By: Mala Mandal
पश्चिम बंगाल में इस साल दुर्गा पूजा का आयोजन कई मायनों में अलग नजर आने वाला है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आगामी दुर्गा पूजा को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इनमें कम बजट वाली पूजा समितियों को आर्थिक सहायता, पूजा आयोजनों के लिए मुफ्त बिजली, फायर सेफ्टी लाइसेंस शुल्क में छूट और महाअष्टमी के दिन शराब की बिक्री पर पूर्ण रोक जैसे फैसले शामिल हैं। सरकार के इन फैसलों को लेकर धार्मिक आयोजन, प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी सहायता को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को दुर्गा पूजा समितियों के साथ आयोजित समन्वय बैठक में इस साल की पूजा व्यवस्था को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए। सरकार का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और छोटे बजट वाली पूजा समितियों को आयोजन में परेशानी न हो, इसलिए उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं बड़े और आर्थिक रूप से सक्षम पूजा आयोजकों से सरकारी सहायता नहीं लेने की अपील की गई है।
छोटी पूजा समितियों को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता
दुर्गा पूजा को लेकर सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक कम बजट वाली पूजा समितियों के लिए ₹1 लाख की आर्थिक सहायता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसी समितियां जो सरकारी आर्थिक मदद के बिना पूजा का आयोजन करने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें सहायता दी जाएगी। हालांकि बड़े बजट और आर्थिक रूप से सक्षम पूजा आयोजकों से अपील की गई है कि वे सरकारी अनुदान के लिए आवेदन न करें। सुवेंदु अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी सहायता का उद्देश्य उन पूजा समितियों तक मदद पहुंचाना है जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से मजबूत समितियों को अपने संसाधनों और विज्ञापनों के माध्यम से पूजा का खर्च उठाना चाहिए। यह फैसला पिछले वर्षों की व्यवस्था से अलग माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2025 में कई पूजा समितियों को ₹1.10 लाख तक का अनुदान दिया गया था। इस बार सहायता को सीमित करके मुख्य रूप से जरूरतमंद और छोटी पूजा समितियों पर फोकस करने की बात कही गई है।

दुर्गा पूजा समितियों को मिलेगी मुफ्त बिजली
सरकार ने पूजा आयोजकों के लिए बिजली के खर्च को लेकर भी बड़ी राहत का ऐलान किया है। इस साल दुर्गा पूजा के दौरान पूजा समितियों को बिजली मुफ्त उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। राज्य की बिजली एजेंसी WBSEDCL और CESC की ओर से इस व्यवस्था में सहयोग की बात सामने आई है। मुफ्त बिजली की घोषणा से छोटे बजट वाली पूजा समितियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है। पंडाल, सजावट और रोशनी पर होने वाला बिजली खर्च पूजा के कुल बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में बिजली शुल्क में छूट से आयोजकों के ऊपर आर्थिक दबाव कम हो सकता है। इसके अलावा पूजा समितियों के लिए अनिवार्य फायर सेफ्टी लाइसेंस का शुल्क भी माफ करने की घोषणा की गई है। यानी समितियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक अनुमति तो लेनी होगी, लेकिन इसके लिए निर्धारित शुल्क नहीं देना होगा।

महाअष्टमी पर शराब की बिक्री पर पूर्ण रोक
दुर्गा पूजा के दौरान शराब की बिक्री को लेकर भी मुख्यमंत्री ने बड़ा फैसला लिया है। महाअष्टमी के दिन पूरे राज्य में शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। शराब की दुकानें बंद रखने के साथ-साथ बार में भी शराब परोसे जाने की अनुमति नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने महाअष्टमी के धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए यह निर्णय घोषित किया। महाअष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा और अंजलि में शामिल होते हैं। ऐसे में सरकार ने इस दिन को शराब-मुक्त रखने का फैसला किया है। यह फैसला पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि पूजा के दौरान शराब की बिक्री आम तौर पर काफी अधिक रहती है। अब महाअष्टमी के दिन शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने से प्रशासन को इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

पूजा और विसर्जन में DJ पर भी रोक
सरकार ने दुर्गा पूजा और विसर्जन के दौरान DJ के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने की बात कही है। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के दौरान अनुशासन और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है। विसर्जन जुलूस के दौरान तेज आवाज वाले DJ और संगीत के कारण होने वाली भीड़ तथा यातायात संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही पूजा समितियों से अपील की गई है कि वे पंडाल, प्रतिमा और थीम तैयार करते समय धार्मिक भावनाओं तथा बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का ध्यान रखें। थीम आधारित पूजा पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन आयोजकों को ऐसी थीम से बचने की सलाह दी गई है जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों।

दुर्गा पूजा कार्निवल नहीं होगा
इस साल पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार ने पिछले वर्षों में आयोजित होने वाले पोस्ट-पुजा कार्निवल को समाप्त करने का फैसला किया है। इसके बदले महालया के अवसर पर कोलकाता के ईडन गार्डन्स में एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किए जाने की घोषणा की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक इस कार्यक्रम में ड्रोन और आतिशबाजी के साथ करीब चार घंटे का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर चर्चा हो रही है। एक तरफ सरकार इसे दुर्गा पूजा की शुरुआत को भव्य तरीके से मनाने की दिशा में कदम बता रही है, वहीं कार्निवल खत्म करने के फैसले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।

फैसलों पर क्या है बड़ा सवाल?
सुवेंदु अधिकारी सरकार के इन फैसलों को दो नजरिए से देखा जा सकता है। पहला नजरिया आर्थिक राहत का है। छोटी और कम बजट वाली पूजा समितियों को ₹1 लाख की सहायता, मुफ्त बिजली और फायर लाइसेंस शुल्क में छूट मिलने से आयोजन का खर्च कम हो सकता है। खासकर ग्रामीण और छोटे इलाकों की पूजा समितियों के लिए यह राहत महत्वपूर्ण हो सकती है। दूसरा पहलू नियमों और धार्मिक अनुशासन का है। महाअष्टमी पर शराब की बिक्री पर रोक और DJ पर प्रतिबंध जैसे फैसले पूजा के धार्मिक वातावरण को प्राथमिकता देने की सरकार की नीति को दर्शाते हैं।

हालांकि इन फैसलों के सामने प्रशासनिक चुनौतियां भी होंगी। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि ₹1 लाख की सहायता वास्तव में जरूरतमंद समितियों तक पहुंचे और आर्थिक रूप से मजबूत समितियां इसका अनुचित लाभ न उठाएं। इसी तरह शराबबंदी के फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन और पुलिस को विशेष निगरानी करनी होगी।

कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा 2026 के लिए सुवेंदु अधिकारी सरकार ने आर्थिक सहायता, मुफ्त बिजली, धार्मिक अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई बड़े बदलावों की घोषणा की है। अब इन फैसलों का वास्तविक असर पूजा समितियों, श्रद्धालुओं और आम लोगों पर किस तरह पड़ता है, यह दुर्गा पूजा के दौरान ही स्पष्ट होगा।

