By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली: बिहार की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित IRCTC होटल घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को 19 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने दोनों को शुक्रवार की सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी। यह मामला भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के होटलों के संचालन से जुड़े कथित टेंडर अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। अदालत में अगली सुनवाई के दौरान आरोप तय करने की औपचारिक प्रक्रिया से जुड़ी कार्यवाही आगे बढ़ने की संभावना है।

19 नवंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश
शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की ओर से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाने के कारण बताए गए। राबड़ी देवी के वकील ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का हवाला देते हुए अदालत से पेशी में छूट देने की मांग की। वहीं, तेजस्वी यादव के वकील की ओर से बताया गया कि उनकी फ्लाइट में देरी हो गई है और वह निर्धारित समय पर अदालत नहीं पहुंच पा रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोनों को उस दिन की व्यक्तिगत पेशी से राहत दे दी। हालांकि, अदालत ने अगली तारीख को लेकर स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन आरोपियों को उच्च न्यायालय से कार्यवाही पर रोक या विशेष छूट प्राप्त नहीं है, उन्हें 19 नवंबर को अदालत में उपस्थित होना होगा। विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की।

लालू प्रसाद यादव की याचिका पर हाईकोर्ट में भी सुनवाई
इस मामले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की ओर से भी कानूनी लड़ाई जारी है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अदालत को बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोप तय करने से संबंधित निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी किया है। लालू प्रसाद यादव की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें 3 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक निचली अदालत में स्थगन की मांग करने की अनुमति दी है। इस घटनाक्रम के बाद ट्रायल कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन आरोपियों को हाईकोर्ट से कार्यवाही पर रोक का आदेश नहीं मिला है, उन्हें अगली सुनवाई में उपस्थित रहना होगा। इस प्रकार 19 नवंबर की तारीख मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या है IRCTC होटल घोटाला मामला?
IRCTC होटल घोटाला मामला उस समय से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेलवे मंत्रालय के अधीन IRCTC के कुछ होटलों के संचालन और रखरखाव के लिए निजी कंपनियों को ठेका दिए जाने में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में रांची और पुरी स्थित IRCTC होटलों के संचालन से जुड़े टेंडर की प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी की गई थी। आरोप है कि निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना एक निजी कंपनी को होटल संचालन का ठेका देने में मदद पहुंचाई गई। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि ठेका आवंटन के बदले पटना में लगभग तीन एकड़ की कीमती जमीन कथित तौर पर एक बेनामी कंपनी के माध्यम से हासिल की गई। ED इस पूरे लेन-देन को कथित अपराध से अर्जित संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जोड़कर जांच कर रहा है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में निजी कंपनियों, उनके संचालकों और लालू परिवार से जुड़े लोगों के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन की भी जांच की गई है।

सितंबर में नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश
इस मामले में सितंबर 2026 में अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश दिया था। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से नामजद कुल 16 आरोपियों में से सात को अदालत ने मामले से मुक्त कर दिया था, जबकि शेष नौ आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कानून के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने उस समय उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनने की बात कही थी। इसके बाद मामले की कार्यवाही आगे बढ़ी। हालांकि, अदालत की ओर से आरोप तय करने का आदेश दिया जाना किसी आरोपी को दोषी घोषित करने के समान नहीं है। मामले में आरोपों की सत्यता का फैसला आगे की न्यायिक प्रक्रिया, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

लालू परिवार ने आरोपों को नकारा
IRCTC होटल मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर लगातार बहस होती रही है। लालू यादव की ओर से इन आरोपों का खंडन किया जाता रहा है। उनका पक्ष रहा है कि रेलवे होटलों के टेंडर पारदर्शी तरीके से दिए गए थे। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि मामले में कथित अनियमितताओं और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित पहलू सामने आए हैं। अब अदालत में इन आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों की न्यायिक जांच होनी है।

19 नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
IRCTC होटल घोटाला मामले में अब सभी की नजरें 19 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। इस दिन राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है, बशर्ते उन्हें किसी सक्षम अदालत से अलग छूट या रोक प्राप्त न हो। वहीं, लालू प्रसाद यादव की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका और 3 दिसंबर को होने वाली सुनवाई भी इस मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

कुल मिलाकर, IRCTC होटल घोटाला मामला एक बार फिर बिहार की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि 19 नवंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान क्या घटनाक्रम सामने आता है और मामले की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसियों के दावे हैं। अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय के फैसले के बाद ही मानी जाएगी।



