Reporting : Chandan Thakur
देवघर। झारखंड के देवघर जिले में एक ग्रामीण का नाम कथित रूप से गुंडा पंजी में दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। बघानाडीह निवासी चंदन ठाकुर, पिता सुरेन नापीत, ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों के खिलाफ शिकायत करने के कारण उनका नाम स्थानीय थाने के गुंडा रजिस्टर में दर्ज कर दिया गया। उनका दावा है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। इस मामले को लेकर उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई, शिकायतकर्ता के अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, गुंडा पंजी में नाम दर्ज किए जाने के वास्तविक कारणों और इस कार्रवाई की वैधानिकता की पुष्टि संबंधित पुलिस अभिलेखों तथा आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सरकार से की थी शिकायत
चंदन ठाकुर के अनुसार, उन्होंने अपने क्षेत्र में कथित रूप से व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों के संबंध में झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को लिखित आवेदन दिया था। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित मामलों को सरकारी स्तर पर उठाते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनके आवेदन के बाद मामला शासन स्तर पर पहुंचा और संबंधित विभाग की ओर से देवघर के उपायुक्त को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया। इस घटनाक्रम को वह अपनी शिकायत पर प्रशासनिक संज्ञान लिए जाने के रूप में देखते हैं। चंदन ठाकुर का आरोप है कि इसके बाद स्थानीय स्तर पर उनके प्रति द्वेषपूर्ण रवैया अपनाया गया और उनका नाम थाने की गुंडा पंजी में दर्ज कर दिया गया। उनका मानना है कि इस कार्रवाई से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत सम्मान प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस कथित कार्रवाई के पीछे वास्तविक कारण क्या था, शिकायतकर्ता के आरोपों में कितनी सच्चाई है और गुंडा पंजी में नाम दर्ज करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं, इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

सरकारी पत्र का हवाला देकर उठाए सवाल
चंदन ठाकुर ने अपने पक्ष में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, झारखंड सरकार के एक पत्र का हवाला दिया है। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, पत्र का ज्ञापांक 09/खननविविध (03)-10/2025-6280 तथा तारीख 07 अक्टूबर 2026 बताई गई है। इस पत्र के माध्यम से देवघर के उपायुक्त को मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने अपनी समस्याओं और क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठाई, तो उनकी शिकायतों पर विचार करने के बजाय उन्हें ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, संबंधित सरकारी पत्र की मूल प्रति, उसमें दर्ज विषय-वस्तु और कार्रवाई से जुड़े निर्देशों का आधिकारिक सत्यापन जरूरी है। केवल पत्र जारी होने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गुंडा पंजी में नाम दर्ज करने की कार्रवाई शिकायत के प्रतिशोध में ही की गई थी।

बिना आपराधिक इतिहास के नाम दर्ज होने का दावा
चंदन ठाकुर ने दावा किया है कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। ऐसे में गुंडा पंजी में उनका नाम दर्ज किए जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से समाज में उनकी छवि प्रभावित हो सकती है और उन्हें अनावश्यक मानसिक एवं सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई नियमानुसार, उपलब्ध तथ्यों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए। किसी शिकायतकर्ता के आरोपों को सही या गलत मानने से पहले संबंधित अभिलेखों, पुलिस की रिपोर्ट और कार्रवाई के आधार की जांच आवश्यक है। गुंडा पंजी में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया और उससे संबंधित नियमों के अनुपालन की भी जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन, व्यक्तिगत द्वेष या अधिकारों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार उचित कार्रवाई की जा सकती है।

जनता दरबार में आवेदन देकर मांगा न्याय
मामले को लेकर चंदन ठाकुर ने देवघर उपायुक्त कार्यालय के जनता दरबार में आवेदन देकर अपनी शिकायत रखी है। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। आवेदन में उन्होंने गुंडा पंजी में नाम दर्ज किए जाने के कारणों की जांच करने तथा संबंधित पुलिस अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जांच के दौरान यदि यह साबित होता है कि उनका नाम गलत तरीके से दर्ज किया गया है, तो उसे नियमानुसार तत्काल हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों और संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग भी की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं हो।

उपायुक्त के निर्देश से निष्पक्ष जांच की उम्मीद
चंदन ठाकुर के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए देवघर के उपायुक्त ने जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जांच के आदेश, जांच अधिकारी और जांच की वर्तमान स्थिति से संबंधित आधिकारिक विवरण की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना अभी आवश्यक है। यदि जांच शुरू होती है, तो इसमें यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित व्यक्ति का नाम गुंडा पंजी में किस आधार पर दर्ज किया गया, इसके लिए कौन-से दस्तावेज और रिपोर्ट इस्तेमाल किए गए तथा क्या निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था। इसके अलावा, शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए प्रतिशोध के आरोपों की भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए। संबंधित थाना और पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने से मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर टिकी निगाहें
देवघर में सामने आए इस मामले ने पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता और शिकायतकर्ताओं के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी शिकायत संबंधित विभागों और प्रशासन के समक्ष रखने का अधिकार है। वहीं, पुलिस को भी कानून के दायरे में रहकर शिकायतों की जांच और आवश्यक कार्रवाई करनी होती है।

ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच ही यह निर्धारित कर सकती है कि पुलिस की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या उसमें किसी प्रकार की त्रुटि हुई। इसलिए जरूरी है कि शिकायतकर्ता के आरोपों के साथ-साथ पुलिस का पक्ष भी सुना जाए और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाए।

फिलहाल, चंदन ठाकुर ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। अब मामले में आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।



