By: Vikash Kumar (Vicky)
Aaj Ka Panchang 28 October 2026: आज 28 अक्टूबर 2026, बुधवार का दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। दिन के शुरुआती समय में कृत्तिका नक्षत्र और व्यतीपात योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं में तिथि, नक्षत्र, योग और करण को दिन की विशेषताओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि आप आज पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान-पुण्य या किसी महत्वपूर्ण कार्य की योजना बना रहे हैं, तो दिन का पंचांग जानना उपयोगी हो सकता है। आज के पंचांग की खास बात यह है कि व्यतीपात योग सुबह समाप्त हो जाएगा, जबकि कृत्तिका नक्षत्र दोपहर तक रहेगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा। पंचांग के अनुसार, आज सर्वार्थ सिद्धि योग का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसे पारंपरिक रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि, किसी विशेष संस्कार या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और व्यक्तिगत मुहूर्त की जांच करना जरूरी है।
आइए जानते हैं 28 अक्टूबर 2026 का संपूर्ण पंचांग, आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिन से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताएं।

आज 28 अक्टूबर 2026 का पंचांग विवरण
दिन: बुधवार
तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष तृतीया
नक्षत्र: कृत्तिका, इसके बाद रोहिणी
योग: व्यतीपात, इसके बाद वरीयान
करण: वणिज, इसके बाद विष्टि
चंद्र राशि: वृषभ
सूर्य राशि: तुला
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
मास: कार्तिक
ऋतु: हेमंत
विशेष: कृत्तिका नक्षत्र, व्यतीपात योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का उल्लेख आज के पंचांग को विशेष बनाता है।
नोट: ऊपर दिए गए पंचांग विवरण और समय नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है।

आज की तिथि: कार्तिक कृष्ण तृतीया का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, 28 अक्टूबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। चंद्रमा की कलाओं के आधार पर हिंदू कैलेंडर में तिथियों की गणना की जाती है। कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद शुरू होता है और अमावस्या की ओर बढ़ता है। धार्मिक मान्यताओं में तृतीया तिथि को पूजा-पाठ, श्रद्धा और धार्मिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भगवान की आराधना, मंत्र जाप और दान-पुण्य कर सकते हैं। घर में पूजा करते समय स्वच्छता, शांत मन और श्रद्धा का विशेष महत्व माना जाता है। कार्तिक मास को हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इस महीने में कई लोग सुबह स्नान, दीपदान, भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। हालांकि, पूजा की विधि और नियम परिवार की परंपरा तथा स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

कृत्तिका नक्षत्र का महत्व: आज किस बात का रखें ध्यान?
आज दोपहर लगभग 1:26 बजे तक कृत्तिका नक्षत्र रहने का उल्लेख नई दिल्ली के पंचांग में मिलता है। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा। नक्षत्रों को वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा की स्थिति के आधार पर समझा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कृत्तिका नक्षत्र का संबंध अग्नि तत्व, शुद्धि, ऊर्जा और दृढ़ता से माना जाता है। इसे स्पष्ट निर्णय लेने, अनुशासन बनाए रखने और अधूरे कार्यों को व्यवस्थित करने के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इस नक्षत्र के दौरान धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ, मंत्र जाप और आत्मचिंतन किया जा सकता है। किसी बड़े निर्णय या नए कार्य की शुरुआत के लिए केवल नक्षत्र पर निर्भर रहने के बजाय तिथि, योग, करण और संबंधित मुहूर्त भी देखना चाहिए।

व्यतीपात योग आज सुबह तक, इसके बाद वरीयान योग
28 अक्टूबर 2026 को व्यतीपात योग सुबह लगभग 7:18 बजे तक रहने के बाद वरीयान योग शुरू होने का उल्लेख पंचांग में है। योग हिंदू पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में से एक है। इसकी गणना सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर की जाती है। ज्योतिषीय परंपराओं में व्यतीपात योग को सामान्य शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए सावधानी बरतने वाला समय माना जाता है। हालांकि, इस योग का अर्थ यह नहीं है कि पूरे दिन कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता। रोजमर्रा के काम, नौकरी, पढ़ाई और आवश्यक जिम्मेदारियां सामान्य रूप से जारी रखी जा सकती हैं। वरीयान योग को भी पारंपरिक ज्योतिष में विशिष्ट गुणों से जोड़ा जाता है। किसी विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन या अन्य महत्वपूर्ण संस्कार के लिए केवल योग देखकर निर्णय न लें। उस कार्य के अनुरूप संपूर्ण पंचांग और स्थानीय मुहूर्त की जांच करना बेहतर रहेगा।

आज का शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त
धार्मिक परंपराओं में ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, योग, मंत्र जाप और अध्ययन के लिए अच्छा समय माना जाता है। आज नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह लगभग 4:47 बजे से 5:38 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त को भी परंपरागत रूप से शुभ समय माना जाता है। 28 अक्टूबर को नई दिल्ली के लिए इसका समय लगभग सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक बताया गया है।

आज के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 बजे से 5:38 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 बजे से 2:40 बजे तक
अमृत काल: सुबह 11:15 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक
ये समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। स्थानीय सूर्योदय और गणना के अंतर के कारण आपके शहर में समय अलग हो सकता है। अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल के समय में आंशिक ओवरलैप होने की स्थिति में किसी विशेष कार्य के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से पुष्टि कर लें।

आज राहुकाल कब से कब तक रहेगा?
हिंदू पंचांग में राहुकाल को परंपरागत रूप से नया शुभ कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। यह समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर दिन के आठ भागों में से एक भाग के रूप में निर्धारित किया जाता है। इसका समय सप्ताह के दिन के अनुसार बदलता है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के लिए राहुकाल दोपहर लगभग 12:04 बजे से 1:28 बजे तक है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश या किसी अन्य मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से पहले लोग अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार विचार करते हैं। हालांकि, जरूरी काम, नियमित नौकरी, पढ़ाई, यात्रा या पहले से तय जिम्मेदारियों को केवल राहुकाल के कारण रोकना आवश्यक नहीं है।

आज के अन्य अशुभ समय
पंचांग में राहुकाल के अलावा यमगंड और गुलिक काल जैसे समय का भी उल्लेख मिलता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ लोग इन अवधियों में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचते हैं।
यमगंड: सुबह 7:53 बजे से 9:17 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 12:04 बजे से 1:28 बजे तक
इन समयों की गणना नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार की गई है। आपके शहर में इनका समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

आज सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
दिन की शुरुआत, पूजा-पाठ और व्रत से जुड़ी गतिविधियों के लिए सूर्योदय तथा चंद्रोदय का समय कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
सूर्योदय: सुबह लगभग 6:30 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 5:39 बजे
चंद्रोदय: शाम लगभग 7:11 बजे
चंद्रास्त: सुबह लगभग 8:46 बजे
ये समय नई दिल्ली के लिए हैं। स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त का समय बदल सकता है। यदि आप किसी व्रत, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान के लिए समय देख रहे हैं, तो अपने शहर का पंचांग अवश्य जांचें।
आज बुधवार को किसकी पूजा करना शुभ माना जाता है?
हिंदू धार्मिक परंपरा में बुधवार का संबंध भगवान गणेश और बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा करते हैं और अपने कार्यों में बुद्धि, विवेक तथा सफलता की कामना करते हैं। भगवान गणेश की पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दूर्वा, फूल और फल अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद गणेश मंत्र का जाप और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य किया जा सकता है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता को माना जाता है। बुधवार को विद्यार्थी पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने का संकल्प ले सकते हैं। नौकरीपेशा लोग अपने काम की योजना बना सकते हैं और कारोबारी दिनभर के जरूरी कार्यों की सूची तैयार कर सकते हैं। इन गतिविधियों को धार्मिक आस्था के साथ-साथ व्यावहारिक दिनचर्या का हिस्सा भी बनाया जा सकता है।

आज के दिन क्या करें और किन बातों का ध्यान रखें?
आज पूजा-पाठ या मंत्र जाप के लिए कुछ समय निकाल सकते हैं। यदि आप धार्मिक नियमों का पालन करते हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान गणेश या अपने इष्ट देव की आराधना करें। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना, भोजन दान करना या किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई में मदद करना भी अच्छे कार्य माने जाते हैं। दान हमेशा अपनी क्षमता और इच्छा के अनुसार करना चाहिए। नौकरी और कारोबार से जुड़े जरूरी कामों की योजना पहले से बनाएं। किसी भी आर्थिक लेन-देन, निवेश या समझौते से पहले संबंधित जानकारी और दस्तावेजों की जांच जरूर करें। परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत में संयम रखें। किसी बात को लेकर मतभेद होने पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय शांतिपूर्वक समाधान खोजें।
यदि आज कोई विशेष मांगलिक कार्य करने की योजना है, तो अपने शहर के पंचांग के अनुसार तिथि, नक्षत्र, योग, करण और संबंधित मुहूर्त की पुष्टि करें।

आज का पंचांग क्यों है महत्वपूर्ण?
पंचांग हिंदू कालगणना की एक पारंपरिक पद्धति है। पंचांग शब्द पांच अंगों से मिलकर बना है—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन पांच तत्वों के आधार पर दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारी समझी जाती है। तिथि से चंद्र दिवस का पता चलता है, जबकि वार सप्ताह के दिन को दर्शाता है। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से संबंधित होता है। योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर निकाला जाता है और करण तिथि का आधा भाग होता है। लोग पंचांग की सहायता से व्रत, त्योहार, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के समय की जानकारी लेते हैं। हालांकि, पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय गणना को प्राथमिकता देना उचित है।
28 अक्टूबर 2026, बुधवार को कार्तिक कृष्ण तृतीया तिथि है। आज कृत्तिका नक्षत्र दोपहर लगभग 1:26 बजे तक रहेगा, जिसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा। व्यतीपात योग सुबह लगभग 7:18 बजे समाप्त होकर वरीयान योग शुरू होगा। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार राहुकाल दोपहर 12:04 बजे से 1:28 बजे तक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज पूजा-पाठ, मंत्र जाप और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए समय निकाल सकते हैं। किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त की पुष्टि करना न भूलें।
इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक हिंदू पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। मुहूर्त एवं समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इसे धार्मिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। किसी महत्वपूर्ण अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य विद्वान से पुष्टि करें।
