By: Vikash Kumar (Vicky)

देवघर। विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर बुधवार, 25 सितंबर को सदर अस्पताल देवघर के फार्मेसी कक्ष में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय फार्मासिस्ट संजीव कुमार मिश्र ने की। इस अवसर पर सदर अस्पताल के स्टोर कीपर मुजफ्फरूल हक, फार्मासिस्ट अनुपम सिंह, नित्यानंद कुमार, रंजीत कुमार मंडल, भरोस कुमार, कुनाल शर्मा और स्नेहा कुमारी सहित अन्य कर्मियों ने संयुक्त रूप से केक काटकर एक-दूसरे को विश्व फार्मासिस्ट दिवस की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त फार्मासिस्ट चन्द्र मौलि के अलावा मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान फार्मासिस्टों की भूमिका, स्वास्थ्य व्यवस्था में उनके योगदान तथा फार्मेसी क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई।

स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्टों की भूमिका महत्वपूर्ण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चिकित्सकों द्वारा मरीजों को दवा लिखे जाने के बाद दवाओं के सुरक्षित वितरण, भंडारण और मरीजों को दवा के उपयोग से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में फार्मासिस्ट महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुपात में फार्मासिस्टों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। सदर अस्पताल सहित पूरे राज्य में फार्मासिस्टों की कमी का मुद्दा गंभीर है। आबादी और मरीजों की संख्या के अनुरूप फार्मासिस्टों के पद सृजित किए जाने की आवश्यकता है, ताकि स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

एक ही कार्य, लेकिन वेतन में भारी अंतर
मनोज कुमार मिश्र ने फार्मासिस्टों के बीच वेतन असमानता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि एक ही कमरे में तीन फार्मासिस्ट कार्य कर रहे हैं और तीनों से समान प्रकृति का काम लिया जा रहा है, लेकिन उनके वेतन में काफी अंतर है।

उन्होंने बताया कि नियमित कर्मियों को जहां करीब 50 से 60 हजार रुपये तक वेतन मिलता है, वहीं अनुबंध पर कार्यरत फार्मासिस्टों का वेतन लगभग 15 से 25 हजार रुपये के बीच है। दूसरी ओर आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त कर्मियों को करीब 10 से 15 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है।
उन्होंने कहा कि समान प्रकृति का कार्य करने वाले कर्मियों के बीच इस प्रकार की वेतन असमानता को दूर किया जाना चाहिए। कर्मियों को उनके कार्य और जिम्मेदारी के अनुरूप सम्मानजनक एवं न्यायसंगत पारिश्रमिक मिलना आवश्यक है।

आबादी के अनुरूप पद सृजन की मांग
जिलाध्यक्ष ने सरकार से राज्य के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आबादी के अनुरूप फार्मासिस्टों के पद सृजित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में पर्याप्त संख्या में नियमित फार्मासिस्टों की नियुक्ति होनी चाहिए, जिससे अस्पतालों में काम का दबाव कम हो और मरीजों को दवाओं से संबंधित सेवाएं सुचारू रूप से मिल सकें।
उन्होंने कहा कि कई स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की कमी के कारण उपलब्ध कर्मियों पर अतिरिक्त कार्यभार रहता है। फार्मासिस्टों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति होने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।

निजी फार्मेसी शिक्षण संस्थानों पर अंकुश की मांग
कार्यक्रम के दौरान निजी फार्मेसी शिक्षण संस्थानों की बढ़ती संख्या का मुद्दा भी उठाया गया। मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि निजी क्षेत्र में तेजी से खुल रहे फार्मेसी शिक्षण संस्थानों पर आवश्यक निगरानी और अंकुश लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। केवल शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ने से रोजगार की समस्या का समाधान नहीं होगा। फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संबंधित संस्थानों की निगरानी जरूरी है।

केक काटकर दी गई शुभकामनाएं
कार्यक्रम के दौरान फार्मासिस्टों और अस्पताल कर्मियों ने केक काटकर विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया। मौजूद कर्मियों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्टों की भूमिका को लेकर चर्चा की। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त फार्मासिस्ट चन्द्र मौलि की मौजूदगी ने भी आयोजन को विशेष बनाया।

कार्यक्रम में अनिल कुमार गुप्ता, पारस नाथ अंबे, विभूति कुमार, विजय सिंह, अमित कुमार, रीना कुमारी, प्रज्ञा कुमारी, बुद्धी नाथ झा, पिंटू कुमार, सदानंद कुमार, मैरी मुर्मू, दयमंती कुमारी, पुष्पा कुमारी, शिवानी कुमारी, जुली कुमारी, वृंदा कुमारी सहित अन्य कर्मी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान फार्मासिस्टों ने स्वास्थ्य विभाग में अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने के साथ-साथ फार्मेसी क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस अवसर पर फार्मासिस्टों की कमी, नियमित नियुक्ति, वेतन असमानता और फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।

