By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली: देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस ने अब इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने का बड़ा ऐलान किया है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक एक महीने का विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता बूथ स्तर से लेकर घर-घर तक पहुंचेंगे और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर अभियान चलाएंगे।

कांग्रेस ने इसी अभियान के तहत 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी की ओर से इस रैली में विपक्षी और गठबंधन के अन्य दलों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे को लेकर जनता के बीच व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
25 अक्टूबर से शुरू होगा कांग्रेस का विशेष अभियान
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक, पार्टी का अभियान 25 अक्टूबर से शुरू होकर 25 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान कांग्रेस संगठन के नेता और कार्यकर्ता बूथ स्तर पर सक्रिय रहेंगे। पार्टी का दावा है कि उसके पास छह राज्यों में बूथ स्तर की जानकारी उपलब्ध है और इसी आधार पर मतदाता सूची में हटाए गए नामों की जानकारी जुटाई जाएगी। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस का संगठन घर-घर जाकर उन मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करेगा, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। पार्टी का उद्देश्य ऐसे मामलों को सामने लाना और संबंधित नामों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करना है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली
कांग्रेस ने अपने अभियान का सबसे बड़ा कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित करने का फैसला किया है। पार्टी ने इसे महारैली के रूप में आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के मुताबिक, इस कार्यक्रम में विपक्षी और गठबंधन के सहयोगी दलों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इससे पहले भी SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्षी दलों की ओर से दिल्ली में बड़े आंदोलन की घोषणा की जा चुकी है। 30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक के बाद भी 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली करने की घोषणा की गई थी।

कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। हालांकि, इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष और प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक स्पष्टीकरण भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए पूरे विवाद को राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस का आक्रामक रुख
SIR के मुद्दे पर कांग्रेस का चुनाव आयोग के साथ टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित याचिका की सुनवाई का भी उल्लेख किया और SIR की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां दोहराईं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी या गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्थिति में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। पार्टी इसी मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाने की तैयारी में है।

‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ का नारा
कांग्रेस ने अपने आगामी अभियान के लिए ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ और ‘सीईसी हटाओ’ जैसे नारों को प्रमुखता देने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि उसका आंदोलन केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा। कांग्रेस के मुताबिक, अभियान के दौरान पार्टी संगठन को बूथ स्तर पर सक्रिय किया जाएगा। कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची से संबंधित मामलों की जानकारी जुटाने और उन्हें सामने लाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

25-26 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ अभियान
कांग्रेस ने नवंबर के अंतिम सप्ताह में भी बड़े कार्यक्रम की योजना बनाई है। जयराम रमेश के अनुसार, 25 और 26 नवंबर को छह अलग-अलग स्थानों से ‘दिल्ली चलो’ यात्रा शुरू की जाएगी। 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है और कांग्रेस ने इस मौके को भी अपने अभियान से जोड़ने का फैसला किया है। इससे साफ है कि कांग्रेस SIR के मुद्दे को लंबे समय तक राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखने की तैयारी में है। पार्टी की रणनीति में एक तरफ बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करना है तो दूसरी तरफ दिल्ली में बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए केंद्र और चुनाव आयोग पर दबाव बनाना शामिल है।

विपक्षी एकजुटता पर भी नजर
1 नवंबर की रामलीला मैदान की महारैली को लेकर सबसे महत्वपूर्ण पहलू विपक्षी दलों की भागीदारी होगी। INDIA गठबंधन की बैठक में पहले ही SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त आंदोलन की रणनीति पर चर्चा हो चुकी है। ऐसे में कांग्रेस की महारैली में कितने विपक्षी दल शामिल होते हैं, यह राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की ओर से SIR की प्रक्रिया और उसके नियमों को लेकर दिए जाने वाले आधिकारिक स्पष्टीकरण भी अहम रहेंगे।

आगे और तेज हो सकता है राजनीतिक संघर्ष
कांग्रेस के इस ऐलान के बाद SIR को लेकर राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है। 25 अक्टूबर से शुरू होने वाला अभियान और 1 नवंबर की रामलीला मैदान की महारैली कांग्रेस की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। फिलहाल कांग्रेस इस मुद्दे को मतदाता अधिकार, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से SIR को लेकर सामने आने वाला आधिकारिक पक्ष इस बहस की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

अब सबकी नजर 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की महारैली पर है। इस मंच से कांग्रेस के शीर्ष नेता SIR, मतदाता सूची, चुनाव आयोग और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर क्या संदेश देते हैं, यह आने वाले दिनों की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


