By: Mala Mandal
रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ ही TDPL के जरिए आयोजित सभी परीक्षाओं और उनसे जुड़ी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का ऐलान किया। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों में खुशी की लहर देखने को मिली और छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी जीत बताया।

छात्रों की मांगों के बीच सरकार का बड़ा फैसला
झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थी सवाल उठा रहे थे। छात्रों का आरोप था कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। इन आरोपों के बीच अभ्यर्थियों ने आंदोलन तेज किया और सरकार से विवादित परीक्षाओं को रद्द करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। लगातार बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को छात्रों की प्रमुख मांगों पर बड़ा फैसला लिया। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को भी खत्म करने की घोषणा की है।

TDPL की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। सरकार ने TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया है। इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो इन परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि, इस फैसले के बाद दोबारा भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी, इसको लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश और आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार रहेगा। अभ्यर्थियों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि रद्द की गई परीक्षाओं का नया आयोजन कब और किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

2014 से हुई परीक्षाओं की जांच का ऐलान
सरकार ने केवल मौजूदा विवादित परीक्षाओं तक मामला सीमित नहीं रखा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2014 से राज्य में हुई प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की बात भी कही है। इसके लिए जांच प्रक्रिया शुरू करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात सामने आई है।इस फैसले को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से उनका भविष्य प्रभावित होता है।

प्रदर्शनकारी छात्रों में जश्न
सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी का माहौल दिखाई दिया। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। कई छात्रों ने कहा कि लंबे समय से वे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों की कुछ मांगें अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक छात्र पूरे मामले में CBI जांच की मांग पर भी कायम हैं। इसलिए सरकार के फैसले के बावजूद आंदोलन पूरी तरह समाप्त होगा या आगे जारी रहेगा, यह छात्रों के अगले रुख पर निर्भर करेगा।

JPSC और JSSC भर्ती व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
झारखंड में पिछले कुछ समय से JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जाए। इस आंदोलन के दौरान छात्रों ने परीक्षा रद्द करने, कथित अनियमितताओं की जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई। सरकार की ओर से भी परीक्षा प्रणाली में सुधार और बेहतर SOP लागू करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि यदि निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP का सही तरीके से पालन किया जाता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

छात्रों के भविष्य से जुड़ा है पूरा मामला
प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर अभ्यर्थियों पर पड़ता है। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवा लंबे समय तक पढ़ाई, कोचिंग और परीक्षा की तैयारी में समय और पैसा लगाते हैं। यदि परीक्षा रद्द होती है या उसकी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं तो अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी करनी पड़ती है। झारखंड में TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती एक विश्वसनीय और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था तैयार करने की होगी। छात्रों का भरोसा वापस हासिल करना भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

सरकार के फैसले के बाद आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं का नया आयोजन कब होगा और नई परीक्षा प्रक्रिया किस एजेंसी या व्यवस्था के तहत कराई जाएगी। साथ ही जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर भी अभ्यर्थियों और आम लोगों की नजर रहेगी।
झारखंड सरकार के इस फैसले को फिलहाल छात्र आंदोलन के दबाव के बीच एक बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। एक तरफ सरकार ने विवादित परीक्षाओं को रद्द कर छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक को स्वीकार किया है, वहीं दूसरी तरफ जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का रास्ता भी खोला है।

कुल मिलाकर, JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला झारखंड के प्रतियोगी परीक्षा आंदोलन में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब छात्रों की नजर जांच की निष्पक्षता, नई परीक्षा प्रक्रिया और भविष्य में होने वाली भर्तियों की पारदर्शिता पर रहेगी।
झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार के इस फैसले से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। लेकिन छात्रों की ओर से उठाई जा रही सभी मांगों का समाधान और भर्ती प्रक्रिया में स्थायी सुधार अभी आगे की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

