By: Mala Mandal
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ ने कई गांवों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या करीब 160 तक पहुंच गई है। नेपाल पुलिस के मुताबिक नेपाल की तरफ कम से कम 157 शव बरामद किए गए हैं, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तीन लोगों की मौत की सूचना है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

नेपाल में फ्लैश फ्लड से भारी तबाही
यह भयावह हादसा नेपाल के रासुवा क्षेत्र और तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में हुआ। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़े क्षेत्रों में देखा गया। तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले घरों, पुलों, सड़कों और अन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत और बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार बाढ़ का पानी बेहद तेजी से नीचे की ओर आया, जिससे लोगों को संभलने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। कई स्थानों पर मलबा जमा हो गया है और बड़ी संख्या में वाहन तथा अन्य सामान भी बाढ़ के पानी में बह गए।

सैकड़ों लोग अभी भी लापता
इस आपदा के बाद लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग सरकारी और मीडिया अपडेट सामने आ रहे हैं। शुरुआती रिपोर्टों में 400 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी थी, जबकि बाद के अपडेट में यह संख्या 750 से अधिक तक पहुंच गई है। नेपाल और चीन की ओर के अलग-अलग आंकड़ों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या लगातार अपडेट की जा रही है। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और तीर्थयात्री भी मौजूद थे। यही वजह है कि इस आपदा ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

133 भारतीय और 37 NRI भी लापता
नेपाल में फंसे या लापता लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या भी काफी अधिक बताई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 NRI लापता लोगों में शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत की ओर जा रहे थे। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण मार्ग भी इस बाढ़ से प्रभावित हुआ है। कई तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से संपर्क टूटने के बाद उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। विभिन्न भारतीय राज्यों की ओर से भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में रहने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Isha Foundation के सदस्य भी लापता
इस आपदा में Isha Foundation से जुड़े 77 लोगों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि ये लोग सीमा क्षेत्र के एक इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे, जहां बाढ़ के बाद संपर्क टूट गया। संस्था की ओर से भी अपने सदस्यों की स्थिति की जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और कई अन्य देशों के नागरिक भी लापता बताए गए हैं। रॉयटर्स के अनुसार विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी नेपाली सेना
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। नेपाली सेना ने कई हेलीकॉप्टरों को खोज और बचाव अभियान में लगाया है। कई लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। बचाव अभियान के दौरान घायलों को चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें, मलबा और नदी के तेज बहाव के कारण अभियान में कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। अधिकारियों ने प्रभावित नदियों और उनके किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

भारत ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
नेपाल में आई इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर संवेदना व्यक्त की और हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत की ओर से राहत सामग्री भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। भारत के लिए यह आपदा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री और पर्यटक नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा तथा अन्य धार्मिक यात्राओं पर जाते हैं। ऐसे में लापता भारतीय नागरिकों की तलाश और उनके सुरक्षित बाहर निकलने को लेकर भारतीय अधिकारी नेपाली प्रशासन के साथ संपर्क में हैं।

आखिर कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह सामान्य बारिश से पैदा हुई बाढ़ नहीं थी। नेपाल के अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत क्षेत्र में आए भूकंपीय झटके के कुछ ही समय बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इसके बाद हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन, बर्फ और मलबे के खिसकने तथा नदी में अचानक पानी बढ़ने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी परिस्थितियां ऐसी आपदाओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हालांकि इस विशेष घटना के अंतिम कारणों की विस्तृत जांच अभी जारी है।

परिवारों में बढ़ी चिंता
लापता लोगों की संख्या बढ़ने के साथ उनके परिवारों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। कई परिवार अपने रिश्तेदारों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, नेपाल और भारत के अधिकारी लापता लोगों की पहचान, लोकेशन और सुरक्षित निकासी के लिए जानकारी जुटा रहे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बाहर निकालना, घायलों को उपचार उपलब्ध कराना और लापता लोगों की तलाश करना है। राहत दलों का अभियान जारी है और आने वाले घंटों में मृतकों तथा लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
नेपाल की यह प्राकृतिक आपदा एक बार फिर बताती है कि हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं कितनी भयावह हो सकती हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर राहत एवं बचाव अभियान पर है और सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि अधिक से अधिक लापता लोगों को सुरक्षित बचाया जा सके।

