By: Mala Mandal
तमिलनाडु में शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए 1 नवंबर 2026 से नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। राज्य सरकार ने शराब की बिक्री पर पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर (Environmental and Social Welfare Cess) लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत शराब की प्रत्येक बोतल के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में 10 रुपये शामिल किए जाएंगे। इस बदलाव के बाद ग्राहकों को शराब खरीदते समय पहले की तुलना में 10 रुपये अधिक चुकाने होंगे। हालांकि, खाली बोतल वापस करने पर उपभोक्ताओं को यह अतिरिक्त राशि वापस मिल सकेगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य शराब की खाली बोतलों के उचित संग्रह, सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है। इसके अलावा उपकर से प्राप्त राशि का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में भी किया जाएगा। तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए संबंधित अधिकारियों और शराब दुकानों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

1 नवंबर से बदल जाएगा शराब खरीदने का नियम
तमिलनाडु में सरकारी शराब दुकानों से शराब खरीदने वाले ग्राहकों को अब संशोधित MRP के अनुसार भुगतान करना होगा। अभी तक कई दुकानों पर शराब की निर्धारित कीमत के अलावा खाली बोतल वापसी योजना के नाम पर 10 रुपये अलग से लिए जाते थे। नई व्यवस्था के तहत इस राशि को अलग से लेने के बजाय शराब की बोतल के संशोधित MRP में ही शामिल कर दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी शराब की बोतल की मौजूदा कीमत 140 रुपये है और उसके साथ 10 रुपये की बोतल वापसी राशि ली जाती थी, तो नई व्यवस्था में उसकी कीमत 150 रुपये होगी। यानी ग्राहक को बिलिंग के समय 150 रुपये देने होंगे। हालांकि, खाली बोतल वापस करने पर उसे 10 रुपये वापस मिल जाएंगे। इसका मतलब यह है कि सरकार ने बोतल वापसी से जुड़ी राशि को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से वसूलने तथा लौटाने की व्यवस्था बनाई है। ग्राहकों को अब MRP से ऊपर अलग से कोई अतिरिक्त रकम देने की जरूरत नहीं होगी।

खाली बोतल लौटाने पर मिलेंगे 10 रुपये वापस
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं को खाली बोतल लौटाने पर 10 रुपये वापस मिलेंगे। इसके लिए ग्राहकों को उसी दुकान पर जाने की बाध्यता नहीं होगी, जहां से उन्होंने शराब खरीदी थी। वे TASMAC की किसी भी निर्धारित दुकान पर खाली बोतल जमा कर सकते हैं और तय प्रक्रिया के अनुसार अपनी राशि वापस प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से शराब की खाली बोतलों को इधर-उधर फेंकने की समस्या कम होगी। साथ ही दुकानों के माध्यम से बोतलों का संग्रह और अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण पर होगा खर्च
तमिलनाडु सरकार द्वारा लागू किए गए पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर का उद्देश्य केवल राजस्व संग्रह करना नहीं है, बल्कि शराब की खाली बोतलों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करना भी है। इस राशि का इस्तेमाल खाली शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण, सुरक्षित निपटान और दोबारा उपयोग की व्यवस्था विकसित करने में किया जाएगा। इसके अलावा नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, नशामुक्ति कार्यक्रमों और ऐसे परिवारों की सहायता के लिए भी इस कोष का उपयोग किए जाने का प्रावधान है, जो शराब की लत के कारण सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
सरकार पर्यावरण संरक्षण, जागरूकता अभियान और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण जैसे कार्यों को भी इस योजना से जोड़ना चाहती है।

पहले की व्यवस्था पर उठे थे सवाल
खाली बोतलों की वापसी के लिए पहले से ही ग्राहकों से 10 रुपये अलग से लिए जाते थे। खाली बोतल वापस करने पर यह राशि उपभोक्ताओं को लौटा दी जाती थी। हालांकि, इस व्यवस्था में पैसे के संग्रह और हिसाब-किताब को लेकर सवाल उठ रहे थे। तमिलनाडु के निषेध एवं आबकारी मंत्री के. विग्नेश के अनुसार, पुरानी व्यवस्था में ग्राहकों से अलग से जमा की जाने वाली रकम का पूरा हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शी तरीके से दर्ज नहीं हो पा रहा था। मंत्री ने बताया कि TASMAC की तीन दुकानों में किए गए एक पायलट अध्ययन में लगभग 55 से 65 प्रतिशत खाली बोतलों की वापसी सामने आई। ऐसे में बाकी बोतलों और उनसे जुड़ी जमा राशि का हिसाब सुनिश्चित करना जरूरी था। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था में उपकर की राशि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी। इससे संग्रह और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी तथा किसी भी तरह की अनियमितता पर निगरानी रखना आसान होगा।

दुकानों को मिलेगी अतिरिक्त राशि
नई व्यवस्था के तहत खाली बोतलों को इकट्ठा करने, उनकी गिनती करने, सुरक्षित रखने और अधिकृत विक्रेताओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी शराब दुकानों के कर्मचारियों को निभानी होगी। इस अतिरिक्त काम को देखते हुए TASMAC ने दुकानों को दैनिक हैंडलिंग शुल्क देने का प्रावधान किया है। चेन्नई नगर निगम क्षेत्र में बिक्री के आधार पर दुकानों को प्रतिदिन 1,000 से 2,000 रुपये तक दिए जाएंगे। अन्य स्थानीय निकायों में भी दुकान की स्थिति और बिक्री के अनुसार अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा खाली बोतलों के संग्रह और प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए रिवर्स वेंडिंग मशीनें लगाने की योजना भी बनाई जा रही है।

ग्राहकों को MRP से ज्यादा पैसे देने की जरूरत नहीं
TASMAC ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद दुकानदार संशोधित MRP से अधिक रकम नहीं वसूल सकेंगे। पर्यावरण उपकर की राशि पहले से ही नई कीमत में शामिल होगी। इसलिए खाली बोतल वापसी योजना के नाम पर अलग से 10 रुपये या कोई अन्य अनधिकृत राशि मांगना नियमों के खिलाफ होगा।

कुल मिलाकर, तमिलनाडु सरकार की यह नई व्यवस्था शराब की खाली बोतलों के प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी राजस्व की पारदर्शिता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि खाली बोतलों की वापसी और ग्राहकों को पैसे लौटाने की प्रक्रिया कितनी आसान और प्रभावी बन पाती है।




