By: Mala Mandal
Heart Attack Risk In Morning: सुबह आंख खुलने के बाद के शुरुआती मिनटों को अक्सर लोग सामान्य दिनचर्या का हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन शरीर के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण होता है। नींद से जागने के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इसी दौरान कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और शरीर की गतिविधियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में दिल से जुड़ी समस्या का जोखिम रखने वाले लोगों के लिए सुबह की शुरुआत सावधानी से करना जरूरी हो सकता है।

हालांकि यह कहना सही नहीं है कि सुबह के केवल “10 मिनट” ही हार्ट अटैक के लिए सबसे खतरनाक होते हैं। शोध और चिकित्सकीय जानकारी यह बताती है कि हार्ट अटैक का जोखिम दिन के शुरुआती घंटों में बढ़ सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक किसी भी समय हो सकता है। इसलिए सिर्फ एक निश्चित समय को खतरे का समय मानकर बाकी समय को सुरक्षित समझना ठीक नहीं है।
सुबह के समय शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
जब हम सो रहे होते हैं, तब शरीर अपेक्षाकृत आराम की स्थिति में रहता है। सुबह जागने के बाद शरीर धीरे-धीरे सक्रिय अवस्था में आता है। इस दौरान हार्मोनल गतिविधियों और रक्तचाप में बदलाव हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी बीमारी का खतरा है, उन्हें सुबह की दिनचर्या में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रक्त का प्रवाह अचानक कम या बंद हो जाता है। इसका कारण अक्सर कोरोनरी धमनियों में जमा प्लाक और उसके ऊपर बनने वाला ब्लड क्लॉट होता है।

सुबह उठते ही अचानक भारी काम करना क्यों हो सकता है जोखिम भरा?
सुबह उठने के तुरंत बाद शरीर को बिना तैयार किए अचानक बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करना कुछ लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को हृदय रोग है या जिनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं रहता, उन्हें अचानक तेज एक्सरसाइज या भारी वजन उठाने से बचना चाहिए। सुबह की शुरुआत आराम से करें। बिस्तर से उठने के बाद कुछ क्षण बैठें, फिर धीरे-धीरे खड़े हों और अपनी सामान्य दिनचर्या शुरू करें। अगर डॉक्टर ने किसी विशेष समय पर दवा लेने की सलाह दी है तो उसे नियमित रूप से लें।

हार्ट अटैक के लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी
हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। सबसे सामान्य संकेतों में सीने के बीच में दर्द, दबाव, जकड़न या भारीपन शामिल है। यह परेशानी कुछ मिनट तक रह सकती है या ठीक होकर दोबारा शुरू हो सकती है। इसके अलावा दर्द या असहजता हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक महसूस हो सकती है। सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, मतली, चक्कर या अचानक असामान्य कमजोरी भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। महिलाओं में भी सीने में असहजता के साथ सांस फूलना, मतली, पीठ या कंधे में दर्द और असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

अगर सुबह उठते ही सीने में दर्द हो तो क्या करें?
अगर सुबह उठने के बाद सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर या शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे गैस या सामान्य कमजोरी मानकर इंतजार न करें। सबसे पहले तुरंत अपने स्थानीय आपातकालीन नंबर पर कॉल करें और चिकित्सा सहायता लें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने से बचें। आपातकालीन चिकित्सा सेवा रास्ते में भी शुरुआती मदद और उपचार शुरू कर सकती है।

एस्पिरिन को लेकर खुद से फैसला न करें
हार्ट अटैक के संदेह में लोग अक्सर तुरंत एस्पिरिन लेने की सलाह देते हैं। लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नियम नहीं माना जा सकता। एस्पिरिन से एलर्जी या ब्लीडिंग का खतरा रखने वाले लोगों के लिए यह नुकसानदायक हो सकती है। सबसे पहले आपातकालीन चिकित्सा सेवा को फोन करें और उनके निर्देशों का पालन करें। 2024 की American Heart Association और American Red Cross की फर्स्ट-एड गाइडलाइन के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में जागरूक वयस्क को EMS की सलाह पर एस्पिरिन चबाकर निगलने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन इसे इमरजेंसी कॉल में देरी का कारण नहीं बनना चाहिए।

सुबह के शुरुआती समय में ये गलतियां करने से बचें
नींद से उठते ही बहुत तेज दौड़ना या कठिन एक्सरसाइज शुरू न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं की मात्रा बदलने या उन्हें बंद करने से बचें। अगर आपको पहले से हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है तो नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज न करें। इसके अलावा धूम्रपान, अनियमित खान-पान, लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता, अधिक वजन, हाई कोलेस्ट्रॉल और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर जैसे कारक हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

सुबह की शुरुआत कैसे करें?
सुबह उठने के बाद शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय होने का समय दें। पर्याप्त नींद लें और दिनभर शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की कोशिश करें। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और ब्लड प्रेशर तथा कोलेस्ट्रॉल जैसे स्वास्थ्य संकेतकों की नियमित निगरानी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। अगर डॉक्टर ने आपको कोई दवा दी है तो उसे निर्धारित तरीके से लें। किसी भी नए सप्लीमेंट या दवा को अपने मन से शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

सबसे जरूरी बात: लक्षणों को नजरअंदाज न करें
हार्ट अटैक के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी व्यक्ति में सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, जबड़े या हाथ में दर्द, ठंडा पसीना, मतली या चक्कर जैसे लक्षण अचानक दिखाई देते हैं तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। लक्षण कुछ देर में कम हो जाएं, तब भी उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इसलिए सुबह के “10 मिनट” को लेकर डरने के बजाय जरूरी है कि शरीर के संकेतों को समझा जाए और हृदय संबंधी जोखिम वाले लोग अपनी दिनचर्या और उपचार को लेकर सतर्क रहें। सही समय पर मदद लेना किसी गंभीर स्थिति में जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और विश्वसनीय चिकित्सा स्रोतों पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प न मानें। अगर आपको हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें। एस्पिरिन या किसी अन्य दवा का सेवन अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर या आपातकालीन चिकित्सा कर्मी की सलाह के बिना न करें।

