By: Vikash kumar (Vicky)

Viral Infection Cough: वायरल इंफेक्शन के दौरान बुखार, बदन दर्द, गले में खराश और थकान जैसी परेशानियां आमतौर पर कुछ दिनों में कम होने लगती हैं। लेकिन कई लोगों में एक समस्या ऐसी होती है जो बाकी लक्षणों के ठीक होने के बाद भी बनी रहती है और वह है खांसी। बुखार उतरने के बाद भी अगर लगातार खांसी आ रही है तो अक्सर लोग परेशान हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि संक्रमण अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है।
हालांकि हर बार ऐसा नहीं होता। वायरल इंफेक्शन के बाद कुछ समय तक खांसी रहना आम बात हो सकती है। दरअसल, संक्रमण के दौरान सांस की नली और गले की अंदरूनी परत में जलन और सूजन हो सकती है। संक्रमण खत्म होने के बाद भी यह संवेदनशीलता कुछ समय तक बनी रह सकती है, जिसकी वजह से धूल, ठंडी हवा, परफ्यूम, धुआं या बोलने जैसी छोटी चीजों से भी खांसी शुरू हो सकती है।

वायरल ठीक होने के बाद क्यों बनी रहती है खांसी?
वायरल इंफेक्शन के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ता है। इस दौरान श्वसन तंत्र में सूजन और जलन पैदा हो सकती है। जब वायरस खत्म हो जाता है और बुखार जैसे लक्षण चले जाते हैं, तब भी सांस की नली को पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।
इसी वजह से व्यक्ति को सूखी खांसी, गले में खराश या बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस हो सकती है। इसे कई बार पोस्ट-वायरल या पोस्ट-इंफेक्शस कफ कहा जाता है। इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि शरीर में अभी भी वही वायरल इंफेक्शन सक्रिय है।

खांसी कितने समय तक रह सकती है?
वायरल इंफेक्शन के बाद खांसी कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों तक बनी रह सकती है। इसकी अवधि व्यक्ति की उम्र, संक्रमण की गंभीरता, पहले से मौजूद एलर्जी या सांस की समस्या और धूम्रपान या प्रदूषण जैसे कारकों पर निर्भर कर सकती है।
अगर खांसी धीरे-धीरे कम हो रही है और बुखार दोबारा नहीं आ रहा, सांस लेने में परेशानी नहीं है तथा व्यक्ति की सामान्य स्थिति बेहतर हो रही है, तो अक्सर यह रिकवरी का हिस्सा हो सकती है। लेकिन खांसी लगातार बढ़ रही हो या नए लक्षण जुड़ रहे हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी में अंतर
वायरल के बाद सूखी खांसी काफी आम हो सकती है। इसमें बलगम नहीं निकलता, लेकिन गले में खुजली या जलन महसूस हो सकती है। कई बार रात में या सुबह उठने के बाद खांसी ज्यादा परेशान करती है।
कुछ लोगों में बलगम वाली खांसी भी हो सकती है। अगर बलगम धीरे-धीरे कम हो रहा है और बाकी लक्षण भी बेहतर हो रहे हैं तो यह रिकवरी के दौरान हो सकता है। लेकिन बलगम में खून आना, सांस लेने में परेशानी या लगातार बिगड़ती हालत जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

खांसी के दौरान घर पर क्या सावधानी रखें?
वायरल के बाद बनी खांसी में पर्याप्त आराम और पानी पीना मददगार हो सकता है। गले में जलन होने पर गुनगुने तरल पदार्थ से राहत मिल सकती है। कमरे में धुआं, धूल और तेज खुशबू जैसी चीजों से बचना भी उपयोगी हो सकता है।
बहुत ठंडी हवा या ऐसी चीजें जिनसे आपको व्यक्तिगत रूप से खांसी बढ़ती है, उनसे कुछ समय दूरी रखना बेहतर है। सोते समय खांसी अधिक परेशान करती है तो सिर को थोड़ा ऊंचा रखकर सोने से कुछ लोगों को आराम मिल सकता है।

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें
वायरल इंफेक्शन में एंटीबायोटिक दवाएं आमतौर पर वायरस को खत्म करने के लिए काम नहीं करतीं। इसलिए केवल खांसी बनी रहने के कारण खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना सही नहीं है।
इसी तरह बच्चों, बुजुर्गों या पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में खांसी के लिए कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है। खांसी की वजह अलग-अलग हो सकती है, इसलिए इलाज भी कारण के अनुसार ही किया जाता है।

वायरल के बाद खांसी कब चिंता की बात हो सकती है?
अगर खांसी समय के साथ कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, तेज या दोबारा आने वाला बुखार, बहुत ज्यादा कमजोरी, खून के साथ खांसी या ऑक्सीजन लेवल कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहती है या बार-बार वापस आती है, तो इसके पीछे केवल वायरल इंफेक्शन ही कारण नहीं हो सकता। एलर्जी, अस्थमा, पोस्ट-नेजल ड्रिप, एसिड रिफ्लक्स या अन्य श्वसन संबंधी समस्याएं भी लंबे समय तक खांसी का कारण बन सकती हैं। ऐसे में डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच करके सही कारण पता कर सकते हैं।

रात में खांसी ज्यादा क्यों आती है?
वायरल के बाद सांस की नली संवेदनशील रहने पर रात में खांसी ज्यादा महसूस हो सकती है। लेटने की स्थिति, कमरे की सूखी हवा या गले में जमा स्राव कुछ लोगों में खांसी को बढ़ा सकता है। अगर रात की खांसी लगातार नींद खराब कर रही है या इसके साथ सांस फूलना भी हो रहा है तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
क्या खांसी रहने का मतलब संक्रमण अभी भी है?
जरूरी नहीं। केवल खांसी बने रहने से यह साबित नहीं होता कि वायरल इंफेक्शन अभी सक्रिय है। संक्रमण खत्म होने के बाद भी श्वसन तंत्र में बची हुई सूजन और संवेदनशीलता के कारण खांसी कुछ समय तक रह सकती है।
हालांकि अगर खांसी के साथ बुखार दोबारा आ जाए, हालत बिगड़ने लगे या सांस से जुड़ी नई परेशानी शुरू हो जाए तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
बच्चों में वायरल के बाद खांसी को लेकर रहें ज्यादा सावधान
बच्चों में वायरल के बाद खांसी कुछ समय तक रह सकती है, लेकिन उनकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। अगर बच्चा सामान्य रूप से खेल रहा है, खाना-पीना कर रहा है और सांस लेने में कोई परेशानी नहीं है तो अक्सर स्थिति कम चिंताजनक होती है।

लेकिन बच्चे को सांस लेने में परेशानी, बहुत तेज सांस चलना, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, असामान्य सुस्ती, पानी कम पीना या लगातार बिगड़ती हालत दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
वायरल इंफेक्शन के बाद बुखार और बदन दर्द जल्दी ठीक हो सकते हैं, जबकि खांसी को पूरी तरह खत्म होने में अधिक समय लग सकता है। इसकी वजह अक्सर संक्रमण के बाद सांस की नली में बनी संवेदनशीलता होती है। इसलिए केवल खांसी रह जाने से यह मान लेना सही नहीं है कि वायरल अभी भी शरीर में मौजूद है।
फिर भी खांसी की अवधि और उसके साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर खांसी लगातार बढ़ रही है, लंबे समय तक बनी हुई है या इसके साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खून आना या दोबारा बुखार जैसे संकेत दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी व्यक्ति की बीमारी का निदान या व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह नहीं है। खांसी लंबे समय तक रहने, गंभीर होने या सांस से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों में विशेष सावधानी बरतें।
