By: Vikash Kumar (Vicky)
आज का पंचांग 29 अक्टूबर 2026: आज गुरुवार, 29 अक्टूबर को देशभर में करवा चौथ का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना के साथ व्रत रखती हैं। करवा चौथ के दिन चतुर्थी तिथि, पूजा के शुभ समय और चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि आज पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, चांद कितने बजे निकलेगा, राहुकाल कब रहेगा और पंचांग के अनुसार दिनभर के महत्वपूर्ण समय कौन-कौन से हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन करवा चौथ के साथ कुछ क्षेत्रों में वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का भी धार्मिक महत्व है। दिन गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह दिन विशेष माना जाता है। आइए जानते हैं आज के पंचांग की पूरी जानकारी, करवा चौथ की पूजा विधि और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें।

आज 29 अक्टूबर 2026 का पंचांग
दिन: गुरुवार
तारीख: 29 अक्टूबर 2026
मास: कार्तिक
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: कृष्ण चतुर्थी, रात लगभग 10:09 बजे तक; इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी।
नक्षत्र: रोहिणी, सुबह लगभग 11:11 बजे तक; इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रहेगा।
योग: परिघ योग, जो मध्यरात्रि के आसपास समाप्त होगा।
करण: बव करण सुबह लगभग 11:37 बजे तक, इसके बाद बालव करण रहेगा। बालव करण चतुर्थी तिथि की समाप्ति तक रहेगा।
वार: गुरुवार
चंद्र राशि: वृषभ, रात लगभग 10:06 बजे तक; इसके बाद मिथुन राशि में प्रवेश।
सूर्योदय: नई दिल्ली में लगभग सुबह 6:31 बजे।
सूर्यास्त: नई दिल्ली में लगभग शाम 5:38 बजे।
चंद्रोदय: नई दिल्ली में लगभग रात 8:17 बजे।
नोट: तिथि, नक्षत्र और अन्य पंचांग विवरण के समय में स्थान तथा गणना पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। यहां दिए गए समय सामान्य संदर्भ के लिए हैं।

करवा चौथ 2026: आज ही क्यों रखा जा रहा है व्रत?
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में भारत में यह पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। चतुर्थी तिथि का समय और व्रत के पारंपरिक नियम इस पर्व की तारीख निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद व्रत शुरू करती हैं। पारंपरिक रूप से कई महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और करवा चौथ से संबंधित परंपराओं के अनुसार पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन करने, अर्घ्य देने और पूजा के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। करवा चौथ को केवल उपवास का दिन ही नहीं, बल्कि पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक एकता से जुड़े पर्व के रूप में भी देखा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसकी पूजा विधि तथा परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है।

करवा चौथ 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ पर शाम के समय पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। पारंपरिक रूप से महिलाएं चंद्रोदय से पहले पूजा की तैयारी करती हैं और शुभ मुहूर्त में करवा माता, भगवान गणेश तथा शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
करवा चौथ पूजा मुहूर्त: शाम के समय, स्थानीय पंचांग में निर्धारित शुभ अवधि के अनुसार।
पूजा की तैयारी: शाम को शुभ मुहूर्त शुरू होने से पहले पूजा सामग्री व्यवस्थित कर लें।
चंद्रमा को अर्घ्य: स्थानीय चंद्रोदय के समय के अनुसार।
व्रत पारण: चंद्र दर्शन, अर्घ्य और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा पूरी करने के बाद।
महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में बदल सकता है। इसलिए अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग से सटीक पूजा मुहूर्त की पुष्टि कर लें।

29 अक्टूबर 2026 को चांद कितने बजे निकलेगा?
करवा चौथ के दिन महिलाओं को चंद्रमा के निकलने का इंतजार रहता है, क्योंकि पारंपरिक रूप से चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है। इस वर्ष 29 अक्टूबर को नई दिल्ली में चंद्रोदय का समय लगभग रात 8:17 बजे बताया गया है। हालांकि, यह समय पूरे भारत के लिए समान नहीं है। शहर की भौगोलिक स्थिति, स्थानीय क्षितिज और पंचांग गणना के कारण चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, पटना, रांची, देवघर या किसी अन्य शहर में रहने वाली महिलाओं को अपने स्थानीय चंद्रोदय का समय अवश्य देखना चाहिए। यदि मौसम खराब होने के कारण चंद्रमा दिखाई न दे, तो अपने परिवार की धार्मिक परंपरा और स्थानीय विद्वान की सलाह के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

आज राहुकाल कितने बजे से कितने बजे तक रहेगा?
पंचांग में राहुकाल को पारंपरिक रूप से नया और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार राहुकाल लगभग दोपहर 1:28 बजे से 2:52 बजे तक रहेगा।
राहुकाल: दोपहर 1:28 बजे से 2:52 बजे तक, नई दिल्ली के संदर्भ में।
राहुकाल की अवधि में परंपरागत मान्यताओं का पालन करने वाले लोग नए कार्य की शुरुआत टालना पसंद करते हैं। हालांकि, नियमित कामकाज, जरूरी जिम्मेदारियों और पहले से तय कार्यों को केवल राहुकाल के कारण रोकना आवश्यक नहीं है।
ध्यान दें कि राहुकाल का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर निर्धारित होता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में इसमें अंतर हो सकता है।

आज का अभिजीत मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त को हिंदू पंचांग में सामान्यतः शुभ समय माना जाता है। 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के लिए अभिजीत मुहूर्त लगभग सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक बताया गया है।
इस अवधि का उपयोग परंपरागत रूप से प्रार्थना, महत्वपूर्ण योजनाओं की तैयारी और शुभ कार्यों के लिए किया जाता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या संस्कार के लिए संबंधित कार्य के अनुकूल मुहूर्त की अलग से पुष्टि करना उचित रहेगा।

आज का ब्रह्म मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त को सुबह का आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण समय माना जाता है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त लगभग सुबह 4:48 बजे से 5:39 बजे तक रहेगा।
इस समय ध्यान, मंत्र जाप, योग, प्रार्थना और शांत मन से दिन की शुरुआत करने की परंपरा है। करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सुबह की तैयारी और परिवार की परंपराओं का पालन भी महत्वपूर्ण होता है।
आज का विजय मुहूर्त
विजय मुहूर्त को परंपरागत रूप से सफलता और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जाता है। नई दिल्ली में 29 अक्टूबर को विजय मुहूर्त लगभग दोपहर 1:56 बजे से 2:40 बजे तक बताया गया है।
यह समय राहुकाल से भी आंशिक रूप से मेल खाता है। इसलिए किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए केवल एक शुभ समय देखकर निर्णय न लें, बल्कि स्थानीय पंचांग और संबंधित कार्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखें।

करवा चौथ पर बन रहे हैं कौन-कौन से ज्योतिषीय संयोग?
29 अक्टूबर 2026 को गुरुवार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। रोहिणी नक्षत्र सुबह लगभग 11:11 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। पंचांग के अनुसार परिघ योग भी दिन के दौरान प्रभावी रहेगा और मध्यरात्रि के आसपास समाप्त होगा। गुरुवार का संबंध धार्मिक मान्यताओं में भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति से जोड़ा जाता है। वहीं करवा चौथ की पूजा में भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव का विशेष स्थान है। इस कारण श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ और प्रार्थना कर सकते हैं।हालांकि, किसी विशेष योग को दुर्लभ या अत्यंत फलदायी बताने से पहले उसकी पुष्टि प्रमाणित पंचांग से करना जरूरी है। केवल एक ही तिथि पर कई पंचांग तत्वों का होना अपने आप में किसी असाधारण फल की गारंटी नहीं देता।

करवा चौथ की पूजा विधि क्या है?
करवा चौथ की पूजा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। पूजा शुरू करने से पहले घर के पूजा स्थान को साफ कर लें और सभी आवश्यक सामग्री एक जगह रख लें। सबसे पहले पूजा स्थान पर भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद पूजा की थाली में दीपक, रोली, अक्षत, पुष्प, मिठाई, जल से भरा करवा और अन्य आवश्यक सामग्री रखें। शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश का स्मरण करें और अपने परिवार की परंपरा के अनुसार करवा चौथ की पूजा करें। इसके बाद व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा निभाई जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं समूह में बैठकर पूजा करती हैं और एक-दूसरे के साथ करवा बदलने की रस्म भी निभाती हैं। रात में चंद्रमा निकलने पर उसकी पूजा की जाती है और अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोला जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धा, स्वच्छता और शांत मन का विशेष महत्व माना जाता है।
करवा चौथ पूजा सामग्री की पूरी सूची
करवा चौथ की पूजा के लिए सामान्यतः निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
पूजा की चौकी, लाल या पीला कपड़ा, भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर, माता पार्वती और भगवान शिव की तस्वीर, करवा या जल का पात्र, पूजा की थाली, दीपक, घी या तेल, रुई की बत्ती, रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मौली, पुष्प, फल, मिठाई, धूप, अगरबत्ती, कपूर, छलनी, चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल का पात्र और करवा चौथ की व्रत कथा की पुस्तक। कुछ परिवारों में साड़ी, श्रृंगार सामग्री, बायना और अन्य पारंपरिक वस्तुएं भी पूजा में शामिल की जाती हैं। आवश्यक सामग्री परिवार की रीति और स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

करवा चौथ के दिन किन बातों का रखें ध्यान?
करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी महिला को मधुमेह, गर्भावस्था, कोई गंभीर बीमारी या नियमित दवा लेने की आवश्यकता है, तो निर्जला उपवास करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
पूजा की तैयारी समय से पूरी कर लें, ताकि अंतिम समय में अनावश्यक भागदौड़ न हो। चंद्रमा निकलने के समय को लेकर अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखें। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए अपनी शारीरिक जरूरतों और स्वास्थ्य को भी महत्व दें।
करवा चौथ का मूल संदेश प्रेम, विश्वास, पारिवारिक सहयोग और मंगलकामना से जुड़ा है। इस अवसर पर पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें और परिवार में सुखद वातावरण बनाए रखने का प्रयास करें।
इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पंचांग के समय शहर, स्थान और गणना पद्धति के अनुसार बदल सकते हैं। पूजा और चंद्रोदय के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें। धार्मिक मान्यताओं को व्यक्तिगत आस्था के रूप में समझें। स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेते समय चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।

