By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में देश का पहला स्थान प्राप्त किया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत किए गए प्रदर्शन मूल्यांकन में लखनऊ को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों में शीर्ष स्थान मिलने की जानकारी सामने आई है। इस उपलब्धि के साथ लखनऊ ने स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है और पिछले वर्षों के शीर्ष प्रदर्शनकर्ता इंदौर को पीछे छोड़ दिया है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का उद्देश्य देश के शहरों द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने, धूल प्रदूषण कम करने, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, हरित क्षेत्र बढ़ाने और नागरिकों की भागीदारी के लिए किए गए प्रयासों का मूल्यांकन करना है। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शहरों के प्रदर्शन को मापने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

लखनऊ को मिला राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ की उपलब्धि को उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, लखनऊ ने शहर स्तर पर वायु गुणवत्ता सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और विभिन्न पर्यावरणीय उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के आधार पर शीर्ष प्रदर्शन किया है। इस उपलब्धि के लिए शहर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पुरस्कार भी प्रदान किया गया है। लखनऊ नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा पिछले कुछ वर्षों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं। इनमें सड़कों की नियमित सफाई, धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र का विस्तार, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी और जन-जागरूकता अभियान जैसे कदम शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शहरों को अपने स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर उनके समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार करनी होती है। इसी आधार पर विभिन्न शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है।
इंदौर को पछाड़कर लखनऊ की बड़ी उपलब्धि
स्वच्छता और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में इंदौर लंबे समय से देश के प्रमुख शहरों में शामिल रहा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के पिछले संस्करणों में भी इंदौर ने शानदार प्रदर्शन किया था। वर्ष 2025 के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर ने 200 में से 200 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया था। लेकिन वर्ष 2026 के परिणामों में लखनऊ के शीर्ष स्थान पर पहुंचने को पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इंदौर इस बार भी देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहरों में शामिल है, लेकिन लखनऊ ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया है।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लखनऊ जैसे बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या, निर्माण गतिविधियां और शहरी विस्तार वायु प्रदूषण की चुनौती को लगातार बढ़ाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करना प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ नागरिक भागीदारी की सफलता को भी दर्शाता है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में किन मानकों पर होता है मूल्यांकन?
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के दौरान शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कई महत्वपूर्ण मानकों पर किया जाता है। इनमें सड़क और निर्माण गतिविधियों से होने वाली धूल को नियंत्रित करने के प्रयास, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग, औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी और कचरा जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा शहरों में हरित क्षेत्र विकसित करना, वृक्षारोपण, यांत्रिक सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण और नागरिकों को स्वच्छ वायु के प्रति जागरूक करने जैसे प्रयासों को भी महत्व दिया जाता है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के लिए PRANA पोर्टल का उपयोग शहरों की कार्ययोजनाओं और प्रगति की निगरानी के लिए किया जाता है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी और प्रगति को ट्रैक किया जाता है।

लखनऊ की उपलब्धि से उत्तर प्रदेश को नई पहचान
लखनऊ के पहले स्थान पर पहुंचने से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण और स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में नई पहचान मिली है। राज्य के कई शहर लगातार बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में राजधानी लखनऊ का बेहतर प्रदर्शन अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से वायु प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए नागरिकों, उद्योगों, स्थानीय निकायों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। वाहनों का कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन को अपनाना, कचरा न जलाना, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना जैसे छोटे कदम भी शहर की वायु गुणवत्ता में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

वार्ड स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ को शहर स्तर पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी उपलब्धि मिली है। रिपोर्टों के अनुसार, लखनऊ नगर निगम के जोन-4 स्थित वार्ड संख्या 70 को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि स्वच्छ वायु अभियान को केवल शहर स्तर तक सीमित रखने के बजाय वार्ड और स्थानीय स्तर तक प्रभावी तरीके से लागू किया गया है।

देश के अन्य शहरों के लिए बनेगा उदाहरण
लखनऊ की यह सफलता देश के अन्य महानगरों और तेजी से विकसित हो रहे शहरों के लिए प्रेरणा बन सकती है। वायु प्रदूषण आज देश के सामने सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है। ऐसे समय में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण जैसे कार्यक्रम शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं। इससे स्थानीय निकायों को अपनी कार्ययोजनाओं को बेहतर बनाने और नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण में शामिल करने का अवसर मिलता है।

लखनऊ का स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में पहला स्थान हासिल करना इस बात का संकेत है कि यदि शहर स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से प्रदूषण नियंत्रण, हरित विकास और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जाए तो वायु गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव संभव है।
अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि लखनऊ अपनी इस उपलब्धि को आने वाले वर्षों में किस तरह बनाए रखता है और अन्य बड़े शहर स्वच्छ हवा की दिशा में किस प्रकार अपनी रणनीतियों को मजबूत करते हैं। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के नतीजों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना ही भविष्य के स्वस्थ और टिकाऊ शहरों की सबसे बड़ी जरूरत है।

