By: Mala Mandal
ग्वालियर। हथियार लाइसेंस को लेकर केंद्र सरकार ने प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब गन लाइसेंस से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए आवेदकों को ऑफलाइन प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नए गन लाइसेंस के आवेदन, पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण यानी रिन्यूअल और हथियार ट्रांसफर की प्रक्रिया अब ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए भारत सरकार के संबंधित ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा। नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य हथियार लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के साथ पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाना है।

ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे
नई व्यवस्था के तहत गन लाइसेंस से संबंधित आवेदन ऑनलाइन ही किए जाएंगे। आवेदक भारत सरकार के NDAL-ALIS पोर्टल पर जाकर अपनी आईडी बनाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भी आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यानी अब आवेदकों को लाइसेंस के नए आवेदन, रिन्यूअल या हथियार ट्रांसफर से जुड़े कार्यों के लिए पुराने तरीके से कागजी आवेदन जमा करने की प्रक्रिया से गुजरना नहीं होगा। सरकार की ओर से डिजिटल प्रक्रिया लागू किए जाने के पीछे मुख्य उद्देश्य आवेदन और रिकॉर्ड को एक केंद्रीकृत ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ना है। इससे आवेदन की स्थिति की निगरानी, दस्तावेजों की जांच और संबंधित अधिकारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

एसडीएम और पुलिस अधिकारी करेंगे जांच
ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद उसकी जानकारी संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारियों तक भेजी जाएगी। इसके बाद आवेदन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी। अधिकारियों द्वारा आवश्यक सत्यापन पूरा करने के बाद जांच रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। नए गन लाइसेंस के मामले में आवेदक के पते का सत्यापन भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। संबंधित टीम आवेदक के घर पहुंचकर उसके पते की जांच करेगी। इसके साथ ही आसपास रहने वाले लोगों और पड़ोसियों से भी आवश्यक जानकारी ली जा सकती है। सत्यापन और पुलिस जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसके आधार पर लाइसेंस जारी करने को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित कलेक्टर द्वारा लिया जाएगा। इस व्यवस्था से आवेदन प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर होने वाली जांच को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

35 हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंस का रिकॉर्ड
ग्वालियर जिले में हथियार लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड को भी डिजिटल करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में करीब 35 हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं। इनमें से बड़ी संख्या में रिकॉर्ड अब तक मैनुअल रजिस्टर के माध्यम से संभाले जा रहे थे। मैनुअल रिकॉर्ड व्यवस्था में किसी लाइसेंसधारी के हथियार, कारतूस की खरीद और हथियार से संबंधित अन्य जानकारियों को तत्काल एक जगह से देखना मुश्किल होता था। पुराने रिकॉर्ड को खोजने और उसकी जांच करने में भी समय लग सकता था। अब गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद इन लाइसेंस और हथियारों से संबंधित जानकारियों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य हथियार लाइसेंस व्यवस्था को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ना है, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।

अभी कई हथियारों का रिकॉर्ड ऑनलाइन होना बाकी
हालांकि डिजिटल व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम तेजी से किया जा रहा है, लेकिन जिले में मौजूद सभी हथियारों की जानकारी अभी पूरी तरह ऑनलाइन नहीं हो पाई है। कई लाइसेंसधारियों के हथियारों से जुड़ी जानकारी फिलहाल मैनुअल रिकॉर्ड में ही दर्ज है। इसमें हथियार कब खरीदा गया, हथियार का नंबर क्या है और लाइसेंसधारी ने हथियार बेचने के बाद कोई दूसरा हथियार खरीदा है या नहीं, जैसी जानकारियां शामिल हैं। इन पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किए जाने के बाद प्रशासन के पास हथियार लाइसेंस से संबंधित अधिक व्यवस्थित और एकीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा।

पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
नई ऑनलाइन व्यवस्था से सबसे बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि हथियार लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे फाइलों के गुम होने, आवेदन में अनावश्यक देरी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। ऑनलाइन आवेदन के बाद पुलिस और प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यम से जुड़ जाएगी। इससे संबंधित अधिकारियों के स्तर पर आवेदन की स्थिति और जांच रिपोर्ट को ट्रैक करना आसान होगा। सरकार की मंशा हथियार लाइसेंस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की है।

आवेदकों को अब क्या करना होगा?
नए गन लाइसेंस, लाइसेंस रिन्यूअल या हथियार ट्रांसफर से संबंधित आवेदन करने वाले लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया अपनानी होगी। आवेदक भारत सरकार के NDAL-ALIS पोर्टल पर जाकर अपनी आईडी बनाकर आवेदन कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भी प्रक्रिया पूरी करने का विकल्प बताया गया है।आवेदन जमा करने के बाद संबंधित विभागों द्वारा जांच और सत्यापन किया जाएगा। नए लाइसेंस के मामले में पते का भौतिक सत्यापन और पड़ोसियों से जानकारी लेने की प्रक्रिया भी की जा सकती है। जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होने के बाद संबंधित स्तर से निर्णय लिया जाएगा।

कुल मिलाकर, हथियार लाइसेंस से जुड़ी व्यवस्था को मैनुअल रिकॉर्ड से डिजिटल सिस्टम की ओर ले जाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। इससे एक ओर आवेदकों के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के पास लाइसेंस और हथियारों से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। आने वाले समय में जिले के सभी पुराने रिकॉर्ड ऑनलाइन होने के बाद हथियार लाइसेंस व्यवस्था की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।


