By: Mala Mandal
देवघर में प्रस्तावित बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को लेकर चल रहे जमीन और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की ओर से दाखिल दो विशेष अनुमति याचिकाओं यानी SLP को खारिज करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के 15 जुलाई 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट की ओर से मेडिकल कॉलेज की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है।

मामला देवघर स्थित उस संपत्ति से जुड़ा है, जिस पर बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट की ओर से मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना है। संपत्ति को लेकर म्यूटेशन और Essentiality Certificate यानी आवश्यक प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पर विवाद चल रहा था। झारखंड हाईकोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को राज्य सरकार और संबंधित पक्षों की अपीलों पर फैसला सुनाते हुए बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट से जुड़े म्यूटेशन मामले में राहत बरकरार रखी थी। राज्य सरकार ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने झारखंड सरकार की ओर से दाखिल दोनों SLP पर सुनवाई की। अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया और दोनों विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज कर दिया। संबंधित SLP की संख्या 34211-34212/2026 बताई गई है। इस फैसले का सीधा असर यह है कि 15 जुलाई 2026 को झारखंड हाईकोर्ट की ओर से दिए गए निर्देश प्रभावी बने हुए हैं। हाईकोर्ट ने जमीन के म्यूटेशन से जुड़े राज्य सरकार और परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की अपीलों को खारिज कर दिया था। अदालत ने यह भी माना था कि सार्वजनिक नीलामी के बाद बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट के पक्ष में जारी बिक्री प्रमाणपत्र को लेकर विभिन्न मंचों पर उठाई गई चुनौतियों के बाद फिलहाल बिक्री ने अंतिमता हासिल कर ली है।

जमीन विवाद से शुरू हुआ था मामला
मामले की पृष्ठभूमि जमीन और बैंक ऋण से जुड़े विवाद से जुड़ी है। झारखंड हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने संबंधित जमीन को बैंक के पास ऋण के लिए गिरवी रखा था। ऋण भुगतान में चूक के बाद बैंक की ओर से वसूली की कार्रवाई शुरू हुई। कोर्ट के रिकॉर्ड में करीब 141 करोड़ रुपये की रिकवरी का उल्लेख है। संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी कई बार कराई गई, जिनमें शुरुआती नौ नीलामियां सफल नहीं हुईं। इसके बाद 20 दिसंबर 2023 को हुई दसवीं नीलामी में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट सफल बोलीदाता बना। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से जमीन के म्यूटेशन के लिए आवेदन किया गया। हालांकि देवघर के अंचल अधिकारी की ओर से म्यूटेशन आवेदन को खारिज कर दिया गया। इसी आदेश के खिलाफ ट्रस्ट ने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने ट्रस्ट के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार और परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की ओर से अपील दायर की गई।

हाईकोर्ट ने म्यूटेशन पर क्या कहा था?
15 जुलाई 2026 के अपने फैसले में झारखंड हाईकोर्ट ने म्यूटेशन से जुड़े राज्य सरकार और PMCH के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन मुख्य रूप से राजस्व वसूली से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया है और संबंधित राजस्व अधिकारी इस प्रक्रिया में स्वामित्व के अंतिम विवाद का न्यायिक फैसला नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी कहा कि जिस जमीन को पहले PMCH के नाम म्यूटेट किया गया था और जिसे बैंक ऋण के लिए गिरवी रखा गया था, उसकी सार्वजनिक नीलामी के बाद सफल खरीदार के म्यूटेशन को इस आधार पर रोका नहीं जा सकता कि बाद में अलग-अलग आपत्तियां उठाई जाएं।
Essentiality Certificate पर भी महत्वपूर्ण निर्देश
मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए केवल जमीन का म्यूटेशन पर्याप्त नहीं है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में Essentiality Certificate की प्रक्रिया का भी उल्लेख है। कोर्ट के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट ने 10 दिसंबर 2024 को Essentiality Certificate के लिए आवेदन किया था, लेकिन काफी समय तक उस पर निर्णय नहीं हुआ। राज्य सरकार की ओर से जमीन के टाइटल वेरिफिकेशन को लेकर आपत्ति जताई गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि Essentiality Certificate जारी करना महज औपचारिक या स्वचालित प्रक्रिया नहीं है। हालांकि आवेदन को अनिश्चित समय तक लंबित भी नहीं रखा जा सकता। इसलिए अदालत ने पहले के आदेश में संशोधन करते हुए देवघर के उपायुक्त को जमीन का सत्यापन चार सप्ताह के भीतर पूरा करने और उसके बाद सक्षम प्राधिकारी को Essentiality Certificate के आवेदन पर कानून के अनुसार तथा अपने गुण-दोष के आधार पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

यानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP खारिज होने के बाद मेडिकल कॉलेज से जुड़ी प्रक्रिया को हाईकोर्ट के तय निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि मेडिकल कॉलेज को सभी अंतिम मंजूरियां मिल चुकी हैं। मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी NMC से जुड़ी आवश्यक नियामकीय शर्तों को भी पूरा करना होगा।

निशिकांत दुबे ने बताया ‘न्याय की जीत’
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘न्याय की जीत’ बताया। उन्होंने दावा किया कि बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज को शुरू करने के रास्ते में राज्य सरकार की ओर से बाधाएं डाली जा रही थीं। यह सांसद की राजनीतिक प्रतिक्रिया है; अदालत के औपचारिक आदेश का दायरा जमीन के म्यूटेशन और Essentiality Certificate की प्रक्रिया से जुड़े कानूनी मुद्दों तक है।

देवघर के लिए क्यों अहम है मामला?
देवघर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी लगातार विस्तार की जरूरत महसूस करता रहा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की स्थापना से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं जुड़ी हैं। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव कॉलेज की स्थापना, आवश्यक अनुमतियों, नियामकीय मानकों और अस्पताल संचालन की आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट के लिए जमीन और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण कानूनी राहत के रूप में सामने आया है। झारखंड सरकार की SLP खारिज होने के बाद 15 जुलाई 2026 के हाईकोर्ट आदेश प्रभावी हैं और अब संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया को उसी दिशा-निर्देश के तहत आगे बढ़ाना होगा। आने वाले समय में जमीन सत्यापन, Essentiality Certificate और अन्य आवश्यक नियामकीय मंजूरियों पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि देवघर में प्रस्तावित बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज जमीन पर कब और किस स्वरूप में आगे बढ़ता है।

