By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
आज का पंचांग 27 अगस्त 2026: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखना विशेष महत्व रखता है। पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी प्राप्त होती है। आज 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो सुबह के समय समाप्त होकर पूर्णिमा तिथि में बदल जाएगी। सावन मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस पवित्र महीने में शिव पूजा, जलाभिषेक और धार्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है। चतुर्दशी तिथि के दौरान भगवान शिव की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से खास माना जा सकता है। आइए जानते हैं 27 अगस्त 2026 का पूरा पंचांग, चतुर्दशी तिथि कब तक रहेगी, पूजा के लिए कौन-सा समय शुभ है, अभिजीत मुहूर्त कब है और राहुकाल के दौरान किन कार्यों को करने से बचना चाहिए।

27 अगस्त 2026 का पंचांग
दिन: गुरुवार
तिथि: श्रावण शुक्ल चतुर्दशी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि
चतुर्दशी तिथि: 27 अगस्त की सुबह लगभग 9:09 बजे तक, इसके बाद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी। अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है।
पक्ष: शुक्ल पक्ष
मास: श्रावण
नक्षत्र: धनिष्ठा, इसके बाद शतभिषा
चंद्र राशि: मकर
सूर्य राशि: सिंह
आज का दिन: गुरुवार

सावन शुक्ल चतुर्दशी पर पूजा का शुभ समय
सावन शुक्ल चतुर्दशी के दिन भगवान शिव की पूजा करना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष फलदायी माना जाता है। आज चतुर्दशी तिथि सुबह ही समाप्त हो रही है, इसलिए जो लोग चतुर्दशी तिथि के दौरान विशेष पूजा करना चाहते हैं, वे सुबह के समय पूजा-अर्चना कर सकते हैं। चतुर्दशी के बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। दिन में अभिजीत मुहूर्त लगभग 11:57 बजे से 12:48 बजे तक बताया गया है। यह समय सामान्य शुभ कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि, पूजा के लिए तिथि और अपनी परंपरा के अनुसार समय देखना अधिक उचित रहेगा।

आज का राहुकाल कब रहेगा?
27 अगस्त 2026, गुरुवार को राहुकाल लगभग दोपहर 1:59 बजे से 3:35 बजे तक रहने की जानकारी मिलती है। राहुकाल को ज्योतिषीय परंपरा में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। इसलिए इस अवधि में कोई नया या महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और अन्य समय आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त के आधार पर कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं।

आज भगवान शिव की पूजा कैसे करें?
सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान पर दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें। भगवान शिव का जल से अभिषेक करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, फूल और फल अर्पित कर सकते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उसे साफ करके श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। पूजा के अंत में शिव आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

चतुर्दशी के बाद शुरू होगी पूर्णिमा तिथि
27 अगस्त को सुबह चतुर्दशी तिथि समाप्त होने के बाद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। यही वजह है कि आज के पंचांग में चतुर्दशी और पूर्णिमा दोनों का विशेष उल्लेख देखने को मिल रहा है। पूर्णिमा तिथि हिंदू धर्म में धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करने की परंपरा है।
आज का शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: लगभग 11:57 बजे से 12:48 बजे तक
राहुकाल: लगभग 1:59 बजे से 3:35 बजे तक
शुभ समय में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। हालांकि, किसी बड़े मांगलिक या व्यक्तिगत कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर रहेगा।

आज के दिन क्या करें?
आज सुबह स्नान करके भगवान शिव की पूजा करें।
शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बेलपत्र चढ़ाएं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव के अन्य मंत्रों का जाप करें।
जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
घर में सकारात्मक और शांत वातावरण बनाए रखें।
किसी भी शुभ कार्य से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त अवश्य देखें।

आज के दिन किन बातों का रखें ध्यान?
राहुकाल के दौरान नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचें।
बिना पूरी जानकारी के किसी बड़े आर्थिक निर्णय को लेने से बचना बेहतर होगा।
पूजा-पाठ के दौरान मन को शांत रखें और किसी के प्रति गलत भावना न रखें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत रखने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए।

27 अगस्त 2026 का धार्मिक महत्व
सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के अवसर पर शिव पूजा और मंत्र जाप करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
आज चतुर्दशी तिथि सुबह समाप्त होने के बाद पूर्णिमा शुरू हो रही है, इसलिए दिन का धार्मिक महत्व और भी खास हो जाता है। पंचांग के अनुसार तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय का मिलान करना उचित रहेगा।
27 अगस्त 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज सावन शुक्ल चतुर्दशी सुबह तक रहेगी और इसके बाद पूर्णिमा तिथि का आरंभ होगा। भगवान शिव की पूजा करने वाले श्रद्धालु सुबह चतुर्दशी तिथि के दौरान जलाभिषेक और पूजा कर सकते हैं। वहीं सामान्य शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त को ध्यान में रखा जा सकता है और राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
इस खबर में दी गई पंचांग और मुहूर्त संबंधी जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय गणना के कारण मुहूर्त के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। किसी विशेष पूजा, व्रत या मांगलिक कार्य के लिए अपने स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह लेना उचित है। यह जानकारी धार्मिक आस्था और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

