By: Vikash Kumar (Vicky)
आज का पंचांग 22 सितंबर 2026: मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है और इसी दिन परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार आज तिथि, नक्षत्र और योग का विशेष संयोग बन रहा है। आज अतिगण्ड योग के साथ अन्य योगों का भी प्रभाव रहेगा। परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए विशेष महत्व वाला दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की आराधना की जाती है।

22 सितंबर 2026 का पंचांग एक नजर में
आज मंगलवार है और पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रात करीब 9:43 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। आज परिवर्तिनी एकादशी के साथ कल्कि द्वादशी का भी धार्मिक महत्व है। चातुर्मास की अवधि से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिहाज से भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आज कौन सा नक्षत्र रहेगा?
22 सितंबर को चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। दिन के शुरुआती हिस्से में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा और इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा। नक्षत्र परिवर्तन के साथ दिन के अलग-अलग समय में पंचांग गणनाओं के अनुसार शुभ-अशुभ प्रभावों में बदलाव माना जाता है।

आज बन रहा है अतिगण्ड योग
आज पंचांग में अतिगण्ड योग का संयोग बताया गया है। इसके साथ सुकर्मा और रवि योग का भी उल्लेख मिलता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में अलग-अलग योगों का संबंध विभिन्न प्रकार के कार्यों से माना जाता है। इसलिए किसी विशेष शुभ कार्य के लिए मुहूर्त देखते समय केवल एक योग के बजाय तिथि, नक्षत्र, वार और अन्य पंचांग तत्वों को भी ध्यान में रखा जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
परिवर्तिनी एकादशी को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और नाम-स्मरण करने का विशेष महत्व है। इस एकादशी को पार्श्व या परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के योगनिद्रा में करवट बदलने से जुड़ी होने के कारण इसका नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा।

भगवान विष्णु की पूजा का शुभ समय
आज परिवर्तिनी एकादशी होने के कारण श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि पूजा सामग्री और विधि अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती है।
आज का अभिजीत मुहूर्त
22 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त लगभग सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक बताया गया है। यह समय सामान्य रूप से शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी विशेष संस्कार या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

आज का राहुकाल
आज मंगलवार होने के कारण राहुकाल दोपहर के समय रहेगा। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 22 सितंबर को राहुकाल लगभग दोपहर 3:14 बजे से शाम 4:44 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में परंपरागत रूप से नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय के अंतर के कारण राहुकाल के समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है।

आज सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
पंचांग के अनुसार 22 सितंबर 2026 को सूर्योदय लगभग सुबह 6:13 बजे और सूर्यास्त करीब शाम 6:14 बजे बताया गया है। चंद्रोदय दोपहर करीब 3:48 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह लगभग 2:41 बजे रहेगा। स्थान के अनुसार इन समयों में अंतर संभव है।
आज के दिन क्या करें?
परिवर्तिनी एकादशी के दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रख सकते हैं और भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का ध्यान करने, दीप जलाने और तुलसी अर्पित करने की परंपरा है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।

मंगलवार होने से आज का दिन क्यों खास है?
आज मंगलवार भी है। धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार का संबंध भगवान हनुमान से माना जाता है। इसलिए आज भगवान विष्णु की आराधना के साथ श्रद्धालु हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। हालांकि व्रत और पूजा की विधि व्यक्ति की धार्मिक परंपरा और मान्यता पर निर्भर करती है।
परिवर्तिनी एकादशी पर क्या न करें?
एकादशी व्रत रखने वाले लोगों को अपनी परंपरा के अनुसार भोजन संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन सात्विक आहार, संयम और भगवान विष्णु के स्मरण पर जोर दिया जाता है। व्रत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो कठोर उपवास करने के बजाय अपनी स्वास्थ्य स्थिति को प्राथमिकता देना उचित है।

आज का पंचांग क्यों है खास?
22 सितंबर 2026 को एकादशी तिथि, परिवर्तिनी एकादशी व्रत, मंगलवार और विभिन्न योगों का संयोग बन रहा है। इसी वजह से धार्मिक दृष्टि से आज का दिन विशेष माना जा रहा है। पंचांग में बताए गए शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अन्य समय का उपयोग लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ और दैनिक कार्यों की योजना बनाने के लिए कर सकते हैं।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय गणनाओं और प्रकाशित पंचांग विवरणों पर आधारित है। अलग-अलग पंचांग, स्थान और गणना पद्धति के कारण तिथि, मुहूर्त, सूर्योदय, राहुकाल तथा अन्य समय में कुछ अंतर हो सकता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, व्रत या संस्कार के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से समय की पुष्टि करें।

