By: Mala Mandal
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को हुई बहुमंजिला PG इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने हादसे के बाद से फरार चल रहे इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे राजस्थान के भिवाड़ी इलाके से पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस हरिराम से इमारत के निर्माण, उसकी स्थिति, मरम्मत कार्य और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ करेगी।

सत्य निकेतन में हुई इस घटना ने राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस इमारत के गिरने की घटना हुई, उसका इस्तेमाल छात्रों के लिए PG और हॉस्टल जैसी आवासीय सुविधा के तौर पर किया जा रहा था। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए थे। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया और उनका इलाज कराया जा रहा है।

हादसे के बाद फरार था इमारत मालिक
इमारत गिरने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और इमारत के मालिक की तलाश तेज कर दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद हरिराम गुप्ता पुलिस की पहुंच से बाहर था। उसे तलाशने के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकानों की जांच की, जिसके बाद उसे भिवाड़ी से पकड़ लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति क्या थी और क्या उसमें किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बरती गई थी। जांच एजेंसियों के सामने यह भी सवाल है कि इमारत में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

पांच मंजिला इमारत के मलबे में दबे लोग
सत्य निकेतन में गिरी इमारत पांच मंजिला बताई जा रही है। घटना के समय इमारत में छात्र और अन्य लोग मौजूद थे। इमारत गिरने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू करने में मदद की। इसके बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। बचाव दलों ने भारी मशीनों, खोजी उपकरणों और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया। राहत अभियान के दौरान कई लोगों को बचाया गया, जबकि हादसे में सात लोगों की जान चली गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।

बेसमेंट में चल रहे काम और इमारत की मजबूती पर सवाल
हादसे के कारणों को लेकर जांच जारी है और अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। हालांकि, शुरुआती जांच और विभिन्न रिपोर्टों में बेसमेंट में चल रहे काम, पानी जमा होने और इमारत की संरचनात्मक मजबूती को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अधिकारियों की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या मरम्मत या निर्माण संबंधी काम ने इमारत की संरचना को कमजोर किया। यह भी जांच का विषय है कि इमारत कितनी पुरानी थी और उसमें समय-समय पर जरूरी संरचनात्मक जांच कराई गई थी या नहीं। चूंकि इमारत का उपयोग छात्रों के PG या हॉस्टल के रूप में हो रहा था, इसलिए सुरक्षा मानकों और संबंधित मंजूरियों की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे की मुख्य वजह क्या थी और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई। फिलहाल किसी भी संभावित कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

MCD अधिकारियों पर भी कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, MCD ने इस मामले में पांच अधिकारियों को निलंबित किया है, जिनमें दक्षिण जोन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इस कार्रवाई से साफ है कि हादसे की जिम्मेदारी और प्रशासनिक जवाबदेही की भी जांच की जा रही है। इमारतों की सुरक्षा और अवैध या असुरक्षित निर्माण को लेकर संबंधित विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि क्या इमारत की स्थिति को लेकर पहले कोई शिकायत या चेतावनी सामने आई थी और अगर ऐसा था तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।

मजिस्ट्रियल जांच और पुलिस जांच जारी
दिल्ली सरकार ने हादसे की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इमारत मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है और मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। अब मालिक की गिरफ्तारी के बाद जांच को और गति मिलने की उम्मीद है। पुलिस पूछताछ के दौरान इमारत के रखरखाव, निर्माण में बदलाव, मरम्मत कार्य और PG संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर सकती है। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि हादसे से पहले इमारत में किसी तरह की दरार, कमजोरी या अन्य संरचनात्मक समस्या के संकेत मिले थे या नहीं। सरकार और प्रशासन की ओर से इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा की समीक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है।

छात्रों और स्थानीय लोगों में डर का माहौल
सत्य निकेतन दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र PG और किराए के कमरों में रहते हैं। इसलिए इस हादसे के बाद स्थानीय छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। कई लोगों ने इलाके की अन्य पुरानी इमारतों की सुरक्षा जांच कराने की मांग उठाई है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि घनी आबादी वाले छात्र इलाकों में चल रहे PG और हॉस्टल भवनों की नियमित संरचनात्मक जांच कितनी प्रभावी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी इमारतों में किसी भी बड़े निर्माण या मरम्मत कार्य से पहले तकनीकी जांच और आवश्यक मंजूरी बेहद जरूरी होती है।

गिरफ्तारी के बाद जांच पर टिकी नजर
इमारत मालिक हरिराम गुप्ता की गिरफ्तारी को इस मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। अब पुलिस जांच और पूछताछ से हादसे के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी। जांच में यह तय होना बाकी है कि इमारत गिरने के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी और किन लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सत्य निकेतन PG बिल्डिंग हादसे ने सात परिवारों से उनके अपने छीन लिए और राजधानी की इमारत सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आने वाले दिनों में पुलिस जांच, तकनीकी रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच से इस मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल राहत एवं जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

