By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटाए जाने का मामला सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में करीब 43.62 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। ऐसे मतदाता जिनका नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है या जिन्हें सूची में दर्ज किसी नाम अथवा विवरण पर आपत्ति है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत 15 सितंबर तक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चुनावी रिकॉर्ड को अपडेट और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। इस दौरान मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाता है। प्रक्रिया में मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट अथवा अन्य कारणों से संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान की जाती है। इसी जांच और सत्यापन के बाद प्रारूप मतदाता सूची तैयार की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं हैं।

Jharkhand SIR में 43.62 लाख नाम हटने से बढ़ी चिंता
43 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से बाहर होने का आंकड़ा झारखंड की चुनावी व्यवस्था में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है, क्योंकि किसी भी चुनाव में मतदान करने के लिए पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी होता है। हालांकि, प्रारूप मतदाता सूची से नाम गायब होने की स्थिति में पात्र मतदाताओं के लिए दावा दर्ज कराने का अवसर उपलब्ध है। इसलिए जिन नागरिकों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से हट गया है या सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी स्थिति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। चुनाव आयोग की दावा और आपत्ति प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची से बाहर न रह जाएं और गलत अथवा अपात्र प्रविष्टियों की भी जांच की जा सके। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची और दावा-आपत्ति से जुड़ी जानकारी संबंधित आधिकारिक पोर्टलों पर उपलब्ध कराई जाती है।

15 सितंबर तक दर्ज करा सकते हैं दावा और आपत्ति
झारखंड के मतदाताओं के लिए 15 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिन लोगों का नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है, वे समय सीमा के भीतर अपना दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। इसी तरह, यदि किसी मतदाता को सूची में दर्ज किसी नाम, पते या अन्य जानकारी पर आपत्ति है, तो वह भी निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन कर सकता है। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपनी जानकारी की जांच करें। समय पर आवेदन करने से संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों और दावे की जांच का अवसर मिलता है। मतदाता को अपना नाम खोजते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके नाम की वर्तनी, विधानसभा क्षेत्र, पता और अन्य विवरण सही हैं। कई बार नाम पूरी तरह हटने के बजाय विवरण में त्रुटि के कारण भी मतदाता को अपना रिकॉर्ड खोजने में परेशानी हो सकती है।

जिनका नाम नहीं है, वे तुरंत जांचें अपनी स्थिति
जिन लोगों का नाम पहले मतदाता सूची में मौजूद था लेकिन अब प्रारूप सूची में दिखाई नहीं दे रहा है, उन्हें सबसे पहले अपने मतदाता रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। विशेष रूप से उन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है जिन्होंने हाल के वर्षों में निवास स्थान बदला है या जिनके परिवार के अन्य सदस्यों के रिकॉर्ड में बदलाव हुआ है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण में विभिन्न रिकॉर्ड और सूचनाओं का सत्यापन किया जाता है। ऐसे मामलों में जहां मतदाता को लगता है कि वह मतदान के लिए पूरी तरह पात्र है लेकिन उसका नाम सूची में नहीं है, वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा प्रस्तुत कर सकता है। दावा दर्ज करते समय मतदाता को अपनी पहचान, उम्र, निवास या अन्य आवश्यक जानकारी से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। आवेदन मिलने के बाद संबंधित चुनाव अधिकारी और स्थानीय स्तर पर नियुक्त कर्मचारी दावे और दस्तावेजों का सत्यापन कर सकते हैं।

मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना बड़ी चुनौती
SIR जैसी व्यापक प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। चुनावी रिकॉर्ड में मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों, डुप्लीकेट नामों या अन्य गलत प्रविष्टियों को हटाना जरूरी माना जाता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना उतना ही महत्वपूर्ण है कि कोई पात्र भारतीय नागरिक गलती से मतदाता सूची से बाहर न हो। झारखंड में मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेजों की जांच को लेकर प्रशासनिक सतर्कता भी बढ़ी हुई है। हाल में पाकुड़ जिले में कथित तौर पर फर्जी आवासीय दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के प्रयास से जुड़े मामलों में कार्रवाई की खबर सामने आई। अधिकारियों ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने और फर्जी दस्तावेजों के मामलों में कार्रवाई की बात कही है। इससे साफ है कि SIR प्रक्रिया में प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। एक ओर पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होने देना है, जबकि दूसरी ओर गलत या अपात्र प्रविष्टियों को मतदाता सूची में शामिल होने से रोकना भी जरूरी है।

मतदाताओं को क्या करना चाहिए?
झारखंड के मतदाताओं को सबसे पहले प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम जांचना चाहिए। यदि नाम मौजूद है, तो पते और अन्य विवरणों की भी पुष्टि करना जरूरी है। यदि नाम गायब है या कोई त्रुटि दिखाई देती है, तो मतदाता को निर्धारित दावा और आपत्ति प्रक्रिया के तहत आवेदन करना चाहिए। आवेदन करते समय केवल सही और वैध दस्तावेजों का उपयोग करना चाहिए। गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए मतदाताओं को चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों का ही पालन करना चाहिए।

मतदाता सूची में नाम दर्ज होना केवल चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार से भी जुड़ा विषय है। ऐसे में प्रत्येक पात्र नागरिक को अपनी मतदाता स्थिति की समय-समय पर जांच करनी चाहिए।
अंतिम तारीख से पहले करें जरूरी कार्रवाई
झारखंड में SIR के बाद करीब 43.62 लाख नामों के प्रारूप मतदाता सूची से हटने का मामला सामने आने के बाद मतदाताओं के लिए अपनी जानकारी जांचना बेहद जरूरी हो गया है। जिन लोगों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से हट गया है या सूची में कोई त्रुटि है, उन्हें 15 सितंबर से पहले दावा या आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

समय सीमा समाप्त होने से पहले आवश्यक कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है, ताकि पात्र मतदाताओं के मामलों की जांच अंतिम मतदाता सूची तैयार होने से पहले की जा सके। झारखंड के नागरिकों के लिए फिलहाल सबसे अहम कदम यही है कि वे अपनी मतदाता स्थिति की जांच करें और किसी भी समस्या की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय रहते आवेदन करें।


