कि राज्य सरकार को प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी परीक्षा की प्रक्रिया में अनियमितता या लापरवाही की शिकायत सामने आती है तो सरकार को मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। आशीष दुबे ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भाजयुमो की ओर से पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की भी मांग की गई है। उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच एजेंसी के माध्यम से जांच होने से अभ्यर्थियों के बीच विश्वास कायम हो सकता है और मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।

परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी पर भी सवाल
परीक्षा अभ्यर्थी रितेश कुमार ने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की निगरानी, परीक्षा संचालन और अन्य प्रक्रियाओं में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। रितेश कुमार ने कहा कि यदि जांच के दौरान परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी की लापरवाही या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि दोषी पाए जाने वाली एजेंसी को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इसके लिए वे समय और आर्थिक संसाधन दोनों खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की खामी से उनका पूरा प्रयास प्रभावित हो सकता है। इसलिए सरकार को अभ्यर्थियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल
भाजयुमो नेताओं ने कहा कि JPSC और JSSC जैसी परीक्षाएं झारखंड के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में जाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन परीक्षाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा अपने करियर और भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठने वाला कोई भी सवाल केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाए। अभ्यर्थियों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन बिना किसी भेदभाव और अनियमितता के किया जाएगा।

शिकायतों का जल्द समाधान करने की मांग
भाजयुमो की जिला इकाई ने सरकार से मांग की कि परीक्षा से संबंधित अभ्यर्थियों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए। शिकायतों की जांच के लिए स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया बनाई जाए तथा जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे। भाजयुमो नेताओं ने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, परीक्षा एजेंसी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था को भी प्रभावी बनाया जाना चाहिए। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

युवाओं के हित से समझौता नहीं
भाजयुमो जिलाध्यक्ष आशीष दुबे ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को अभ्यर्थियों की चिंता को गंभीरता से लेते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
भाजयुमो नेताओं ने दोहराया कि JPSC और JSSC परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच के साथ सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच के बाद यदि किसी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल भाजयुमो की मांगों के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और संबंधित परीक्षा एजेंसियां अभ्यर्थियों की शिकायतों पर क्या कदम उठाती हैं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का किस तरह समाधान किया जाता है।


