By: Vikash Kumar ( Vicky)

Aaj Ka Panchang 28 August 2026: आज 28 अगस्त 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। इसके साथ ही आज वरलक्ष्मी व्रत, गायत्री जयंती और श्रावण पूर्णिमा जैसे कई धार्मिक अवसर भी हैं। पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा कुंभ राशि में और शतभिषा नक्षत्र में स्थित रहेगा।
इस बार 28 अगस्त का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी हो रहा है। हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में इसके कारण सूतक काल मान्य होने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं और क्षेत्रीय परंपराएं देखने को मिल सकती हैं। खगोलीय गणना के अनुसार ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए सामान्य तौर पर भारतीय धार्मिक अनुष्ठानों पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जाता।

आइए जानते हैं 28 अगस्त 2026 का पूरा पंचांग, आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, पंचक, दिशाशूल और रक्षाबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
आज की तिथि
आज 28 अगस्त 2026 को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। इसके बाद भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इसी पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है।

आज का वार
आज शुक्रवार है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। आज रक्षाबंधन के साथ वरलक्ष्मी व्रत भी होने के कारण मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जा रहा है। वरलक्ष्मी व्रत को सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना से जोड़ा जाता है।
आज का नक्षत्र
आज शतभिषा नक्षत्र रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा। शतभिषा नक्षत्र को ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जाता है और आज इसके प्रभाव के कारण धार्मिक कार्यों तथा आध्यात्मिक गतिविधियों का महत्व बढ़ जाता है।

आज का योग
आज अतिगंड योग रहेगा, जो सुबह लगभग 7:28 बजे तक रहने के बाद दूसरा योग शुरू होगा। किसी भी शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त को देखना बेहतर माना जाता है।
आज का करण
पूर्णिमा तिथि के दौरान बव करण रहेगा और इसके बाद बालव करण का प्रभाव होगा। पंचांग के पांच अंगों में करण का भी विशेष महत्व माना जाता है।

रक्षाबंधन 2026 आज ही क्यों?
रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रही, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जा रहा है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भद्रा के समय राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है और भद्रा समाप्त होने के बाद शुभ समय में राखी बांधना शुभ माना जाता है।
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय जानना बेहद जरूरी माना जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार राखी बांधने का सही समय जरूर जांचें।

आज पंचक का भी प्रभाव
28 अगस्त 2026 को पंचक का प्रभाव भी बताया जा रहा है। पंचांग में आज पूरे दिन पंचक दर्ज है। चूंकि पंचक को लेकर धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग कार्यों के लिए अलग नियम बताती हैं, इसलिए रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक पर्व पर राखी बांधने को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। किसी विशेष धार्मिक कार्य के लिए अपने स्थानीय पंडित या क्षेत्रीय पंचांग की सलाह ली जा सकती है।
आज का राहुकाल
28 अगस्त 2026, शुक्रवार को राहुकाल लगभग सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। राहुकाल को ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए इस अवधि में कोई नया शुभ कार्य शुरू करने से लोग आमतौर पर बचते हैं।

आज का अभिजीत मुहूर्त
आज अभिजीत मुहूर्त लगभग सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। हालांकि अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल के समय में कुछ स्थानों पर आंशिक अंतर हो सकता है, इसलिए किसी विशेष शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।
आज का दिशाशूल
शुक्रवार के दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। अगर यात्रा करना जरूरी हो तो परंपरागत रूप से दिशाशूल से संबंधित उपाय करने की मान्यता है।

आज का चंद्र ग्रहण
28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण होने वाला है। यह ग्रहण रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, जिसके कारण लोगों के बीच ग्रहण के सूतक और राखी के मुहूर्त को लेकर काफी चर्चा है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण के दौरान चंद्रमा भारतीय क्षेत्रों में क्षितिज के नीचे रहेगा।
भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण, क्या लगेगा सूतक?
चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण सूतक को लेकर धार्मिक मान्यता सामान्यतः लागू नहीं मानी जाती। हालांकि अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में नियमों की व्याख्या अलग हो सकती है। इसलिए यदि आप किसी विशेष धार्मिक परंपरा का पालन करते हैं तो अपने क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार निर्णय लेना बेहतर होगा।
आज वरलक्ष्मी व्रत भी
28 अगस्त को वरलक्ष्मी व्रत भी मनाया जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से मां लक्ष्मी की कृपा, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना से जुड़ा माना जाता है। शुक्रवार का दिन होने और श्रावण पूर्णिमा के साथ यह व्रत पड़ने के कारण धार्मिक दृष्टि से आज का दिन और भी विशेष हो गया है।
आज पूजा-पाठ में किन बातों का रखें ध्यान?
आज रक्षाबंधन और पूर्णिमा के कारण सुबह स्नान करके भगवान की पूजा करना, अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करना और परिवार के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन करना शुभ माना जाता है। रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करती हैं। भाई भी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं।
राहुकाल के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है। वहीं किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त को देखना सबसे उचित रहेगा।
आज का पंचांग एक नजर में
दिन: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
मास: श्रावण
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: पूर्णिमा, सुबह करीब 9:48 बजे तक
इसके बाद: भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा
नक्षत्र: शतभिषा
चंद्र राशि: कुंभ
सूर्य राशि: सिंह
योग: अतिगंड, सुबह करीब 7:28 बजे तक
राहुकाल: सुबह करीब 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक
दिशाशूल: पश्चिम

अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक
पंचक: पूरे दिन
मुख्य पर्व: रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा, वरलक्ष्मी व्रत, गायत्री जयंती
चंद्र ग्रहण: 28 अगस्त 2026, भारत में दृश्य नहीं
सूर्योदय: करीब 5:57 बजे
सूर्यास्त: करीब 6:47 बजे
ध्यान दें कि सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और अन्य स्थानीय समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। ऊपर दिए गए समय दिल्ली के पंचांग के आधार पर हैं।
28 अगस्त का दिन धार्मिक रूप से क्यों है खास?
28 अगस्त 2026 को एक साथ कई महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर पड़ रहे हैं। श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ वरलक्ष्मी व्रत, गायत्री जयंती और अन्य धार्मिक पर्व भी इस दिन मनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आंशिक चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना भी इसी दिन हो रही है। इस वजह से आज का दिन धार्मिक और खगोलीय दोनों दृष्टि से खास बन गया है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई पंचांग, मुहूर्त और धार्मिक जानकारी सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग शहरों और पंचांग पद्धतियों के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, व्रत या पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग अथवा योग्य आचार्य की सलाह को प्राथमिकता दें।
