By: Mala Mandal
देवघर। साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के आदेशानुसार साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर थाना पुलिस ने फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड से साइबर ठगी से संबंधित साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, साइबर थाना प्रभारी कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में यह कार्रवाई 21 सितंबर 2026 को की गई। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जिले में कुछ संदिग्ध साइबर अपराधी फर्जी तरीके से अलग-अलग कंपनियों और डिजिटल पेमेंट सेवाओं के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया।

फर्जी कस्टमर केयर बनकर बनाते थे निशाना
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी करने वाले आरोपी खुद को Google Pay, PhonePe, Airtel Payment Bank, Flipkart और Amazon जैसी कंपनियों के कस्टमर केयर प्रतिनिधि के रूप में पेश करते थे। इसके बाद वे मोबाइल फोन पर कॉल कर उपभोक्ताओं को अलग-अलग तरह के झांसे देते थे। कभी खाते या पेमेंट सेवा से संबंधित समस्या बताई जाती थी तो कभी ग्राहक को किसी सुविधा, कैशबैक या भुगतान संबंधी परेशानी के समाधान का भरोसा दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, इसी बहाने आरोपियों द्वारा लोगों से संवेदनशील जानकारी हासिल कर ऑनलाइन ठगी की जाती थी।

साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीकों की जांच के दौरान पुलिस को ठगी के कई पैटर्न की जानकारी मिली है। साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी आम तौर पर खुद को किसी बैंक, डिजिटल पेमेंट कंपनी या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का कर्मचारी बताकर लोगों का भरोसा जीतने का प्रयास करते हैं। इसके बाद मोबाइल में किसी ऐप, लिंक या फाइल के माध्यम से जानकारी हासिल करने अथवा भुगतान कराने की कोशिश की जाती है।

पीएम किसान, बिजली बिल और आरटीओ चालान के नाम पर भी ठगी
प्रेस नोट के अनुसार, गिरफ्तार साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को PM KISAN YOJNA, बिजली बिल और RTO चालान जैसे मामलों के नाम पर भी निशाना बनाया जाता था। आरोपियों द्वारा APK फाइल का एक्सेस लेकर उसे मोबाइल में इंस्टॉल कराने का प्रयास किया जाता था। पुलिस के अनुसार, इस तरह के फर्जी APK के माध्यम से साइबर अपराधी मोबाइल तक पहुंच हासिल कर ठगी को अंजाम देने की कोशिश करते थे। इसके अलावा, पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को Airtel Payment Bank का पदाधिकारी बताकर भी उपभोक्ताओं से संपर्क करते थे। Airtel Thanks App के माध्यम से Airtel Payment Bank कार्ड बंद होने की जानकारी देकर लोगों को डराया जाता था। इसके बाद कार्ड को दोबारा चालू कराने या सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर झांसा देकर ठगी करने की बात सामने आई है।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में सहदात अंसारी, उम्र करीब 21 वर्ष, निवासी पोसेहदात अंसारी; गुलफराज अंसारी, उम्र करीब 30 वर्ष; तथा सरफराज अंसारी, उम्र करीब 21 वर्ष, तीनों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के प्रेस नोट के मुताबिक तीनों आरोपी सोनारायठाढ़ी थाना क्षेत्र से संबंधित बताए गए हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद किए हैं। जब्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड की प्रारंभिक जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच के माध्यम से साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों और संभावित नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच जारी
देवघर पुलिस साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी जांच के जरिए अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा साइबर ठगी से संबंधित गतिविधियों का नेटवर्क कितना विस्तृत है। पुलिस की ओर से लोगों से लगातार अपील की जा रही है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP, UPI PIN, ATM या डेबिट कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। किसी भी कस्टमर केयर नंबर को इंटरनेट पर खोजकर इस्तेमाल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

APK फाइल और अनजान लिंक से रहें सावधान
साइबर अपराध के मामलों में APK फाइल के जरिए मोबाइल तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। इसी तरह किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, स्क्रीन शेयर करने या किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर रिमोट एक्सेस देने से भी बचना चाहिए।

देवघर पुलिस ने साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। पुलिस के अनुसार, समय पर शिकायत मिलने से बैंकिंग लेनदेन को रोकने और ठगी की रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी पुलिस को देने की भी अपील की गई है।
देवघर पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस टीम बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की तकनीकी जांच के साथ गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर साइबर ठगी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

