By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नेपाल फ्लड लाइव: नेपाल में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 359 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। इस आपदा का असर नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी देखने को मिला है।

288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत सरकार भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय यानी MEA ने गुरुवार को बताया कि नेपाल में करीब 288 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें तीर्थयात्री, पर्यटक और अलग-अलग परियोजनाओं में काम करने वाले भारतीय नागरिक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इन 288 भारतीयों में 73 लोग त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी हैं। प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बुरी तरह बाधित होने के कारण इन लोगों से संपर्क स्थापित करने में परेशानी आ रही है। भारतीय दूतावास काठमांडू में संबंधित अधिकारियों और परियोजना प्रबंधन के संपर्क में है, ताकि इन नागरिकों के बारे में जल्द से जल्द जानकारी जुटाई जा सके।

21 भारतीयों को किया गया रेस्क्यू
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास भी जारी हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 21 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है और उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बहाल करना और फंसे लोगों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। MEA ने साफ किया है कि स्थिति लगातार बदल रही है और जैसे-जैसे नई जानकारी मिल रही है, आंकड़ों को अपडेट किया जा रहा है। इसलिए संपर्क से बाहर बताए जा रहे लोगों की संख्या में भी आगे बदलाव संभव है।

करीब 200 भारतीय चीन में फंसे
इस प्राकृतिक आपदा का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालुओं पर भी पड़ा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, करीब 200 भारतीय नागरिक चीन की तरफ फंसे हुए हैं और उन्होंने सहायता मांगी है। ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के सिलसिले में इलाके में मौजूद थे। नेपाल और चीन के बीच प्रभावित सीमा क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने वाले कई भारतीय यात्रियों का संपर्क टूट गया था। ऐसे में उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है और सरकार संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी स्थिति का पता लगाने में जुटी है।

नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही
बाढ़ ने नेपाल के रासुवा समेत कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज बहाव के साथ आए पानी, मलबे और भूस्खलन ने सड़क, पुल, इमारतों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया। कई जगहों पर संपर्क मार्ग टूट गए हैं, जिससे राहत और बचाव दलों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में स्थित जिरोंग पोर्ट भी इस आपदा से प्रभावित हुआ है। चीन की तरफ भी बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में विदेशी नागरिकों के भी बड़ी संख्या में संपर्क से बाहर होने की जानकारी है और चीनी अधिकारी अलग-अलग देशों के दूतावासों के संपर्क में हैं।

ग्लेशियर टूटने से आई तबाही?
शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह आपदा सामान्य बाढ़ से कहीं ज्यादा गंभीर थी। रिपोर्टों में इसे ग्लेशियर के टूटने और उससे पैदा हुए तेज बहाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अचानक पानी और मलबे का भारी प्रवाह नीचे की ओर आया, जिसने रास्ते में आने वाली कई संरचनाओं को तबाह कर दिया। विशेषज्ञों के लिए भी हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं, क्योंकि ग्लेशियर और पहाड़ी झीलों में होने वाले बदलाव अचानक बाढ़ और मलबे के तेज बहाव का खतरा बढ़ा सकते हैं।

भारत ने बढ़ाई निगरानी
भारत सरकार नेपाल में पैदा हुए हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने नेपाल से सटे भारतीय इलाकों में भी प्रशासन और राहत एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री भी भेजी गई है। इसके अलावा भारतीय नागरिकों की जानकारी और सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास सक्रिय है। सरकार प्रभावित भारतीयों के परिजनों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल और चीन के अधिकारियों के संपर्क में है।

राहत और बचाव अभियान जारी
फिलहाल नेपाल और चीन दोनों तरफ राहत एवं बचाव अभियान जारी है। खराब मौसम, टूटे हुए रास्ते, मलबा और बाधित संचार व्यवस्था के कारण रेस्क्यू टीमों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल में सेना और अन्य आपदा राहत दलों को बचाव अभियान में लगाया गया है।
नेपाल की इस त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। 359 लोगों की मौत, सैकड़ों लोगों के लापता होने और भारतीय नागरिकों के संपर्क से बाहर होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी प्राथमिकता अब प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों को उपचार उपलब्ध कराना और लापता लोगों की तलाश करना है।
स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले घंटों में मृतकों, लापता लोगों और सुरक्षित निकाले गए नागरिकों की संख्या में बदलाव संभव है।

